यूरिया खाद आया पर किसानों को नहीं मिला, सोसायटियों में भेजा

यूरिया खाद आया पर किसानों को नहीं मिला, सोसायटियों में भेजा

harinath dwivedi | Publish: Dec, 08 2018 06:30:56 PM (IST) | Updated: Dec, 08 2018 06:30:57 PM (IST) Mandsaur, Mandsaur, Madhya Pradesh, India

यूरिया खाद आया पर किसानों को नहीं मिला, सोसायटियों में भेजा

मंदसौर । किसानों के लिए वर्तमान की सबसे ज्वलतं समस्या बन चुका यूरिया खाद कईदिनों के इंतजार के बाद शनिवार को जिले में आया।नीमच में रैक लगने के बाद वहां से जिले को 1700टन यूरिया मिला। अब यह खाद सोसायटियों में भेजा जा रहा है। इधर मंदसौर में सरकारी गोदाम पर खाद लेने पहुंचे किसानों को बैरंग ही लौटा दिया। बिना खाद के किसानों को यहां से लौटाया गया और सोसायटियों से लेने की कहा।इधर किसान यूरिया के लिए कई दिनों से सोसायटी व सरकारी गोदामों में चक्कर लगा-लगाकर परेशान हो चुके है। फसल को वर्तमान में सबसे ज्यादा जरुरत यूरिया की हैऔर उसी की जिले में किल्लत हो रही है।इधर विभाग यह दावा भले ही कर रहा है कि किसानों को यूरिया की पूर्ति की जा रही है, लेकिन किसानों का तो यहीं कहना हैकि खाद कही पर भी नहीं मिल रहा है।
रकबा बढऩे से बढ़ी परेशानी, नकले कसने में नाकाम तंत्र
इधर विपणन विभाग और कृषि विभाग की माने तो इस बार जिले में गेहूं का रकबा बढऩे के कारण यूरिया की किल्लत हो रही है। रकबा बढऩे के कारण खाद की कमी हो रही है। पिछले साल १४ हजार टन यूरिया वितरित हुआ था। और इस बार अब तक १७ हजार से अधिक विभागीय आंकड़ों के अनुसार बट चुका है और सोसायटियों के पास स्टॉक की माने तो १८ हजार टन तक यह आंकड़ा पहुंच चुका है, फिर भी मांग बनी हुई है। सबकुछ होने के बाद विभाग का यूरिया के नाम पर पूरा प्रबंधन ही इस बार फैल साबित हुआ है। यूरिया के नाम पर सोसायटियों से लेकर बाजार की कालाबाजारी को पकडऩे और रोकने में विभाग नाकाम साबित हुआ है और इसका खामियाजा किसान भुगत रहा है।
जो नहीं चाहिए वह मौजूद, जो चाहिए वह नहीं
वर्तमान में किसानों को यूरिया ही चाहिए, लेकिन यूरिया की ही किल्लत हो रही है। जबकि डीएपी से लेकर पोटॉश व एसएनएम जैसे खाद की जिले में पर्याप्त मौजूद है, लेकिन किसानों को यह नहीं चाहिए। सिर्फ यूरिया खाद ही किसान मांग रहे है। इस तरह जो खाद चाहिए वह तो नहीं मिल रहा हैऔर जो नहीं चाहिए वह खाद गोदामों में पर्याप्त मात्रा में पड़ा है।
यूरिया का आंकड़ा टनों में लेकिन किसान के हाथ खाली
शनिवार को भी जिले में विभिन्न अंचल से किसान यहां खाद लेने पहुंचे लेकिन उन्हें यह कहकर लौटाया गया कि अपनी-अपनी सोसायटियों से खाद ले। यहां से खाद सोसायटियों तक भेजा जा रहा है। मंदसौर आने के बाद फिर किसान खाद के लिए अपनी सोसायटी पहुंचा। नीमच से जिले को खाद मिला जो किसानों को यहां तो नहीं दिया लेकिन किसानों को बांटने के लिए सोसायटियों में भेजा गया। विभागीय आंकड़ों की माने तो टनों से खाद आया और जिले में गया लेकिन किसानों के हाथ अभी भी खाली है। अब यदि किसानों तक नहीं पहुंचा तो जिले में आया टनों का यूरिया कहा गया। यह भी बड़ा सवाल बन रहा है। लेकिन प्रशासनिक तंत्र और विभाग यूरिया के नाम पर हो रही इस परेशानी से पूरी तरह बेपरवाह बना हुआ है।
1700 टन जिले के लिए मिला खाद
नीमच में रैक लगा था। ३ हजार टन का था।इसमें से १७०० टन मंदसौर व १३०० टन नीमच जिले के लिए यूरिया मिला है। औरभी मांग भेज रखी है। यूरिया की पर्याप्त पूर्ति हो जाएगी।जिले में १८ हजार टन के यूरिया किसानों के बीच वितरित हो जाएगा। लक्ष्य से इस बार अधिक यूरिया जिले में वितरित हुआ है।
-एएल पांडेय, डीएमओ, मंदसौर

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