scriptServants never think about the result | सेवा करने वाले कभी परिणाम के बारें में नहीं सोचते | Patrika News

सेवा करने वाले कभी परिणाम के बारें में नहीं सोचते

सेवा करने वाले कभी परिणाम के बारें में नहीं सोचते

मंदसौर

Published: June 17, 2022 10:45:55 am


मंदसौर.
सेवा करने वाले कभी परिणाम की नहीं सोचते जो परिणाम के बारे में सोचते वह सेवा कभी नहीं करते। यह बात शिवना शुद्धिकरण व गहरीकरण महाअभियान के २९ वे दिन श्रमदान के दौरान अधिकारियों ने कहा। लगातार जारी श्रमदान में गुरुवार को आदिम जाति कल्याण विभाग से लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग से लेकर अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारियों ने यहां पहुंचकर श्रमदान किया। श्रमदान में अपार उत्साह के बीच जयकारों के साथ श्रमदान में गाद व मिट्टी निकालने का काम जारी है।
शिवना शुद्धिकरण अभियान में अपनी निस्वार्थ सेवा देने वाले मंडी के पूर्व इंजीनियर शिवेंद्र प्रताप सिंह 20 बार शिवना तट पर आकर लगातार डेढ़ घंटे तक श्रमदान करते है। इस अभियान में जो प्रतिदिन आकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं वह इस समय के संत हैं। बैठक एवं भाषण से दूर रहकर सेवा करने वाले परिवर्तन लाते है। 29 वे दिवस के इस महाअभियान में आदिम जाति कल्याण विभाग एके श्रीवास्तव, जिला संयोजक पिछड़ा वर्ग सहायक संचालक तीरथ गर्मेे अपने पूरे विभाग के कर्मचारियों के साथ पहुंचे और लगातार सेवा करते हुए उन्होंने कहा देश की आर्थिक समृद्धि का आधार इन नदियों में यदि जल को हम साफ स्वच्छ रख पाए तो भारत का इतिहास आने वाला 21 वीं सदी में सबसे ज्यादा उन्नति शील बनाने में इन नदियों का हाथ होगा। जिस प्रकार अटल बिहारी वाजपेई ने सडक़ों से खेतों को जोड़ा था आज प्रत्येक क्षेत्र को नदियों से जोडऩे की आवश्यकता है। जागीड़ ब्राह्मण समाज की शशि झलोया के नेतृत्व में कई समाज की बहनें इस में सम्मिलित हुई। मंदसौर का क्रांतिकारी संगठन जिसकी आवाज दिल्ली तक सुनी जाती है दशपुर जागृति संगठन 29 दिवस सेवा करते हुए क्रांतिकारियों का इतिहास को स्थाई रखने के लिए एक मिसाल कायम की है। हरिशंकर शर्मा, रविंद्र पांडे, बीएस सिसोदिया, महेंद्र प्रताप सिंह परिहार ने अपने पूरे साथियों के साथ तो राजाराम तंवर, अजीजुल्लाह खान, अरूण गौड़, बंशीलाल टांक, सत्येंद्र सिंह सोम, अनिल मालीवाल, सीमा चौरडिया, उषा कुमावत, संगीता मंडोरा, गोपाल शर्मा, केशव राव शिंदे आदि ने जयकारों के साथ श्रमदान किया। शिवना शुद्धिकरण अभियान में अपनी सेवाएं देते हुए कहा कि जब भी मां शिकार पुकारेगी वह यहां होंगे। शिवना महाकाल भगवान पशुपतिनाथ का उत्पत्ति स्थल है। दशपुर जागृति संगठन की पहचान निरंतरता के नाम से मंदसौर में जानी जाती है जो भी कार्य हाथ में लेता है संगठन मजबूती के साथ पूरा करता है। इस संगठन की सर्वाधिक लोग नित्य प्रतिदिन आते रहे हैं। सहस्त्र शिवलिंग दुनिया का सबसे बड़ा वह भी इस गर्भ ग्रह से प्रकट हुआ है। इस नदी के बारे में आने वाले समय में बड़ा इतिहास लिखा जाएगा। यहां श्रमदान करने से व्यक्ति का अंहकार खत्म हो जाएगा। महाअभियान का प्रत्येक जन तक संदेश दिया है। यह भगवान पशुपतिनाथ का आशीर्वाद का ही परिणाम है कि इसका असर हो रहा है और नदी साफ दिखने लगी है तो शासन स्तर से योजना को मंजूरी मिली है।
आर्थिक समृद्धि का आधार नदियां है
आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक एके श्रीवास्तव ने कहा कि देश की आर्थिक समृद्धि का आधार इन नदियों में यदि जल को हम साफ स्वच्छ रख पाए तो भारत का इतिहास आने वाला 21 वीं सदी में सबसे ज्यादा उन्नति शील बनाने में इन नदियों का हाथ होगा। जिस प्रकार अटल बिहारी वाजपेई ने सडक़ों से खेतों को जोड़ा था आज प्रत्येक क्षेत्र को नदियों से जोडऩे की आवश्यकता है।
परिवर्तन के लिए करना होगा काम
शिवेंद्र प्रगतापङ्क्षसह ने कहा कि जो लोग बैठक एवं भाषण से दूर रहकर सेवा करने वाले परिवर्तन लाते है। सेवा करने से ही परिणाम सुखद आएंगे। पशुपतिनाथ का उद्गम स्थल शिवना को प्रदूषण मुक्त और प्रवाहमान करने के लिए किया गया श्रम व सेवा सीधे भगवान की सेवा है। इसमें सभी को जुडऩा चाहिए।
भविष्य में नदी होगी प्रवाहमान
जागीड़ ब्राह्मण समाज की शशि झलोया के नेतृत्व में कई समाज की बहनें इस में सम्मिलित हुई। उन्होंने कहा कि नदियों का संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है। यहां श्रमदान कर अच्छा अनुभव हुआ। मातृशक्तियों ने बदलाव की ठानी है तो बदलाव हुआ है। शिवना पर श्रमदान का यह सांकेतिक अभियान भविष्य में जरुर बदलाव लाएगा और नदी प्रवाहमान होगी।
सेवा करने वाले कभी परिणाम के बारें में नहीं सोचते
सेवा करने वाले कभी परिणाम के बारें में नहीं सोचते

हमें समझना होगी भूमिका
पिछड़ा वर्ग आयोग के जिला संयोजक तीरथ गर्मे ने कहा कि नदियों के संरक्षण को लेकर हमें अपनी भूमिका समझना होगी। यह प्रशासन व शासन का नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति का दायित्व है। एक माह से चल रहा शिवना श्ुाद्धिकरण अभियान यहां के लोगों की जागरुकता को दर्शाता है। जनआस्था का केंद्र यह नदी है।

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