ऐसा क्या हुआ मंदसौर में जो हजारों विद्यार्थियों को होना पड़ा परेशान

harinath dwivedi

Publish: Jan, 13 2018 06:24:34 PM (IST)

Mandsaur, Madhya Pradesh, India
ऐसा क्या हुआ मंदसौर में जो हजारों विद्यार्थियों को होना पड़ा परेशान

- आरटीओ से मांगी मोहलत, कहा- ना करें कार्रवाई, दे थोड़ा समय

मंदसौर.
स्कूल बस की वायरिंग में शुक्रवार को हुए शार्ट- सर्किट के बाद परिवहन विभाग की कार्रवाई के भय से स्कूली ऑटो व नगर सेवा चालको ने शनिवार को हड़ताल कर दी। स्कूली ऑटो- मैजिक चालक बच्चों को लेने घर नहीं पहुंचे। इस कारण जहां हजारों बच्चे वाहनों का इंतजार करते रहे, वहीं दूसरी ओर अभिभावको को बच्चों को लाने व ले जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। नगर सेवा चालको ने परिवहन विभाग कार्यालय पहुंचकर आरटीओ रंजना कुशवाह से चर्चा की और तुरंत कार्रवाई ना करते हुए दस्तावेज पूर्ण करने के लिए ५-६ दिन की मोहलत मांगी एवं ओवरलोडिंग नहीं करने के लिए आरटीओ को आश्वस्त किया। हड़ताल के चलते स्कूली ऑटो चालको ने शहर के संजय गांधी उद्यान में अपने ऑटो खड़े कर दिए। ऑटो चालको का कहना था कि यदि आरटीओ द्वारा कार्रवाई की जाती है तो वे हड़ताल पर ही रहेंगे।
आरटीओ से मिले ऑटो व नगर सेवा चालक
शनिवार को हड़ताल के दौरान दोपहर में नगर सेवा और आजाद चौक नगर ऑटो यूनियन अध्यक्ष हिम्मत डांगी के नेतृत्व में वाहन चालक आरटीओ रंजना कुशवाह से परिवहन विभाग कार्यालय में मिले। यहां प्रकाश पिपलोदिया, भोला दीवान, फरजन, राजू जैन सहित कई चालको ने कहा कि विभाग द्वारा जिन वाहनों के दस्तावेज पूर्ण है, उन्हें परेशान ना किया जाएं और जिनके दस्तावेज अपूर्ण है, उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाएं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर ऑटो, मैजिक व बस चालक गंभीर होता है। क्योंकि चालक की ही जिम्मेदारी होती है कि वह बच्चों को सुरक्षित घर से लाए व घर तक पहुंचाएं। जान-बूझकर कोई भी चालक उक्त कार्य में लापरवाही नहीं करता है। जो ऑटो चालक ओवरलोडिंग करे उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। विभाग केवल ऑटो व नगर सेवा चालको पर ही कार्रवाई ना करें बल्कि बसों पर भी कार्रवाई करें। बसों के फिटनेस, बीमा सहित अन्य संसाधनों की जांच करें।
अभिभावक जागरुक रहेंगे तो सुधरेगी व्यवस्था
डांगी ने आरटीओ से कहा कि कई अभिभावक ५०-१०० रुपए बचाने के चक्कर में अपने बच्चो को ओवरलोडिंग वाहन में ही बिठा देते है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। यदि ऑटो- मैजिक वाहन या बस में जगह नहीं है तो बच्चों को उक्त वाहन में ना बिठाते हुए अन्य वाहन में बिठाएं। अभिभावक यदि जागरुक रहेंगे तो व्यवस्था सुधर सकती है। डांगी ने कहा कि विद्यालयों की भी पूर्ण जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की सुरक्षा पर पूरा ध्यान दें। यह कहकर इतिश्री ना करें कि उक्त वाहन हमारे स्कूल का नहीं है। यदि स्कूल में बच्चा पढ़ रहा है और वाहन बच्चों को लेने स्कूल में आ रहा है तो यह विद्यालय की जवाबदारी है बच्चों को सुरक्षित घर तक पहुंचाने के लिए संबंधित चालक को दिशा- निर्देश दें।
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बच्चे परेंटेस को तो पेंरेंंटस बच्चों को ढूढंते रहे
शहर के सेंट थॉमस स्कूल सहित कई विद्यालयों के बच्चे शनिवार को परेशान रहे। इसका कारण ऑटो- मैजिक वाहनों की हड़ताल थी। सुबह- सुबह विद्यार्थी स्कूल जाने के लिए तैयार होकर ऑटो- नगर सेवा का इंतजार करने लगे, लेकिन काफी देर इंतजार के बाद उन्हें लेने कोई वाहन नहीं पहुंचा। बच्चों के पालको ने जब संबंधित चालक को फोन किया तो पता चला कि आज हड़ताल है और ऑटो- नगर सेवा वाहन नहीं आएंगे। इससे विद्यार्थी परेशान हुए। इसके बाद अभिभावको (पेंरेंट्स) ने अपने- अपने साधनों से बच्चों को स्कूल पहुंचाया। कई बच्चे इस कारण स्कूल देरी से पहुंचे। स्कूल की छुट्टी होते ही बच्चो को लेने अभिभावक स्कूल पहुंचे। यहां अधिक संख्या में बच्चे होने के कारण अभिभावक बच्चो को ढूंढते रहे। वहीं बच्चे भी अभिभावक को ढूंढते रहे। अभिभावको व बच्चों को करीब २० से २५ मिनट तक परेशान होना पड़ा। इसके बाद सभी घर के लिए रवाना हुए। इस दौरान मार्ग में जाम की स्थिति भी निर्मित हुई। कई बच्चों के अभिभावक स्कूल समय पर नहीं पहुुंच सके। इस कारण बच्चों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
