यह गांव सामान्य वर्ग का है, वोट मांगकर शर्मिंदा ना करें - क्या है यह मामला

यह गांव सामान्य वर्ग का है, वोट मांगकर शर्मिंदा ना करें - क्या है यह मामला

harinath dwivedi | Publish: Sep, 03 2018 03:01:30 PM (IST) | Updated: Sep, 03 2018 03:05:04 PM (IST) Mandsaur, Madhya Pradesh, India

यह गांव सामान्य वर्ग का है, वोट मांगकर शर्मिंदा ना करें - क्या है यह मामला

मंदसौर.
मल्हारगढ़ तहसील के गांव हिंगोरिया छोटा के ग्रामीणों ने रविवार को गांव के प्रमुख मार्ग स्थित एक मकान पर बैनर लगाकर जमकर विरोध किया। ग्रामीणों ने इस बैनर पर लिखवाया कि यह गांव सामान्य वर्ग का है, राजनीतिक पार्टियां वोट मांगकर हमें शर्मिंदा ना करें। साथ ही बैनर पर वोट फॉर नोटा भी दर्शाया गया है। ग्रामीणों ने रविवार को एससी-एसटी एक्ट का विरोध भी किया। ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की और रैली निकाली। इसमें ग्रामीण सुमेरसिंह, शुभमसिंह, नरेन्द्र सिंह, कुशालसिंह, पप्पुसिंह, मिट्टुसिंह, राजेन्द्र सिंह, प्रेमसिंह, शंकरसिह, राजेन्द्र सिंह सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे।


गोवर्धनपुरा में एससीएसटी एक्ट को लेकर हुआ सांसद का विरोध

जिले में एससीएसटी एक्ट को लेकर अब जनप्रतिनिधियों का विरोध बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को सुवासरा के गोवर्धनपुरा गांव में सांसद सुधीर गुप्ता का पुतला लगाकर विरोध किया। इस दौरान सांसद के पुतले को ग्रामीणों ने चप्पलों की माला पहनाकर जमकर नारेबाजी कर पुतला फूंका। और अबकी बार नोटा में वोट देने को लेकर नारे लगाए। वहीं सपाक्स के प्रांतीय संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने सर्किट हाऊस पर सुबह प्रेस वार्ता की। शाम को सपाक्स ने एससीएसटी एक्ट एवं आरक्षण के विरोध में रैली निकाली।

गांव गोवर्धनपूरा में दोपहर अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव को लेकर व्यापक विरोध हुआ। ग्रामीणों ने सांसद का खुला विरोध करते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी की और अबकी बार चुनाव में नोटा दबाने का आह्वान किया गया। दोपहर के समय ग्रामीणजन गांव के चौराहे पर एकत्रित हुए। जहां उन्होंने सांसद के पुतले और इस पर अलग-अगल नारों के साथ पेपर चस्पा किए। और हमारी भूल कमल का फूल के साथ सांसद मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए अबकी बार वोट फॉर नोटा की अपील की गई। यहां लामबंद हुए लोगों ने सांसद के पुतले पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए एट्रोसिटी एक्ट का विरोध कर पुतला फूंक दिया।

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