किसानों की पूंजी मानी जाने वाली लहसुन के दाम ‘धड़ाम’

- दो माह में ३ हजार रुपए क्विंटल दाम हुए कम

By: harinath dwivedi

Published: 13 Mar 2018, 12:52 PM IST

मंदसौर.
लहसुन को किसान अपनी पंूजी मानते है। उनके लिए यह नगदी फसल है। आड़े वक्त में लहसुन ही उनका सहारा होती है। वे लहसुन बेचकर अच्छी खासी राशि लेकर अपना काम निकाल लेते है। इस वर्ष शुरु से ही लहसुन के दामों में गत छह माह की अपेक्षा गिरावट थी। इस सीजन के शुरुआती कुछ दिनों में किसानों की लहसुन सबसे अच्छी क्वालिटी ५ से ६ हजार रूपए प्रतिक्विटंल बिकी। अब बेहद उत्तम क्वालिटी दाम भी २ हजार प्रतिक्विटंल रह गए है। तीन दिन में ही एक हजार रूपए प्रतिक्विटंल की गिरावट आ गई है। लहसुन के दाम धड़ाम होने पर किसान मायूस भी है और आक्रोशित भी। एक ओर तो लहसुन के दाम पिछले एक दशक में सबसे नीचली स्थिति में है। दूसरी ओर इस बार लहसुन का उत्पादन बंपर हो रहा है। प्रतिदिन केवल मंदसौर कृषि उपज मंडी में ही ५० से ६० हजार बोरी की आवक हो रही है।


सोमवार को अच्छी क्वालिटी की लहसुन भी १००० से १२०० क्विटंल के भाव से ही बिकी। दो-तीन ढेर अपवाद रहे। क्योंकि लगभग दो हजार रूपए प्रतिक्विटंल के मान से बिकी। किसान व्यथित है कि किसानों ने इस बार ८ से २० हजार रूपए प्रतिक्विटंल के मान से बीज खरीदा था। मंहगी दवाईयां को छिडक़ाव, खाद, निंदाई, मजदूरी, परिवहन को मिलाकर ७० हजार रूपए प्रतिबीघा का खर्चा उटी की लहसुन में होता है। देशी लहसुन का खर्चा भी करीब २३ से २४ हजार रूपए प्रतिबीघा है। इस बार १२ से १५ हजार बीघा प्रतिक्विटंल बिकने वाली उटी की लहसुन ढाई से तीन हजार रूपए प्रतिक्विटंल के भाव से ही बिक रही है। नगरी प्रतिनिधि के अनुसार किसान औंकारलाल धाकड़ ने बताया की 4 बीघा में 1 लाख 70 हजार का उटी बीज लगाया,उत्पादन 40 क्ंिवटल हुआ, 2 हजार रुपए क्ंिवटल के भाव से 80 की लहसुन हुई। सभी खर्चे जोडऩे पर करीब डेढलाख की नुकसानी हुई है। ओमप्रकाश धाकड़ कहना है कि ढाई बीघा में उटी लहसुन लगाई थी,पांच क्ंिवटल बीज 17हजार रुपए प्रति क्ंिवटल के भाव से खरीदा था। भावों को देखते हुए अब नुकसानी के अलावा कुछ नहीं है


किसान यूं बंया की अपनी पीड़ा
- कृषि उपज मंडी में लहसुन बेचने आए उज्जैन जिले के बदनावर तहसील के मुल्तान गांव के किसान भेरूलाल पाटीदार ने कहा कि उनकी लहसुन १२०० रूपए प्रतिक्विटंल के मान से बिकी है। लहसुन की फसल के रखरखाव में कोई कसर नहीं छोड़ी। जलसंकट होने के बाद भी ५ से ६ बार सिंचाई की। समय-समय पर निंदाई, खाद एवं दवाई का छिडक़ाव भी किया। फसल का उत्पादन भी अच्छा हुआ। मंडी में लहसुन जिस भाव से बिकी उस भाव से तो मजदूरी पर किया खर्च भी नहीं मिला।
- राजस्थान के झालावाड़ जिले के रामगंजमंडी तहसील के भगोर गांव के किसान रामङ्क्षसह डांगी ने कहा कि डेढ़ सौ किलोमीटर दूर से लहसुन लेकर आया हूं। भाड़ा भी मंहगा है। दो दिन भी यहां रूके तब जाकर लहसुन निलामी में नंबर आया और भाव ११०० रूपए प्रतिक्विटंल के मान से ही बिके। फसल की लागत मूल्य भी नहीं मिली।
- सीतामऊ तहसील के सेतखेड़ी गांव के दशरथ कुमावत ने कहा कि फसल तो अच्छी हुई पर दाम कोडिय़ों के हो गए। तीन से चार माह की मेहनत बेकार ही गई। मजदूरी भाड़ा से ज्यादा कुछ नहीं मिला। इससे खासी निराशा है।
- भगोर के किसान जगदीश डांगी ने कहा कि उनकी लहसुन ११७५ रूपए प्रतिक्विटंल के मान से बिकी है। जबकि बीज ही ८ हजार रूपए क्विटंल के मान से खरीदा था। भाव धड़ाम होने से मायूस है। सरकार ने भाव नियंत्रण नहीं करके किसानोंं की कमर ही तोड़ कर रख दी है।


इनका कहना
इस बार लहसुन का बंपन उत्पादन हुआ है। किसानों ने इस बार गत वर्ष की अपेक्षा लहसुन की बुआई अधिक की है। यह बात सही है कि जनवरी माह में नई लहसुन की आवक के समय ५ से ६ हजार रूपए प्रति क्विटंल के भाव थे। वर्तमान में १२०० प्रतिक्विंटल देशी लहसुन के है। जबकि उटी के भाव ढाई से तीन हजार रूपए प्रतिक्विटंल के है। इन दिनों मंडी में ५० से ६० बोरी की आवक हो रही है। पर मंडी में लहसुन मंडी प्रागंण में जगह नहीं होने से २५ से २६ हजार बोरी प्रतिदिन निलामी हो रही है।
- ओपी शर्मा, सचिव कृषि उपज मंडी मंदसौर।

harinath dwivedi Editorial Incharge
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