पैदा होते ही बर्थ स्पेसिया और संक्रमण की जद में ‘नवजात’

पैदा होते ही बर्थ स्पेसिया और संक्रमण की जद में ‘नवजात’

By: Jagdish Vasuniya

Published: 29 Mar 2019, 05:23 PM IST

मंदसौर । जिले के अस्पतालों में लेबर रूम के मानकों के अनुरुप नहीं है।यही कारण है कि कई नवजातों को संक्रमण जैसी बीमारी होती है। या फिर बर्थ स्पेसिया नामक बीमारी की जद में नवजात आ जाते है। यह हम नहीं यह जिला अस्पताल का रिकार्ड बंया कर रहा है। हांलाकि इन दोनों बीमारियों से अधिक समय पूर्व प्रसव का प्रतिशत है। इसमें नवजात कुपोषित होते है। कुपोषण पर नियंत्रण करने के लिए प्रयास किए जा रहे है। लेकिन लेबर रूम में मानक अनुसार काम नहीं होने को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों ने अभी तक कोई सख्त कदम नहीं उठाए है। जिसके कारण यह समस्या जस की तस है।
जिला अस्पताल में समय पूर्व प्रसव तो बाहर के अस्पताल में बर्थ स्पेसिया अधिक
जिला अस्पताल की एसएनसीयू से मिली जानकारी के अनुसार १ अप्रैल २०१८ से २८ फरवरी २०१९ तक जिला अस्पताल से ९६८ नवजात एसएनसीयू में भर्ती हुए है। इसमें १७.१ प्रतिशत प्री मेच्यौर (कुपोषित नवजात), बर्थ स्पेसिया के १४.२ और संक्रमण करीब ७.३ प्रतिशत नवजात को हुआ है। जिले या अन्य बाहर के शासकीय या निजी अस्पताल में जन्मे करीब १४३७ नवजात भर्ती हुए है। इसमें से सबसे अधिक बर्थ स्पेसिया के १३.२ प्रतिशत, संक्रमण के १२.७ और ११.१प्री मेच्यौर (कुपोषित नवजात) की जद में है।
लेबर रूम नहीं मानक के अनुसार
डॉक्टरों के अनुसार संक्रमण और बर्थ स्पेसिया जैसी बीमारी के होने का मुख्य कारण एक लेबर रूम का मानक अनुसार नहीं होना है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मानव संसाधन सहित अन्य सुविधाएं है। मानक अनुसार लेबर रूम हो तो इस बीमारी पर भी काबू पाया जा सकता है। समय पूर्वप्रसव की प्रतिशत भी अधिक है। इसमें नवजात कुपोषण की जद में आता है। इस बीमारी को दूर करने के लिए गर्भवती महिलाओं को मानक अनुसार ही भोजन लेना चाहिए।
इनका कहना.....
प्रीमेच्यौर, बर्थ स्पेसिया और संक्रमण यह तीनों ही बीमारी नवजात में सबसे अधिक होती है। तीनों बीमारियों के अलग-अलग कारणों से होती है।
डॉ प्रकाश कारपेंटर, शिशु रोग विशेषज्ञ

Jagdish Vasuniya
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