इंदौर की घटना का बना है बच्चों मेंं भय
सेंट थॉमस स्कूल में अध्यननरत कई बच्चों के अभिभावको ने कहा कि इंदौर की घटना के बाद बच्चों में भय बना हुआ है। मंदसौर में भी शुक्रवार को जो घटना हुई उससे फिर से बच्चों में भय व्याप्त हो गया है। ऐसे में शुक्रवार को हड़ताल के कारण बच्चों को परेशान होना पड़ा। स्कूल प्रबंधन को भी ध्यान देना चाहिए। नाम न छापने की शर्त पर बच्चो ने कहा कि एक ऑटो में १७ सवारी बिठाई जाती है। ओवरलोडिंग के कारण वाहन में ढंग से बैठ नहीं पाते है। साथ में बस्ता (स्कूल बेग) भी रहता है। ऑटो वाले भैय्या से इसका विरोध करते है तो वे अन्य ऑटो से स्कूल जाने व पेरेंट्स से पैसे बढ़ाने की बात कहकर बात टाल देते है। स्कूल प्रशासन से भी शिकायत करें तो भी कोई ध्यान नहीं देता है।
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विद्यार्थियों ने कहा...
सेंट थॉमस स्कूल में अध्ययनरत रामटेकरी निवासी नुपुर चौरडिय़ा, उत्सवसिंह डाबी ने कहा कि मेरी आज परीक्षा थी, काफी देर तक ऑटो का इंतजार किया, लेकिन वाहन नहीं आया। ऑटो वाले भैय्या को फोन किया तो पता चला कि आज हड़ताल है, इसीलिए ऑटो नहीं आएगा। स्कूल समय पर पहुंचना था तो पापा ने स्कूल छोड़ा और फिर लेने भी आएं। हड़ताल के कारण सबको परेशानी हुई।
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अभिभावको ने कहा...
सुबह बच्चे इस भरोसे में थे कि ऑटो आएगा। लेकिन समय बीत गया बाद में पता चला की हड़ताल है। इसके बाद जैसे- तैसे बच्चों को स्कूल छोड़ा। ऑटो में ओवरलोडिंग नहीं होना चाहिए। पालको तो यही चाहते है कि बच्चे सुरक्षित जाएं व सुरक्षित आएं। स्कूल प्रशासन को भी अलर्ट रहने की आवश्यकता है। बच्चो के लिए स्कूल प्रशासन, ऑटो-मैजिक या बस चालक सभी पॉजीटिव रहे, यहीं हर अभिभावक चाहता है।
- हेमंत पागे, अभिभावक
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ऑटो- मैजिक चालको की हड़ताल के कारण बच्चों व अभिभावको को बहुत परेशानी हुई है। अभिभावको को बच्चों को लाने व छोडऩे के लिए स्कूल आना पड़ा। साथ ही अन्य कार्य भी प्रभावित हुए। शासन- प्रशासन को चाहिए कि वे समस्या को लेकर गंभीरता बरतें साथ ही किसी को परेशानी ना हो। ऑटो- मैजिक में ओवरलोडिंग नहीं होना चाहिए। बच्चें वाहन में आराम से स्कूल पहुंचे व आएं, यहीं अभिभावक चाहते है।
- पंकज जैन, अभिभावक
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इंदौर हादसे के बाद जांच स्थिति
जिले में स्कूल बसें - २५०
अब तक हुई जांच - करीब ८०
फिटनेस निरस्त - १
बसों में मिली खामियां - सीसीटीवी कैमरे बंद, पुराने व घिसे टायर, स्पीड गर्वनर के मान से स्पीड सेट नहीं होना, दस्तावेज अपूर्ण।
कार्रवाई चली - ३ दिन
जुर्माना वसूला - ९ हजार रुपए
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चार स्कूलो की २३ बसो की हुई स्पीड चेक
शनिवार को आरटीओ के नवीन कार्यालय भवन पर बनाए गए ट्रेक पर वात्सल्य स्कूल, लोट्स वैली स्कूल, डेक्सटर किड्स स्कूल एवं दशपुर विद्यालय की करीब २३ बसों की स्पीड की जांच की गई। यहां कुछ बसों की स्पीड अधिक मिलने पर उनकी स्पीड को सेट किया गया। आरटीओ ने बताया कि सभी बसो में सीसीटीवी कैमरे व जीपीएस की भी जांच की गई, जो चालू हालात में मिले।
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आरटीओ का कहना...
शहर के ४ स्कूलो की २३ बसों का फिटनेस व स्पीड चेक शनिवार को की गई है। मैजिक व ऑटो चालक हड़ताल पर रहे है। इससे स्कूली बच्चों को परेशानी हुई है। वाहन चालको का कहना था कि विभाग द्वारा तुरंत कार्रवाई नहीं की जाएं, इसके लिए उन्हें करीब ५-६ दिन का समय दिया जाएं। ताकि वे आवश्यक संसाधन व दस्तावेज की कार्रवाई पूर्ण कर सकें। ओवरलोडिंग नहीं करने को लेकर ऑटो व नगर सेवा चालको ने आश्वस्त किया है, साथ ही कहा है कि जो ओवरलोडिंग करें उस पर कार्रवाई की जाएं।
- रंजना कुशवाह, आरटीओ
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पुलिस का कहना...
स्कूल बसों सहित अन्य वाहनों की जांच के लिए समय- समय पर अभियान चलाया जाता है। यदि किसी वाहन में अनियमितता मिलती है तो जुर्माना सहित अन्य कार्रवाई की जाती है।
- राकेश मोहन शुक्ल, सीएसपी
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