403 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का किया सम्मान

403 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का किया सम्मान

harinath dwivedi | Publish: Sep, 08 2018 02:59:44 PM (IST) Mandsaur, Madhya Pradesh, India

403 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का किया सम्मान

मन्दसौर.
पोरवाल चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संजय गांधी उद्यान स्थित पं. मदनलाल जोशी सभागृह में आयोजित समारोह में समाज के प्रतिभावान बच्चों का सम्मान किया गया। ट्रस्ट द्वारा पोरवाल समाज के 403 प्रतिभावन छात्र-छात्राओं को शिल्ड एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे समाज के 137 छात्र-छात्राओं को चार लाख 23 हजार रुपए की छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई। प्रारंभ में मुख्य अतिथि पोरवाल महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण गुप्ता इंदौर ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पोरवाल चेरिटेबल ट्रस्ट अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पोरवाल महासभा के अध्यक्ष बीएल धनोतिया नीमच, पूर्व विधायक राधेश्याम मांदलिया, शिवकुमार फरक्या, गोविंद पोरवाल, मुकेश पोरवाल भी मंचासीन थे। इस अवसर पर पोरवाल समाज मंदसौर अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता, ट्रस्ट के मानसेवी सचिव रामनिवास धनोतिया, उपाध्यक्ष गोविन्द मुजावदिया, मदनलाल गुप्ता बड़ौद वाले, श्रीनिवास मण्डवारिया, राजेन्द्र मोयावाला उपस्थित थे। संचालन पोरवाल समाज सचिव जगदीश गुप्ता ने किया। आभार रामगोपाल घाटिया ऐरावाला ने माना।

मानव अपनी युवावस्था को धर्म आराधना, तप तपस्या में लगाएं
मनुष्य जीवन को बाल्यावस्था, युवावस्था व वृद्धावस्था तीन भागो में बताया गया। बाल्यवास्था में समझ नहीं होने के कारण के कारण धर्म आराधना करना कठिन होता है। यह बात अपूर्वप्रज्ञाजी मसा ने शास्त्री कॉलोनी स्थित जैन दिवाकर स्वाघ्याय भवन में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जन्म से लेकर 3 वर्ष तक बच्चे पैरो के साथ साथ हाथों से भी चलते है इसी कारण शिशु अवस्था में धर्म साधना नहीं उसी प्रकार वृद्धावस्था में शरीर इतना कमजोर हो जाता है कि मनुष्य सही तरीके से नही चल पाता है और उसे सहारे या लकड़ी की सहायता की जरूरत होती है। इसी कारण ज्ञानीजन कहते है बाल्यवस्था में मनुष्य चार टांग पर, वृद्धावस्था में तीन टांग पर चलता है धर्म आराधना, तप, तपस्याा के लिये शरीर का साथ होना आवश्यक है और बाल्वस्था व वृद्धावस्था में शरीर का साथ मिलना मुश्किल है। इसलिए जो भी धर्म आराधना तप तपस्या करना है तो युवावस्था में ही कर ले। नही तो वृद्धावस्था में पछताना ही पड़ेगा। उन्होंने पयूर्षण पर्व के दूसरे दिवस धर्मसभा में कहा कि जो भी धर्म आराधना करना है उसके लिये युवास्था ही उत्तम है युवास्था मे शरीर तो पुष्ठ होता है साथ ही व्यक्ति की इच्छाशक्ति भी दृढ होती है। धर्म आराधना के मार्ग पर चलकर परमात्मा की कृपा पायी जा सकती है। 9 सितम्बर को दोपहर 2 बजे भगवान महावीर का जन्मवाचन महोत्सव मनाया जाएगा।

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