ऑनलाइन शॉपिंग पर पड़ेगी जीएसटी की मार, नहीं मिलेंगे फ्री ऑफर्स

मानसून सत्र में जीएसटी बिल पास होने पर कोई सामान खरीदने पर फ्री नहीं मिलेगा कोई भी सामान

By: अनिल जांगिड़

Published: 17 Jun 2016, 04:12 PM IST

नई दिल्ली। मानसून सत्र में संसद में बहुप्रतीक्षित जीएसटी बिल पास हो सकता है। तमिलनाडु को छोड़कर अन्य जीएसटी के प्रावधानों पर सहमत हो गए हैं। जीएसटी बिल के पास होने से सीधा नुकसान उन लोगों को होने वाला है ऑफर में खरीदारी करते हैं। माना जा रहा है कि जीएसटी आने के बाद बाय वन गेट वन स्कीम बंद हो सकती है। क्योंकि मॉडल जीएसटी लॉ में एक सामान खरीदने पर दूसरा फ्री मिलने वाला सामान भी टैक्स के दायरे में आ जाता है। यदि आप एक सामान खरीदने पर दूसरा सामान फ्री लेते हैं तो उसपर आपको टैक्स तो देना ही होगा।

ई-कॉमर्स सेक्टर भी दायरे में
सरकार द्वारा जो जीएसटी बिल का ड्राफ्ट पेश किया है, उसमें ई-कॉमर्स सेक्टर को भी इसके दायरे में लाया गया है। लेकिन यदि ऑनलाइन शापिंग जीएसटी के दायरे में आती है तो ऐसी कंपनियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। जीएसटी के ड्राफ्ट कानून में ई-कॉमर्स सेलर्स पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स यानी टीसीएस का इनको हानि पहुंचाने वाला है। माना जा रहा है जीएसटी बिल के प्रावधान लागू होने के बाद से बाजार में एक खरीदों एक फ्री पाओ जैसे ऑफर कम हो जाएंगे। क्योंकि दूसरी फ्री मिलने वाली वस्तु पर कीमत नहीं तो टैक्स तो देना होगा।


महंगा होगा ऑनलाइन सामान
ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए इस बिल को बुरा असर डालने वाला माना जा रहा है। ई-कॉमर्स कारोबारियों पर टीसीएस का प्रस्ताव भारी नुकसान पहुंचाएगा। इसकी वजह से ग्राहकों को ऑनलाइन सामान महंगा मिलेगा और वो स्थानीय मार्केट से कीमतों की तुलना करने के बाद ही सामान खरीदेंगे। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि क्या प्रमोशन के लिए फ्री बांटे जाने वाले सामानों पर यह टैक्स देना पड़ेगा? यदि ऐसा होता है तो इसका कंपनियों की सेल्स और मार्केर्टिंग पॉलिसी पर बड़ा असर होगा। वहीं अभी भी साफ नहीं हुआ कि क्या बिजनेस प्रमोशन के लिए दिए जाने वाले फ्री सैंपल पर भी टैक्स दिया जाएगा।

बिल लागू होने पर साफ होंगी नीतियां
माना जा रहा है कि जीएसटी लागू होने से पूरे सिस्टम में टैक्स नीतियां साफ हो जाएंगी। अभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचने वाले सेलर्स को केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स अलग-अलग फिल करने होते हैं। इसके अलावा कई राज्यों में तो अलग से एंट्री टैक्स या सरप्लस लेवी भी देनी पड़ती है। वहीं, इन सबसे हटकर जीएसटी से एक ही टैक्स से ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों को फायदे भी होंगे।

अब तक का सबसे बड़ा टैक्स सुधार
1947 के बाद गुड्‍स एंड सर्विसेस टैक्स यानी वस्तु एवं सेवा कर को सबसे बड़ा टैक्स सुधार माना जा रहा है। इसके बारे में पहली बार में देश में साल 2006-07 के आम बजट में बताया गया था। सरकार का मानना है कि यह इनडायरेक्ट टैक्स की नई पद्धति होगी जो वर्तमान में लगने वाले सभी टैक्स को हटाकर उनकी जगह लेगी।
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