आम आदमी को बड़ा झटका! सब्जियों के बाद जबरदस्‍त महंगी हुई दालें, जानें नई कीमत

-कोरोना संकट ( Coronavirus ) के बीच लगातार बढ़ रही महंगाई की मार से आम लोगों की कमर टूट गई है।
-सब्जियों ( Vegetables Price ) के बाद अब दालों के दाम ( Pulses Price Hike ) भी इन दिनों आसमान छू रहे हैं। -दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में दालों की ( ( Pulses Price in Delhi ) कीमत 15 से 20 रुपए तक बढ़ चुकी है।
-अरहर दाल की कीमतें पहले ही 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है।

By: Naveen

Published: 29 Sep 2020, 03:21 PM IST

नई दिल्ली।
कोरोना संकट ( coronavirus ) के बीच लगातार बढ़ रही महंगाई की मार से आम लोगों की कमर टूट गई है। सब्जियों ( Vegetables Price ) के बाद अब दालों के दाम ( Pulses Price Hike ) भी इन दिनों आसमान छू रहे हैं। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में दालों की ( ( Pulses Price in Delhi ) कीमत 15 से 20 रुपए तक बढ़ चुकी है। आम आद‍मी के ल‍िए अब दाल-रोटी ( Daal Roti ) खाना भी मुश्किल होता जा रहा है। पिछले एक महीने से दालों की थोक कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। अरहर दाल की कीमतें पहले ही 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है, वहीं अब लगातार कीमतों में तेजी जारी है। अगले महीने से त्योहार शुरू हो जाएंगे, लेकिन, इनके दाम घटने की उम्मीद कम ही है।

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115 रुपये किलो अरहर की दाल
लगातार बढ़ रही कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। थोक बाजार में अरहल दाल की कीमत 115 रुपये किलो के पार पहुंच चुकी हैं। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में दालों की कीमतों में 15 से 20 रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। आपको बता दें कि पिछले महीने अरहर की दाल में 20 फीसदी हुआ था। अरहर के अलावा मूंग और उड़द दाल भी 10 फीसदी तक महंगी हो चुकी है।

क्यो महंगी हो रही दालें?
कारोबारियों का कहना हैं कि लॉकडाउन के दौरान तुअर की कीमतें 90 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंची, जो बाद में 82 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गईं। लेकिन, एक बार फिर कीमत चढ़ने लगी है। त्योहारी सीजन की मांग के कारण दालों की मांग में तेजी आई है। वहीं, व्यापारियों को डर है कि कर्नाटक में अरहर की फसल को ज्यादा बारिश से नुकसान होगा। पैदावार में 10% का नुकसान हो सकता है।

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पिछले साल कम थी कीमत
बता दें कि पिछले साल इस अवधि में चना दाल की कीमत 70-80 रुपये प्रति किलो थी। लेकिन, इस बार यह 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है। कारोबारियों की मांग है कि सरकारी एजेंसी नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (नेफेड) को सप्लाई बढ़ाने के लिए अपना स्टॉक रिलीज करना चाहिए। वहीं, सरकार का मानना है कि आपूर्ति की स्थिति ठीकठाक है और अगले तीन महीने में खरीफ सीजन की फसल बाजार में आनी शुरू हो जाएगी।

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