जीएसटी-नोटबंदी से नकद लेन-देन पर लगी लगाम: जेटली

 वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि नोटबंदी-जीएसटी से नगद लेन-देन मुश्किल होगा और इससे देश में कर अनुपालना और डिजिटलीकरण बढ़ेगा।

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि नोटबंदी-जीएसटी से नगद लेन-देन मुश्किल होगा और इससे देश में कर अनुपालना और डिजिटलीकरण बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से समानांतर अर्थव्यवस्था समाप्त हुई है। जेटली ने यह बातें सातवें दिल्ली इकोनॉमिक्स कॉनक्लेव में कहीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले तीन साल में एक-एक करके तीन बड़े बदलावों के जरिए काफी हद तक इस पर लगाम लगाने में कामयाबी पायी है। सबसे पहले उसने कालाधन (अघोषित विदेशी आय एवं परिसंपत्ति) तथा कराधान अधिनियम, 2015 लागू किया, जिससे लोगों के लिए विदेशों में कालाधन रखना मुश्किल हो गया। सरकार ने नोटबंदी की जिससे समानांतर अर्थव्यवस्था समाप्त हुई। 

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आसान नहीं होगा बैंका का कर्ज डकारना
उन्होंने कहा कि नोटबंदी से पहले कर चोरी और समानांतर अर्थव्यवस्था देश में सामान्य बात हो गई थी। इसमें महत्वपूर्ण बदलाव के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं जिसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर अनुपालना और डिजिटलीकरण नोटबंदी के परिणाम हैं। इसके अलावा मोदी सरकार ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता कानून बनाया जिससे बड़े पूंजीपतियों के लिए बैंकों से कर्ज लेकर डकार जाना संभव नहीं होगा। 

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मुखौटा कंपनियों को समाप्त करना जरूरी
वित्त मंत्री ने स्वच्छ अर्थव्यवस्था के लिए मुखौटा कंपनियों को समाप्त करना आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि कालेधन को सफेद बनाने का सबसे आसान जरिया मुखौटा कंपनियां थीं। कारोबारी और राजनीतिक लोग इसका समान रूप से इसका इस्तेमाल कर रहे थे। इसमें कई कंपनियों से होकर पैसा अंतत: वास्तविक मालिक के पास सफेद धन के रूप में पहुंचता था, जो इसके बाद इसे निवेश करता था। जितनी जल्दी यह तंत्र समाप्त हो जाएगा, उतनी जल्दी अर्थव्यवस्था साफ हो जाएगी।

भारत की चुनौतियां ज्यादा जटिल
कॉनक्लेव में सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री थरमन षणमुगारत्नम ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) तथा देश की आर्थिक संस्कृति में आए बदलाव की तारीफ करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार कई महत्वपूर्ण सेक्टरों में निवेश कर रही है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निवेश कम हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष भी अन्य देशों जैसी ही चुनौतियां हैं, लेकिन यहां की चुनौतियां ज्यादा जटिल हैं। 
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ललित fulara
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