बताओ, इतने बड़े अस्पताल में आग लग जाए तो क्या करोगे

बताओ, इतने बड़े अस्पताल में आग लग जाए तो क्या करोगे

By: harinath dwivedi

Updated: 07 Jan 2019, 01:50 PM IST

मंदसौर.
इतना बड़ा अस्पताल है, दिनभर आप यहां ड्यूटी देते हो, सैकड़ो मरीज व परिजन यहां प्रतिदिन आते है। यदि यहां आग लग जाएं तो क्या करोगे। अग्निशमन यंत्र चलाना आता है या नहीं। यह बात कायाकल्प योजना के तहत मंदसौर के जिला चिकित्सालय में पहुंची दो सदस्यीय टीम के सदस्यों ने पैरामेडिकल स्टॉफ, नर्सेस सहित अन्य कर्मचारियों से पूछी। कई कर्मचारी तो इस बात का जवाब नहीं दे पाएं तो किसी ने अनभिज्ञता जाहिर की। किसी ने फायर फाइटर बुलाने की बात कहीं। इस पर टीम ने अग्निशमन यंत्र कैसे चलाते है और कैसे आग बुझाते है, इसके बारे में जानकारी ली। कई कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहंी थी। जिसे जानकारी थी उन्होंने इसे चलाकर अन्य कर्मचारियों को दिखाया। टीम के सदस्यों ने अस्पताल के सभी वार्डो में घूमकर मरीजों से चर्चा की। मरीजों से पूछा गया कि यहां साफ-सफाई कैसे होती है, कितनी बार होती है। झाडू- पोछा कितनी बार लगता है। चिकित्सको व स्टॉफ का व्यवहार कैसा होता है। कोई राशि की मांग तो नहीं करता है। समय पर सुविधाएं मिलती है या नहीं। शौचालय में सफाई होती है या नहीं। इस पर कई मरीजों ने व्यवस्था सहीं नहीं होने की बात भी टीम को कहीं। तो कई मरीजों ने व्यवस्था को अच्छा बताया। हालांकि टीम ने मरीजों व परिजनों से चर्चा के आधार पर अस्पताल को नंबर दिए। टीम ने भोजनशाला में पहुंचकर खाने का निरीक्षण किया। यहां खाने की गुणवत्ता के साथ ही खाद्य पदार्थो की जांच भी की गई। ड्यूटी के दौरान पैरामेडिकल स्टॉफ व अन्य कर्मचारियों के पहनावे के अलावा अन्य जानकारियां भी ली। ब्लड बैंक में जाकर व्यवस्था भी देखी। दिनभर टीम ने जिला चिकित्सालय में भ्रमण किया। टीम के साथ सिविल सर्जन डॉ अधीर मिश्रा, आरएमओ डॉ सौरभ मंडवारिया, अस्पताल प्रबंधक डॉ हिमांशु यजुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी साथ में थे।

7 पाइंट पर 600 अंकों के लिए करेगी टीम निरीक्षण
जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार कायाकल्प अभियान की टीम सात मानकों पर जिला अस्पताल का निरीक्षण करेगी। इसमें फेसेलेटी अपकीप, इंफेक्शन कंट्रोल, हाईजीन प्रामोशन, सपोर्ट सर्विसेस, एरिया आउट साइड, साफ-सफाई और लांड्री-कीचन शामिल है। इनमें सुविधाओं में गत वर्ष जिला अस्पताल को 76 फीसदी अंक मिलेगें। इन सातों मानकों के 600 नंबर होते है।

Patrika
harinath dwivedi Editorial Incharge
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