‘अंग्रेजी परस्त मानसिकता से हिन्दी के साथ किया जाता है सौतेला व्यवहार’

‘अंग्रेजी परस्त मानसिकता से हिन्दी के साथ किया जाता है सौतेला व्यवहार’

harinath dwivedi | Publish: Sep, 16 2018 03:00:46 PM (IST) Mandsaur, Madhya Pradesh, India

‘अंग्रेजी परस्त मानसिकता से हिन्दी के साथ किया जाता है सौतेला व्यवहार’

मन्दसौर.
हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी में इतनी क्षमता व सम्पन्नता है कि इस देश को अंग्रेजी की जरूरत ही नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य है कि हिन्दी अब एक ज्वलंत मुद्दा हो गई है, इसका समर्थन व इसका विरोध करना दो पहलू हो गये है जिनका स्वार्थवश समय-समय पर उपयोग किया जाता है।
यह बात जिला एवं सत्र न्यायाधीश तारकेश्वर सिंह ने कहीं। वे मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन की जिला इकाई द्वारा हिन्दी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी परस्त मानसिकता से हिन्दी के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है तथा कथित श्रेष्ठी वर्ग अंग्रेजी को ही अपनी भाषा मान बैठा है। विश्व साहित्य की सबसे समृद्ध भाषा हिन्दी है। सिंह ने कहा कि देश में कई प्रतिष्ठित हिन्दी पत्रिकाओं का बंद होना चिन्ता की बात है, हिन्दी को जनमानस तक लोकप्रिय व सम्पर्क भाषा बनाने में पत्र-पत्रिकाओं का काफी योगदान रहा है। उन्होंने सरकारी कामकाज में अंग्रेजी के उपयोग को गैऱ जरूरी बताया व कहा कि मैं जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहते हुए कोई भी फैसला अंग्रेजी में नहीं लिखवाऊंगा। संविधान ने राष्ट्रभाषा के लिए राज्यों का दायित्व निर्धारण किया है।


हिन्दी से हुआ है संस्कार व संस्कृति का सृजन
कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि हिन्दी के प्रति केवल भावनात्मक विलाप करने से कुछ नहीं होगा, हिन्दी को रोजगार की भाषा के साथ समाज उपयोगी भाषा भी बनाना है। हम अंग्रेजी के दुश्मन नहीं है किन्तु हमारी मातृभाषा हिन्दी की जगह अंग्रेजी ले ले यह तो कतई मंजूर नहीं है। हिन्दी को लेकर कुछ समस्याएं हम स्वयं ही बुन रहे हैं, मातृभाषा जो देश की भी भाषा है उसे लेकर किसी तरह का विरोधाभास नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा का मूल उसकी लिपी होती है। हिन्दी की जड़ देवनागरी लिपी है। हिन्दी की समृद्ध परम्परा रही है, हिन्दी को विश्व की सबसे सम्पन्न भाषा माना जाता है, संस्कार व संस्कृति का सृजन हिन्दी से हुआ है। हिन्दी में पूरी भारतीयता समाई हुई है। बैंक कर्मी नेता महेश मिश्रा ने भी संबोधित किया। मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संरक्षकगण सौभाग्यमल जैन, डॉ. ज्ञानचन्द खिमेसरा, नरेन्द्रसिंह सिपानी, डॉ. घनश्याम बटवाल भी उपस्थित थे।


यह भी रहे उपस्थित
समारोह में न्यायाधीश रूपेश कुमार गुप्ता, अनिरूद्ध जैन, एसडीएम शिवलाल शाक्य, सीएसपी राकेश मोहन शुक्ला, सीएमओ सविता प्रधान, वायडी नगर थाना प्रभारी विनोद कुमार कुशवाह तथा विक्रम विद्यार्थी, राव विजयसिंह, डॉ. देवेन्द्र पुराणिक, रूपनारायण जोशी, आलोक पंजाबी, बालूसिंह सिसौदिया उपस्थित थे। संगोष्ठी में युवा प्रतिभा दीक्षा नागोरे, दीपशिखा नागराज, धु्रव जैन, वरिष्ठ रचनाकार लाल बहादुर श्रीवास्तव व श्रीमती आरती तिवारी ने काव्य पाठ किया। संचालन ब्रजेश जोशी ने किया। आभार जयेश नागर ने माना।
-------------------------

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned