प्याज ने पहले रुलाया था किसानों को तो हुआ था किसान आंदोलन, अब भी वहीं है हाल

- सरकार खरीदेगी 16 मई से, तब तक घाटे में मंडी में बिक जाएगा प्याज

By: harinath dwivedi

Updated: 25 Apr 2018, 02:40 PM IST

मंदसौर.
जिले का किसान इस समय भारी परेशानियों से गुजर रहा है। करीब २२ हजार प्रति हेक्टेयर में प्याज उगाने वाले किसान को मंडी से सिर्फ ६ हजार रुपए प्रति हैक्टेयर ही उपज राशि प्राप्त हो रही है। इस दर से किसान को करीब १४ हजार रुपए प्रति हैक्टेयर प्याज की उपज पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार यदि समर्थन मूल्य पर ८ रुपए प्रति किलो भी खरीदती है तो भी उनकी लागत नहीं मिलेगी। लाभ तो दीगर बात होगी।


८०० से १००० क्विंटल प्रतिदिन हो रही प्याज की आवक
जिले में किसान आंदोलन के बाद सरकार ने किसानों को अपनी ओर खींचने के लिए भावांतर सहित कई तरह की योजनाएं प्रारंभ की है। वर्तमान में लहुसन की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। लेकिन प्याज की खरीदी अभी तक शासन नेे शुरु नहीं की है। शासन ने १६ मई से प्याज खरीदी करने की बात कहीं है। समर्थन मूल्य पर प्याज खरीदी की सरकार की लेट नीति भी किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। इसका प्रमाण यह है कि मंदसौर कृषि मंडी में करीब एक माह से प्रतिदिन ८०० से १००० क्विंटल प्याज की आवक हो रही है। ऐसे में समर्थन मूल्य शुरु होते-होते तो किसानों का सारा प्याज मंडी में बिक जाएगा। वर्तमान में अधिकांश किसानों को प्याज बेचने पर मुश्किल से ३ से ५ रुपए प्रति किलो का ही भाव मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पहले ही भावांतर भुगतान योजना से चना, मसूर व सरसों की फसल को बाहर कर दिया है।


तो मिल सकता था किसानों को लाभ
प्रदेश में प्याज के लिए सरकार ने आठ रुपए प्रति किलो समर्थन मूल्य तय किया है। जबकि वर्तमान में मंडियों में व्यापारियों द्वारा की जा रही खरीदी में अधिकतम दाम 6 रुपए प्रति किलो के करीब मिल रहे हैं। मंडी में रोजाना हो रही हजारों क्विंटल प्याज की खरीदी में किसानों को अपनी उपज के दाम नहीं मिल रहे हैं, यदि सरकार मई में शुरू होने वाली खरीदी एक माह पूर्व शुरू कराती तो किसानों को लाभ मिल सकता था। जानकारी अनुसार आमतौर पर प्याज की आवक मार्च में शुरू हो जाती है। यही कारण है कि मंडी बोर्ड ने 20 फरवरी से मंडी परिसर में प्याज खरीदी शुरू कर दी थी। सरकार द्वारा भावांतर योजना के तहत सीजन में प्याज की खरीदी नहीं करने को लेकर किसानों के आरोप हैं कि यदि 16 मई से खरीदी शुरू की जाएगी तो तब तक शासकीय खरीदी में बेचने के लिए किसानों के पास प्याज नहीं बचेगी।


पिछले साल हुआ था किसान आंदोलन
बीते साल किसानों को प्याज के दाम न मिलने के कारण पूरे प्रदेश में किसान आंदोलन शुरू हो गया था। मंदसौर में तो उपज को लेकर हुए आंदोलन ने पांच लोगों की जान तक ले ली थी। इसके बाद आनन- फानन में सरकार ने छह रुपए प्रतिकिलो समर्थन मूल्य तय कर प्रदेश में प्याज की खरीदी कराई थी, लेकिन उस दौरान भी यह बात सामने आई थी कि सरकार द्वारा की गई खरीदी में सबसे ज्यादा व्यापारियों ने प्याज बेची है।


७ लाख क्विंटल हुई है प्याज की पैदावार
उद्यानिकी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में प्याज का रकबा ३ हजार हेक्टेयर है और इसकी उत्पादकता 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। इस हिसाब से जिले में इस साल ६ से ७.५ लाख क्विंटल के बीच प्याज की पैदावार हुई है।


किसानों का कहना...
- रिंगनोद के बालाराम प्रजापत ने कहा कि मंडी में प्याज लाने के लिए किराया भी मंहगा पड़ रहा है। लागत मूल्य भी नहीं निकल रहा है। प्याज बेचने के लिए दो दिन तक इंतजार करना पड़ा, इसके बाद जाकर नंबर लगा। सरकार ८ रुपए प्रति किलो प्याज खरीदेगी लेकिन व्यापारी जिस भाव में नीलामी कर दे उस भाव में उसे देना मजबूरी है। मंडी में प्याज लाकर बिना बेचे वापस भी नहीं ले जा सकते।
- सिंदपन के पारसमल ने कहा कि प्याज की फसल घाटे का सौदा है। सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरु नहीं की है, प्याज के खराब होने के डर एवं राशि की आवश्यकता होने के कारण प्याज समर्थन मूल्य से पहले ही बेचना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा तय दाम से आधे दाम पर प्याज बेचने को मजबूर है। बमुश्किल अधिकतर किसानों का मंडी में प्याज ३ से ५ रुपए किलो के बीच ही बिक रहा है। ऐसे में सरकार के तय भाव से हमें आधे भाव भी प्याज के नहीं मिल रहे है।
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harinath dwivedi Editorial Incharge
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