जिले के 13 औषधालयों में वार्ड बॉय और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ही ‘डॉक्टर’

जिले के 13 औषधालयों में वार्ड बॉय और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ही ‘डॉक्टर’

By: harinath dwivedi

Published: 18 Dec 2018, 05:54 PM IST

मंदसौर । जिले में आयुर्वेद औषधालयों के हाल खराब है। ग्रामीण अंचल में औषधालयों पर डॉक्टर नहीं होने पर वार्ड बॉय या महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ही मरीजों का उपचार करने को मजबूर है। ऐसे एक या दो नहीं बल्कि 13 औषधालय है।वहीं करीब 18 औषधालयों पर कंपाउंडर ही मरीजों का उपचार कर रहे है। जिले में केवल आठ औषधालयों पर ही डॉक्टर है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में आयुर्वेद से उपचार की व्यवस्था कैसी चल रही है।
आठ औषधालयों पर ही डॉक्टर तो 21 कंपाउंडर के पद खाली
जिला औषधालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में ३९ औषधालय है। और एक जिला अस्पताल है।इनमें से केवल कोटड़ा बर्जुग, चंदवासा, नावली, नगरी, सेजपुरिया, अभिनंदन, पिपलियामंडी, लूनाहेड़ा औषधालय में डॉक्टर है। और 18 कंपाउंडर ही है। जबकि जिले में ३९ कंपाउंड के पद है। इसके अलावा जिले में 35 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पद है।लेकिन केवल 9 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ही जिले में कार्यरत है। जिला अस्पताल में पांच डॉक्टरों के पद है। जिसमें दो विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद लंबे समय से खाली पड़े हुए है। वर्तमान में केवल 3 डॉक्टर ही कार्यरत है।
तीन औषधालयों में स्टाफ ही नहीं
जिला कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले के गौर्वधनपुरा, अफजलपुर और दूधाखेड़ी में स्थित औषधालयों में स्टाफ ही नहीं है। यहां पर एक-एक कर्मचारी अटैच कर रखा है। जिससे की औषधालय केवल खुले रहे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैकि जिले में आयुर्वेद चिकित्सा के हाल कितने खराब है। सबसे अधिक समस्या उन मरीजों के लिए है जो आयुर्वेद चिकित्सा से उपचार करवा रहे है।
फैक्ट फाइल
जिला अस्तपाल-१
औषधालय-३९
डॉक्टर पद-४३
रिक्त पद-३०
कंपाउंडर पद-३९
रिक्त पद-२१
महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता-९
रिक्त पद-26
इनका कहना....
जिले में केवल १3 डॉक्टर है। शेष पद खाली पड़े हुए है।ऐसे ही कंपाउंर के २१ पद खाली पड़े है। जहां डॉक्टर और कंपाउंडर नहीं है। वहां वार्ड बॉय और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ही औषधालय का कार्य देख रहे है। लंबे समय से जिले में चिकित्सकों सहित स्टाफ की कमी चली आ रही है।इसके लिए कइ्र बार रिमाइंडर भी भेजा है।
डॉ ओमनाथ मिश्र, जिला आयुर्वेद अधिकारी।

harinath dwivedi Editorial Incharge
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