34 हजार बेरोजगारों में 17  फीसदी को भी रोजगार नहीं

34 हजार बेरोजगारों में 17  फीसदी को भी रोजगार नहीं

harinath dwivedi | Publish: Oct, 13 2018 10:04:45 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 10:04:46 PM (IST) Mandsaur, Madhya Pradesh, India

34 हजार बेरोजगारों में 17 फीसदी को भी रोजगार नहीं

मंदसौर । जिले में साल दर साल बेरोजगार युवकों की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन उस मात्रा में रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे है। यही कारण है कि साढ़े चार साल में जिले के अंदर केवल 5 हजार 638 बेरोजगारों को रोजगार के अवसर मिले है। रोजगार कार्यालय अधिकारियों की माने तो इनमें से सबसे अधिक निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। और सरकारी और अद्र्ध शासकीय क्षेत्र में केवल 267 लोगों को ही रोजगार मिला है।जानकार इसका सबसे बड़ा कारण जिले में उद्योगों का नहीं आना और सरकारी नौकरियों में वैकेंनसी बहुत कम निकलना मान रहे है।
पांच लाख 70 हजार से अधिक राशि कर दी खर्च
जिला रोजगार कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार एक साल में हर तीन माह में एक बार रोजगार मेला लगाया जाता है। उसमें निजी कंपनियों को आमंत्रित किया जाता है। इस पूरे रोजगार शिविर का खर्च 30 से 50 हजार तक आता है। एक साल में चार रोजगार मेला का आयोजन किया जाता है।यानि की एक साल में करीब १ लाख २० हजार रूपए खर्च किए जाते है। और इन सालों के शिविरों को खर्च जोड़े तो कुल18 से 19 शिविर लगाएं गए है। जिनमें केवल ५ हजार ४०० लोगों को निजी कंपनियों में रोजगार मिला है।
निजी कंपनियों का भी मोह हुआ खत्म
रोजगार मिली जानकारी के अनुसार सन् 2013 में रोजगार कार्यालय द्वारा शिविर लगाएं गए जिसमें १४२० युवक-युवतियों को रोजगार मिला। उसके बाद २०१४ में आंकडा घट कर १२०५ पर रह गया। इसके बाद 2015 मेंं रोजगार का आंकड़ा ७६० तक पहुंचा और फिर २०१६ में 1615 युवक-युवतियों को रोजगार मिला। सबसे कम रोजगार का आंकड़ा 2017 में रहा। इस वर्ष में सबसे कम 622 युवक युवतियों को रोजगार मिला।और 2018 में 1353 युवक युवितयों को रोजगार मिला।
होम सिकनेस भी एक कारण
जिले में कई ऐसे युवक है। जिनको होम सिकनेस है। वे जिले या उनके नगरीय क्षेत्र में ही रहकर कार्य करना चाहते है।ऐसे में निजी कंपनियों के द्वारा जब उनको जॉब ऑफर की जाती है। तो वे नहीं जाते है। जब जिले में रोजगार के अवसर तलाशते हैतो बड़े उद्योगों के नहीं होने के कारण उनको यहां पर निराशा हाथ लगती है। जानकार होमसिकनेस भी एक बड़ा कारण बता रहे है।
इनका कहना....
एक साल में चार बार शिविर लगाएं जाते है। निजी कंपनियों में टारगेट के अनुरुप रोजगार मिल रहा है।सरकारी नौकरी में अब पंजीयन कार्यालय में पंजीयन करवाना आवश्यक नहीं रहने के कारण आंकड़ा बहुत कम है।
एसएल राठौर, कार्यवाह प्रभार जिला रोजगार अधिकारी।

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