तपस्वियों ने की तपस्या पूर्ण, निकला वरघोड़ा

तपस्वियों ने की तपस्या पूर्ण, निकला वरघोड़ा

harinath dwivedi | Publish: Sep, 16 2018 03:06:29 PM (IST) Mandsaur, Madhya Pradesh, India

तपस्वियों ने की तपस्या पूर्ण, निकला वरघोड़ा

 

मंदसौर.
पर्युषण पर्व समाप्ति पर पिपलियामंडी में शनिवार को तपस्वियों का वरघोड़ा निकाला। जिनप्रिया व अर्हमप्रिया मसा की निश्रा में 9 उपवास की तपस्या पूर्ण करने वाली तीन तपस्वी बहिनों कशीश अक्षय जैन, मोनिका पंकज सांखला व माया अनिल चौरडिय़ा का बैंड- बाजों के साथ प्रात: 9 बजे विमलनाथ जैन मंदिर से वरघोड़ा आरंभ हुआ। बग्गी में सवार तीनों तपस्वियों को नगर में जगह- जगह अभिनंदन किया। भगवान के रथ के आगे अक्षत की गहुलियां कर वधाया। जुलसू पुन: कुमठ आराधना भवन में धर्मसभा मेंं परिवर्तित हुआ। इस अवसर पर जिनप्रिया मसा ने कहा प्रभु के समीप पहुंचने के बहुत मार्ग है, लेकिन सबसे छोटा व सबसे कठिन मार्ग तप का है। तप से अपनी आत्मा को चमकाया जा सकता है। सभा का संचालन संघ अध्यक्ष अशोक कुमठ ने किया। तीनों तपस्वी परिवारों ने साधर्मी भक्ति का लाभ लिया। नगर सहित अंचल के धर्मालु भी उपस्थित थे।


9 उपवास की तपस्या पूर्ण होने पर निकला वरघोड़ा
चहेती मयूर सुराणा के 9 उपवास की तपस्या पूर्ण होने पर तपस्वी का अनुमोदना कार्यक्रम के अंतर्गत दलोदा जुलूस में निकाला गया व प्रभु दर्शन के लिए तपस्वी को शीतलनाथ मंदिर ले जाया गया। जुलूस महावीर मार्ग प्रगति चौराहा चौपाटी होते हुए मंदिर पहुंचा। जगह- जगह तपस्वी का बहुमान साल श्रीफल से किया गया। धार्मिक भजनों पर युवाओं महिलाओं बालिकाओं द्वारा नृत्य का गरबा किया गया। कार्यक्रम में सांसद सुधीर गुप्ता, बंशीलाल गुर्जर, महेंद्र चौरडिय़ा, राहुल नाहटा, वीरेंद्र सेठी, मानसिंह माचोपुरिया, अशोक यादव, सरपंच विपिन जैन, मंडी उपाध्यक्ष ईश्वरलाल पाटीदार, कारूलाल सोनी उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत राजेंद्र सुराणा व विजय सुराणा ने किया। शीतलनाथ राजेंद्र जैन श्वेतांबर मंदिर ट्रस्ट नवरत्न परिवार जयंतसेन महिला मंडल द्वारा तपस्वी का बहुमान किया गया।

अपने से गुणी व्यक्ति के प्रति विनयभाव रखे
कठोरता का परित्याग करेंगे तो मन कषाय पर विजय प्राप्त कर सकता है। मान-मन को मना लेता है और मन को मनमानी करने पर मजबूत करता है। यह बात सुभूषणमति माताजी ने बंडीजी के बाग में आयोजित धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा कि अपने से गुणों में जो अधिक है उनके प्रति विनयभाव होना चाहिए। वर्तमान समय में चारो ओर कषायों का प्रदूषण फैला हुआ है। सुआद्यमति माताजी ने संदेश दिया कि हमें अवगुणों को हृदय से हटाकर धर्म का रूप जग को दिखाना है। प्रारंभ में चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन, शास्त्र भेंट एवं पाद प्रक्षालन का महावीर दोशी परिवार ने लिया। मंगलाचरण विजय गांधी ने प्रस्तुत की। निज मंदिर में मूलनायक के अभिषेक शांतिधारा का लाभ ललित दोशी परिवार ने लिया। संचालन राकेश दोशी ने किया। आभार महिपाल भूता ने माना।

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