scriptadvocate put allegations and said ramvraksh yadav is still alive | जवाहर बाग हिंसा: वकील का दावा, आज भी जिंदा है रामवृक्ष यादव, पुलिस ने दूसरे के शव को दिखाया | Patrika News

जवाहर बाग हिंसा: वकील का दावा, आज भी जिंदा है रामवृक्ष यादव, पुलिस ने दूसरे के शव को दिखाया

2 जून 2016 को जवाहर बाग में हुई थी हिंसा। रामवृक्ष के परिवार के वकील ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप। वकील का दावा, आज भी जिंदा है रामवृक्ष यादव।

मथुरा

Published: August 04, 2021 05:15:57 pm

मथुरा। 2 जून 2016 को जिले के जवाहर बाग़ में हुई हिंसा के बाद लोगों की रूह को झकझोर कर रख दिया था। आज भी जवाहर बाग हिंसा की एक तस्वीर लोगों के जहन में बनी हुई है। उपद्रवियों द्वारा पुलिस पर हमला किया था। जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ दिया था। वहीं इस हिंसा में 27 उपद्रवियों और दो पुलिस अधिकारियों सहित 29 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। जवाहर बाग हिंसा के मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव की मौत को लेकर आज भी सवाल लोगों के मन में पैदा होते हैं। यह आज तक साबित नहीं हो पाया है कि रामवृक्ष यादव जिंदा है या मुर्दा।
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दरअसल, जवाहर बाग के मुख्य आरोपी मृतक रामवृक्ष यादव के परिवार के वकील एलके गौतम का यह दावा है कि रामवृक्ष आज भी जिंदा है। उन्होंने कहा कि अगर रामवृक्ष मारा गया है, तो पुलिस प्रशासन और सीबीआई उसका प्रमाण कोर्ट में क्यों नहीं दाखिल कर पा रही है। वकील ने यह भी बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान डीएनए टेस्ट के लिए जो ब्लड सैंपल कलेक्ट किया गया था, उसकी आज तक रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल नहीं हुई है। आरोप है कि पुलिस जान बूझकर डीएनए रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल नहीं कर रही है। क्योंकि रामवृक्ष की बॉडी वो थी ही नहीं, इसलिये डीएनए का सेंपल मैच नहीं हो रहा है। पुलिस अगर रिपोर्ट को दाखिल करती है तो सारा भेद खुल कर सामने आ जाएगा।
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वकील एलके गौतम का कहना है कि रामवृक्ष यादव का वह शव नहीं था और यही वजह थी कि परिवार के लोगों ने वह शव लेने से मना किया था। राजनीतिक दबाव के कारण रामवृक्ष को पुलिस के द्वारा भगा दिया गया। अधिवक्ता ने आगे बताते हुए कहा कि मई 2017 में हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार सीबीआई के द्वारा विवेचना शुरू की गई। सीबीआई के द्वारा कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। 4 लोगों की जेल में मौत हो गई। जबकि एक व्यक्ति के द्वारा जमानत अर्जी लगाई गई। जमानत मिलने के बाद उस व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सीबीआई के द्वारा आरोप पत्र दाखिल ना करने की वजह से 100 में से 70 लोगों को रिहा किया जा चुका है।

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