322 दिन की उंचाई से फिसला कच्चा तेल, जानिए कितने हो गए हैं दाम

ब्रेंट क्रूड ऑयल और डब्ल्यूटीआई की कीमत में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट
पिछले सप्ताह बेंट्र क्रूड ऑयल का भाव चला गया था 56.36 डॉलर प्रति बैरल तक

By: Saurabh Sharma

Published: 11 Jan 2021, 12:53 PM IST

नई दिल्ली। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का भाव करीब 46 सप्ताह यानी 322 दिन की उंचाई से फिसल गया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 56 डॉलर से नीजे आ गए हैं। वहीं दूसरी ओर डब्ल्यूटीआई के दाम भी एक फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो कोरोना के गहराते कहर के चलते तेल की मांग पर असर पडऩे की आशंकाओं से कीमतों पर दबाव आया है। बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के दाम में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल रही है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल एक फीसदी फिसला
अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर ब्रेंट क्रूड के मार्च डिलीवरी अनुबंध में बीते सत्र से 1.07 फीसदी की गिरावट के साथ 55.39 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था, जबकि इससे पहले भाव 55.20 डॉलर प्रति बैरल तक टूटा। पिछले सप्ताह बेंट्र का भाव 56.36 डॉलर प्रति बैरल तक उछला था, जोकि पिछले साल फरवरी के बाद का सबसे उंचा स्तर है।

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अमरीकी ऑयल में भी गिरावट
वहीं, न्यूयार्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (नायमैक्स) पर वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) के फरवरी अनुबंध में बीते सत्र से 0.73 फीसदी की गिरावट के साथ 51.86 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ जबकि इससे पहले भाव 51.70 डॉलर प्रति बैरल तक टूटा। जबकि बीते सप्ताह अमरीकी ऑयल 52 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था।

भारत में कच्चे तेल का भाव
वहीं बात भारतीय वायदा बाजार की बात करें तो क्रूड ऑयल का भाव सपाट स्तर पर कारोबार कर रहा है। मौजूदा समय में भारतीय वायदा बाजार में क्रूड ऑयल 6 रुपए प्रति बैरल की तेजी के साथ 3808 रुपए प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। जबकि आज 3810 रुपए प्रति बैरल पर खुला था। वहीं 3785 रुपए प्रति बैरल के निचले स्तर पर भी चला गया था। आपको बता दें कि देश में क्रूड ऑयल के भाव में लगातार तेजी देखने को मिल रही है।

कोरोना वायरस की वजह से फिसला क्रूड
जानकार बताते हैं कि दुनियाभर में कोरोना के बढ़ते मामले के कारण लगाए गए प्रतिबंध खासतौर से चीन और यूरोप में लगाए गए लॉकडाउन के सख्त उपायों को लेकर तेल की मांग पर असर पडऩे की आशंका से बीते करीब साढ़े 10 महीने की तेजी पर ब्रेक लग गया है।

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