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गांव के खेतों में मजदूरी करने वाली मांगीबाई अब करेगी गांव का विकास

गांव के खेतों में मजदूरी करने वाली मांगीबाई अब करेगी गांव का विकास

मंदसौर

Published: June 09, 2022 11:11:55 am

मंदसौर.
आदिवासी क्षेत्र के राणापुर से करीब ३०-३५ साल पहले जिले के आक्याबिका में मजदूरी के लिए आए परिवार की महिला अब गांव की प्रधान होकर कमान संभालेगी। सालों से गांव के खेतों में मजदूरी करने वाली मांगीबाई अब गांव का विकास करेगी। मजदूरी कर गुजर-बसेरा करने वाला गांव में एक ही आदिवासी परिवार है। और इस बार पंचायत चुनाव के आरक्षण में सीट आरक्षित हो गई। ऐसे में एक ही परिवार होने के कारण ग्रामीणों ने महिला को निर्विरोध सरपंच चुन लिया। ऐसे में आरक्षण प्रक्रिया के चलते मजदूरी करने वाली महिला अब सरपंच बन गई। अपने खेतों में काम करने वाली महिला को ग्रामीणों ने सरपंच चुनकर गांव के विकास की बागडोर सौंपी है।
सीएम आए गांव तो रखेंगे विकास की बात
सीएम शिवराजसिंह चौहान ने समरस पंचायत वाली पंचायतों के लिए पुरुस्कार की घोषणा की है। इसके साथ ही उन पंचायतों में आने की बात भी पिछले दिनों कही है। ऐसे में अब मांगीबाई सहित ग्रामीणों को सीएम के गांव में आने और सीएम से मिलने की आस है। मांगीबाई ने कहा कि सीएम आएंगे तो उन्हें गांव में जो काम कराने है उनको लेकर मांग पत्र दूंगी।
मजदूरी करने वाली महिला ऐसे बन गई सरपंच
राणापुर के समीप गांव में रहने वाला धन्नालाल अपने पिता के साथ जिले के गांव आक्याबिका में पहुंचा और यहां स्कूल के सामने मैदान में खुले आसमान में रहकर मजदूरी का काम करते थे। बारिश आई तो ग्रामीणों ने सहारा दिया और झोपडिय़ा बनवाई। फिर धीरे-धीरे काम मिलता गया और बड़े किसानों के यहां स्थायी मजदूरी का काम करने लगे। काम देने के अलावा ग्रामीणों ने सहायता भी की कुछ समय बाद धन्नालाल के पिता चले गए लेकिन धन्नालाल ने गांव में काम करना जारी रखा और अपने सभी दस्तावेज भी बनवा लिया। अब पत्नी मांगीबाई व बच्चों के साथ वह यहां रहता है। उसका घर भी बनवा लिया है। ऐसे में जब इस बार महिला वर्ग के लिए सीट आरक्षित हुई तो उनकी पत्नी मांगीबाई को निर्विरोध सरपंच ग्रामीणों ने चुना और मांगीबाई के हाथ गांव की कमान सौंपी। धन्नालाल ने कहा कि जिस गांव के लोगों ने सालों से हर कदम पर उनकी सहायता की अब उस गांव की सेवा करने का अवसर आया तो वह कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
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मजदूरी के लिए यहां आए थे
मजदूरी के लिए यह परिवार यहां आया था। खुले में रहता था। एक ही आदिवासी परिवार है जो राणापूर से आया था। सालों से यही रह रहे है और इनकी मेहनत और व्यवहार से ग्रामीणों का दिल जीता तो ग्रामीणों ने यहां के दस्तावेज बनवाने से लेकर इनकी खूब मदद की। आज भी यह परिवार मजदूरी कर अपना बसेरा कर रहा है। आरक्षण में आदिवासी सीट आई तो एक ही परिवार होने के कारण ग्रामीणों ने इन्हें सरपंच चुना। अब सभी इन्हें गांव के विकास में सहयोग करेंगे।-पन्नालाल सूर्यवंशी, ग्रामीण
गांव वालों ने सालों से की सहायता, अब करेंगे सेवा
३० साल पहले जब मैं छोटा था तो मेरे पिता के साथ यहां आया था। तब स्कूल के सामने खुला मैदान था वहा रहते थे। राणापुर क्षेत्र में मजदुरी नहीं मिलती थी इसलिए यहां आए थे। बारिश में ग्रामीणों ने सहायता कर झोपडिय़ा बनवाई और हम रहने लगे। गांव के पटेल के यहां हाली (मजदुरी) का काम करते थे। राशनकार्ड से लेकर आधार और वोटर आईडी सबकुछ है। गांव वालों ने सालों से हमारी सहायता की और हम यहां बस गए। गांव में हमारा ही एक परिवार है। जब सीट आरक्षण में आई तो गांव वालों ने हमें सरपंच बनाना तय किया। जिस गांवों ने सालों से हमारी सहायता की अब उस गांव की सेवा करेंगे। आक्याबिका से लेकर बासखेड़ी में पानी की समस्या हल करने का सबसे पहले काम करेंगे।-धन्नालाल, सतपंच पति

मजदूरी करते है, अब करेंगे सेवा
गांव में रहकर मजदूरी का काम करते है। इस चुनाव में आदिवासी सीट आई है तो गांव वालों ने सरपंच बनाया है। अब तक पटेल साहब के यहां और गांव में जहां भी मजदुरी मिलती है वहां काम करते थे। अब गांव वालों की सेवा करेंगे। गांव वालों के साथ मिलकर शासन की मदद से जो भी आएगा वह सब काम करेंगे। गांव में उनका ही परिवार है। ३५ सालों से वह यहां रह रहे है। अब यही के हो गए है। जैसा गांव वाले कहेंगे वही विकास का काम करेंगे।-मांगीबाई, आक्याबिका की निर्विरोध चुनी गई सरपंच
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