53 करोड़ की अमृत योजना में इंटकवेल ही बना दिया गलत

53 करोड़ की अमृत योजना में इंटकवेल ही बना दिया गलत

Nilesh Trivedi | Publish: Mar, 17 2019 11:13:17 AM (IST) Mandsaur, Mandsaur, Madhya Pradesh, India

53 करोड़ की अमृत योजना में इंटकवेल ही बना दिया गलत


मंदसौर.
शहर में स्थाई जलापूर्ति के इंतजाम के लिए अमृत योजना में 53 करोड़ की योजना पर काम शुरु हुआ। लेकिन लेटलतीफी और अनदेखी के कारण इसमें बहुत देर हो गई और अब लागत भी बढ़ती जा रही है। इन सबके अलावा कोल्वी नदी पर जो इंटकवेल बनना था। वह बना तो सही लेकिन तकनीकि रुप से पूरी तरह गलत बनाया गया।

मामला उठा भी सही और गरमाया भी, लेकिन जोड़तोड़ के जरीए गलत बना हुआ इंटकवेल शासन ने अप्रुव कर दिया।तो अब इसे सही साबित करने के लिए रास्ता खोजने का काम शुरु किया हुआ। इसमें तीन लेयर के पोर्ट से जो इंटकवेल को नदी के पानी से जोड़े। यह बनाया जाना है, लेकिन वह भी अब तक नहीं बन पाया है। इधर मंदसौर शहर चंबल के पानी का इंतजार कर रहा है और इसमें तकनीकि कारणों के कारण लगातार देरी होती जा रही है।


तकनीकि रुप से इसलिए गलत हैइंटकवेल
जलापूर्ति योजना में जहां इंटकवेल बनाए जाते है।वह नदी में बनाए जाते है। जिससे की पानी का प्रवाह सही रहे। लेकिन यहां नदी में नहीं बनाते हुए चंबल के किनारेें पर ५०० मीटर से अधिक दूरी पर बना दिया है। जो पूरी तरह तकनीकि रुप से गलत बताया जा रहा है। अब इंटकवेल को नदी के पानी से जोडऩे में दिक्कत आ रही है।

मामला खूब उछला और गरमाया लेकिन शासन से इंटकवेल अप्रुव कर दिया गया।इसके बाद इसे ठंडे बस्ते में डालते हुए पोर्ट से इसे जोडऩे की योजना पर काम शुरु हुआ, हालांकि यह अभी नहीं हो पाया है। ५३ करोड़ के प्रोजेक्ट में इतनी बड़ी गलती होने के बाद भी मॉनीटरिंग करने वाली नगर पालिका ने अब तक इस मामले में किसी पर कार्रवाई नहीं की और न हीं इसके लिए किसी को जिम्मेंदार ठहराया गया। इसका खामियाजा शहर अभी से चंबल के पानी से वंचित होकर भुगत रहा है।


तकनीकि रुप से गलत था इसलिए लिखी थी चि_ी
विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने इंटकवेल को लेकर पूर्व में तत्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री मायासिंह व विभाग के प्रमुख सचिव को चि_ी लिखते हुए तकनीकि रुप से इसे गलत बनाने की शिकायत की थी। साथ ही नदी के सतह और नदी के किनारें पर बनाए जाने के कारण इसमें कास्ट डिफरेंस का मामला भी उठाया था। इसी मामले को लेकर तत्कालीन समय में विधानसभा में भी सवाल उठाया था।


ईएनसी से लेकर कलेक्टर सहित अधिकारी कर चुके निरीक्षण
इंटकवेल के भले ही गलत बनाने का मामला उठ रहा हो और इसी कारण पोर्ट के काम के साथ इंटकवेल को नदी के पानी से जोडऩे का काम अब तक नहीं हो पाया हो। और इसकी शिकायतें भी हुई बावजूद इसे लेकर किसी भी स्तर से अब तक कार्रवाई नहीं हुई और इसे अप्रुव शासन से जोरआजमाईश केा बाद मिल गई। जनवरी माह में इस प्रोजेक्ट का निरीक्षण ईएनसी ने यहां पहुंचकर किया था। और फरवरी में पूरा करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नए कलेक्टर भी आने के बाद इसका निरीक्षण करने पहुंचे थे। तो इसके पहले भी अनेक अधिकारियों ने यहां पहुंचकर इसका निरीक्षण किया। सभी के सामने यह मामला उठा तो सही लेकिन हल में सिर्फ यहीं निकला कि इसे पोर्ट से जोड़ा जाएगा।


शासन ने कर दिया अप्रुव
शासन ने इसे अप्रुव कर दिया है।नदी में बनाना था, लेकिन दूर किनारें पर बनाया है। यह सही है, लेकिन इसे अब तकनीकि रुप से पोर्ट से जोड़ा जा रहा है। जो तीन लेयर में होगा। पोर्ट से इसमें पानी की समस्या नहीं आएगी।-आरपी मिश्रा, सीएमओ

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