डॉलर के मुकाबले 77 तक गिरेगा रुपया, ये हैं 5 बड़े कारण

डॉलर के मुकाबले 77 तक गिरेगा रुपया,  ये हैं 5 बड़े कारण

Manish Ranjan | Publish: Sep, 10 2018 12:53:12 PM (IST) बाजार

डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट का दौर जारी है। रुपए की गिरावट और पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों ने जहां लोगों की नींद उड़ा रखी है। वहीं सरकार की चिंता भी बढ़ती जा रही है।

नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट का दौर जारी है। रुपए की गिरावट और पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों ने जहां लोगों की नींद उड़ा रखी है। वहीं सरकार की चिंता भी बढ़ती जा रही है। सरकार लगातार प्रयास में है कि इससे आखिर निपटा कैसे जाए। लेकिन हालात अभी औऱ भी बदतर होने वाले है, बाजार के जानकारों का मानना है कि अगले एक से दो महीनों में रुपया 77 के लेवल तक आ सकता है। रुपए में गिरावट किसी एक कारण से नहीं बल्कि इसके पांच प्रमुख कारण है जिसके कारण रुपया संभलने का नाम नहीं ले रहा है। आइए जानते है कौन से वे बड़े कारण

अमेरिकी फेड रिजर्व – केडिया कमोडिटी के हेड अजय केडिया ने पत्रिका बिजनेस को बताया कि सितंबर तिमाही की बात करें तो रुपया 73.67 से 74 की रेंज में कारोबार करता नजर आ सकता है। वहीं अगर साल 2018 के अंत की बात करें तो रुपया 75 से 77 लेवल भी छू सकता है। केडिया के मुताबिक अमेरिकी फेड रिजर्व ने हाल ही में ब्याज दरें बढ़ाई थी। वहीं अमेरिका में रोजगार के आंकड़ों में भी सुधार देखने को मिला है। जिसके कारण डॉलर में मजजूती बनी हुई है। जिसका साफ असर भारतीय रुपए पर देखने को मिल रहा है।

क्रूड ऑयल बनी मुसीबत – क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। जिसके कारण भारत को महंगा क्रूड खरीदना पड़ रहा है। इस वजह से भारतीय रुपए पर लगातार दबाव देखा जा रहा है।

मॉनसून का निराशाजनक प्रदर्शन – मॉनसून की चाल पर इकोनॉमी काफी हद तक प्रभावित होती है। मौसम विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि मॉनसून की चाल का प्रदर्शन उम्मीद से कम है। जिस कारण बाजार के साथ-साथ रुपए पर भी दबाव दिख रहा है।

विदेशी निवेशकों का मोहभंग – शेयर बाजार में तेजी जारी है जिससे एफआईआई लगातार प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं और बाजार से डॉलर खींच रहे हैं। जिसके कारण रुपए पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया का कहना है कि बीते कुछ समय से डॉलर की मजबूती के चलते विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। जिस कारण रुपए की हालत पतली होती जा रही है।

जीएसटी कलेक्शन में गिरावट – जीएसटी कलेक्शन के आंकड़ों मे गिरावट के चलते भी रुपए पर दबाव बना हुआ है। आपको बता दें अगस्त महीने में सरकार जीएसटी कलेक्शन मद से केवल 93,960 करोड़ रुपए ही हासिल कर सकी है। जो कि जुलाई महीने के मुकाबले करीब 2500 करोड़ रुपए कम है। आपको बता दें आरबीआई अभी तक करीब 22 बिलियन डॉलर का फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल कर चुका है ताकि रुपये की स्थिति संभले लेकिन हालात अभी नहीं सुधरे हैं।

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