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देश की कई बड़ी कंपनियां डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहन देने में जुटीं

- 31 मार्च तक किया जा सकता है एनयूई के लिए आवेदन- 55 प्रतिशते की वृद्धि हुई डिजिटल पेमेंट के सालाना कारोबार में- पांच साल में तेजी से बढ़ा है ऑनलाइन पेमेंट कारोबार- रिजर्व बैंक चाहता है डिजिटल पेमेंट नेटवर्क का विस्तार- निजी कंपनियों को लाइसेंस जारी कर बनेगा प्रतिस्पर्धी माहौल

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देश की कई बड़ी कंपनियां डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहन देने में जुटीं

देश की कई बड़ी कंपनियां डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहन देने में जुटीं

मुंबई। रोजमर्रा की जरूरतों की शॉपिंग से लेकर तमाम तरह के बिलों के भुगतान के लिए बनाई जाने वाली न्यू अंब्रेला एंटिटी (एनयूई) को लेकर कॉरपोरेट क्षेत्र उत्साहित है। देश के प्रमुख औद्योगिक घराने बैंकों और डिजिटल पेमेंट सेवा से जुड़ी कंपनियों से हाथ मिला रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने डिजिटल पेमेंट नेटवर्क बनाने के लिए फेसबुक, गूगल और इंफीबीम के साथ करार किया है। टाटा संस और अमेजन सहित अन्य उद्योग समूह भी लाइसेंस हासिल कर डिजिटल पेमेंट बाजार में उतरने की तैयारी में जुटे हैं। पेटीएम और ओला ने इंडसइंड बैंक, टाटा संस ने एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के साथ साझेदारी की है। कई अन्य कंपनियां भी इसी कतार में लगी हुई हैं। तेजी से बढ़ रहा है

कारोबार: देश में डिजिटल पेमेंट कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। बीते पांच साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि सालाना 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसमें दोराय नहीं कि डिजिटल भुगतान कारोबार अरबों रुपए का है। बाजार के जानकार मानते हैं कि इसमें अच्छी संभावनाएं हैं। इसी के चलते बड़ी कंपनियां एनयूई में दांव लगा रही हैं। केंद्र सरकार कैश की जगह डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रही है

मिलेंगे कई विकल्प -
फिलहाल डिजिटल पेमेंट यूपीआइ के माध्यम से होता है। लाइसेंस हासिल करने के बाद कंपनियां डिजिटल पेमेंट के लिए अपना प्लेटफॉर्म बनाएंगी। इससे ग्राहकों को अलग-अलग विकल्प मिलेंगे। लाइसेंस होल्डर एटीएम, पॉइंट ऑफ सेल्स, आधार से जुड़ी भुगतान जैसी सेवाएं प्रदान करेंगे। यह कंपनियां बैंकों की क्लीयरिंग और सेटलमेंट सिस्टम के लिए भी काम कर सकती हैं।

एनपीसीआइ का दबदबा बरकरार-
डिजिटल पेमेंट कारोबार में नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआइ) का दबदबा है। इसके लिए एनपीसीआइ ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) प्लेटफॉर्म बनाया है। रुपे नेटवर्क का संचालन भी यही कंपनी करती है, जिसमें इसे वीजा और मास्टर कार्ड से चुनौती मिलती है। रिजर्व बैंक चाहता है कि डिजिटल पेमेंट बाजार में भी प्रतिस्पर्धा बढ़े, जिससे आम लोगों को किफायती सेवा का लाभ मिलेगा। ऑनलाइन पेमेंट से जुड़े जोखिम भी कम होंगे।

टाटा ने किया आवेदन-
राष्ट्र्रीय स्तर पर डिजिटल पेमेंट नेटवर्क बनाने के लिए टाटा ग्रुप ने फरबिन कंपनी बनाई है। एनयूई लाइसेंस के लिए फरबिन ने आवेदन जमा कर दिया है। हालांकि टाटा की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। फरबिन के 40 प्रतिशत शेयर टाटा के पास होंगे। मास्टर कार्ड, नाबार्ड, पेयू, फ्लिपकार्ट आदि का 30त्न हिस्सा होगा। कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक में से प्रत्येक का 9.99 फीसदी हिस्सा होगा।

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