scriptSanjay, who could not see since childhood, achieved his position with | बचपन से नहीं देख पाने वाले संजय ने जुनून से हासिल किया मुकाम | Patrika News

बचपन से नहीं देख पाने वाले संजय ने जुनून से हासिल किया मुकाम

बचपन से नहीं देख पाने वाले संजय ने जुनून से हासिल किया मुकाम

मंदसौर

Updated: July 23, 2022 10:50:43 am

भानपुरा.
कहते है दृढ़ निश्चय हो तो सफलता जरुर मिलती है। यही कहावत बाबूल्या के संजय ने चरितार्थ की है। कभी गांव के स्कूलों में उसे दाखिला नहीं मिला लेकिन पढऩे की ललक से वह जोधपुर स्कूल में पहुंचा और अब रेलवे में ग्रुप डी में नोकरी में लग गया है। पढऩे की ललक और जुनून से बचपन से ही देख नहीं पाने वाले संजय ने मुकाम हासिल कर सफलता पाई है।
जन्म के कुछ समय बाद पता चला कि वह देख नहीं पाता है
बाबूल्या में किसान परिवार में जन्मा संजय पिता उदेराम पाटीदार जन्म के कुछ समय बाद ही पता चला की वो अपनी दोनों आंखो से देख नहीं सकता था। लेकिन संजय जन्म से ही विलक्षण प्रतिभा का धनी था। उसने अपनी इस कमजोरी से कभी हार नहीं मानी और ना ही इससे वह टूटा। बल्कि सफलता के लिए दृढ़ निश्चय के साथ उसने अपने कदम बढ़ाए। मंजिल तक पहुंचने के इस सफर में परिवार ने भी उसका बखूबी साथ दिया।
दादा से पूछता था सामने कोन है क्या चीज क्या काम आती है
बचपन से ही वो प्रत्येक चीज के बारे में जिज्ञासा पूर्वक अपने पिता और दादा से पूछता था और हर एक चीज के बारें में जानकारी लेता था। सामने कोन है, क्या है, कोन सी चीज क्या काम करती है, कैसे काम करती है। उसने कभी भी अपनी इस कमजोरी को अपने ऊपर कभी हावी नहीं होने दिया। गांव के सभी स्कूलों ने उसे दाखिला देने से मना कर दिया। या यूं कहो की स्कूल की अपनी एक सीमा होती है ऐसे बच्चे को शिक्षा देने की। किंतु इसके बावजूद संजय ने हार ना मानते हुए भी सुन सुनकर प्रारंभिक शिक्षा ली।
जोधपुर के नेत्रहीन स्कूल से की पढ़ाई
प्रारंभिक शिक्षा के बाद किसी माध्यम से जोधपुर के नेत्र हीन विकास संस्थान से 12 वीं की परीक्षा पास की और उसके बाद जयनारायण व्यास महाविद्यालय जोधपुर से बीए, बीएड की पढ़ाई की। उसके बाद स्वाध्याय करके रेलवे की तैयारी करके ग्रुप डी में चयनित हुआ। और आज नोकरी कर रहा है। संजय ने बाबुल्दा जैसी छोटी जगह के लोगो के लिए एक मिसाल कायम की है। शारीरिक अक्षमता के बावजूद भी यदि मन में कुछ कर गुजरने की क्षमता है तो सब कुछ संभव है।
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