आगरा और मेरठ के बाद अब यहां के वकीलों ने मांगी इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ, दिए हैं ये तर्क

आगरा और मेरठ के बाद अब यहां के वकीलों ने मांगी इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ, दिए हैं ये तर्क

Amit Sharma | Updated: 15 May 2019, 12:59:12 PM (IST) Mathura, Mathura, Uttar Pradesh, India

अधिवक्ता नीरज राठौर ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित कराने की मांग जायज है।

मथुरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट खंडपीठ के लिए आगरा और मेरठ में आंदोलन चल रहा है। चुनाव से पहले वकील खंडपीठ की मांग के लिए आंदोलन शुरू कर देते हैं। आगरा में वकीलों पर जमकर लाठियां बरसी हैं। इसके बाद भी हाईकोर्ट खंडपीठ की मांग पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता है। इस मांग उठाने वालों में अब मथुरा युवा अधिवक्ता भी शामिल हो गए हैं। उनकी मांग है कि मथुरा में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित की जाए। इस संबंध में उन्होंने कई तर्क भी दिए हैं।

ये है तर्क
अधिवक्ताओं के तर्क है कि हाईकोर्ट बेंच के लिए मथुरा की देश और प्रदेश के लगभग सभी क्षेत्रों से अच्छी कनेक्टिविटी है। मथुरा सभी ताकतवर केन्द्रों के केंद्र में है। आस-पास विभिन्न हाईकोर्ट से मथुरा की दूरी भी इस बात की पुष्टि करती है कि मथुरा में बेंच बनाई जा सके। मथुरा से ग्वालियर हाईकोर्ट बेंच की दूरी 174.9 किलोमीटर, 3.15 घंटा का सफर है। वहीं मथुरा से दिल्ली हाईकोर्ट की दूरी 165 किलोमीटर यानी करीब 3.15 घंटा का सफर तय कर यहां से दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा जा सकता है। मथुरा से जयपुर हाईकोर्ट की दूरी 240 किलोमीटर है यानी करीब 4 घंटे का सफर करना होगा। मथुरा से लखनऊ हाईकोर्ट बेंच की दूरी 396 किलोमीटर है यानी लखनऊ पहुंचने के लिए 5.15 घंटे चाहिए। मथुरा से इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी 539.7 किलोमीटर यानी 8.15 घंटे का सफर। ये दूरी अब इतने समय में तब तय कर सकते हैं जब आपके पास अपना चार पहिया वाहन है। अन्यथा की स्थिति में आप 24 घंटे में भी समय से पहुंच पाएंगे इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है।

मथुरा प्राचीनकाल में देश की राजधानी
अधिवक्ता नीरज राठौर ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित कराने की मांग जायज है। क्षेत्र की गरीब जनता व वकीलों को लंबी यात्रा कर इलाहाबाद जाना पड़ता है। इसमें न सिर्फ समय बल्कि धन भी अधिक खर्च करना पड़ता है। इसके कारण न्याय प्राप्त करना अत्यंत महंगा और श्रमसाध्य हो गया है। एक तरह से न्याय दुर्लभ हो गया है। मध्य वर्ग, निम्न मध्य वर्ग व गरीबों के लिए तो न्याय प्राप्त करना लगभग असंभव हो गया है। अधिवक्ता पं. ललित शर्मा ने बताया कि मथुरा प्राचीनकाल में देश की राजधानी रही है। यह ऐतिहासिक और भावनात्मक बात है लेकिन हकीकत यह है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरणों में से 75 प्रतिशत मामले पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हैं , जिनमें एक बड़ी संख्या मथुरा से जुड़े मामलों की है।

संस्था का गठन
खंडपीठ स्थापना संघ (युवा) मथुरा के बैनर तले अधिवक्ताओं ने पूरे आंदोलन का खाका खींच दिया है। संघ ने राष्ट्रपति के नाम दिये ज्ञापन में उन तमाम तर्कों का भी शामिल किया है जिससे मथुरा में खण्डपीठ स्थापित किये जाने की उनकी दलील को बल मिलता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग को लेकर खण्डपीठ स्थापना संघ युवा ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन उप जिलाधिकारी ने लिया।

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