जानिए किसने कहा- धर्मगुरुओं के ऐशगाह हैं मंदिर, मस्जिद और गिरिजाघर 

 जानिए किसने कहा- धर्मगुरुओं के ऐशगाह हैं मंदिर, मस्जिद और गिरिजाघर 
balendu goswami

Sudhanshu Trivedi | Publish: Oct, 14 2016 11:36:00 AM (IST) agra

धर्मनगरी मथुरा में दो दिवसीय नास्तिक सम्मेलन आज से, आयोजक बालेंदु ने सभी धर्मग्रंथों को बताया काल्पनिक कथा और मनोरंजन का साधन। 

मथुरा. आस्था की नगरी मथुरा में शुक्रवार से दो दिवसीय नास्तिक सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। आयोजन शुरु होने से पहले गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान सम्मेलन के आयोजक बालेंदु गोस्वामी ने सभी धार्मिक गुरुओं का जमकर मजाक उडाया। उन्होंने कहा कि संत और धर्मगुरु धन बटोरकर अपने ऐशो आराम के लिए मंदिरेां, मठों और आश्रमों का निर्माण कराते हैं। 

सभी धर्मों के ग्रंथ अवैज्ञानिक 
बालेंदु गोस्वामी ने हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सहित सभी धर्मों के ग्रंथों को अवैज्ञानिक करार देते हुए काल्पनिक कथा और मनोरंजन का साधन बताया। साथ ही कहा कि वेद, पुराण, कुरान, गुरुग्रंथ साहब और बाइबिल को अंधविश्वास फैलाने वाला धार्मिक पुस्तक बताया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से लोगों के अंधविश्वास को दूर करके उन्हें जागरुक किया जाएगा। 

ईश्वर से बड असत्य कोई नहीं 
स्वामी बालेंदु ने कहा कि ईश्वर से बडा असत्य और अंधविश्वास कुछ नहीं है। जैसे सिनेमाघरों में पिफल्म ​​ को देखने के बाद भाव उत्पन्न होता है उसी प्रकार धर्मग्रंथों के पात्रों का चरित्र पढकर ईश्वर के प्रति भाव उत्पन्न होता है। हकीकत में ये झूठे और काल्पनिक कथाएं हैं। उन्होंने कहा कि पत्थर की मूर्ति पर फूल माला और दूध चढाना आस्था नहीं अंधविश्वास है। हमलोग मूर्ति को कपडे पहनाते हैं, भोजन कराकर श्रगांर करते हैं लेकिन गरीबों के लिए कुछ नहीं करते हैं। 
उन्होंने कहा कि ईश्वर और पैगम्बर कुछ भी नही होता है, ऐसा मेरा मानना है, मैं इनको नहीं मानता, जिसको मानना है वह मान सकता है। सभी स्वतंत्र हैं कानून इस बात के लिए किसी को बाध्य नही करता है। बुद्ध का दर्शन भी नास्तिक था। जब उनसे पूछा गया की किसी के धर्म पर टिप्पणी करना कितना जायज है तो उनका कहना था की मैंने किसी को अपशब्द या बुरा नही कहा है। 

देखें वीडियो:—

18 राज्यों से एक हजार लोग आएंगे 
स्वामी बालेंदु के सहयोगी पूर्णेंदु और यशेंदु ने कहा कि नास्तिकवाद सम्मेलन में शिरकत करने के लिए जम्मू कश्मीर, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित 18 राज्यों से करीब एक हजार नास्तिक आ रहे हैं। उन्होंने कहा​ कि सम्मेलन का उद्देश्य समाज में फैले अंधविश्वास को दूर करना है। विज्ञान और धर्म दोनों अलग—अलग हैं। धर्म को अपनी वास्तविकता सिद्ध करने के लिए विज्ञान की आवश्यकता होती है, जबकि विज्ञान को नहीं। वर्तमान में लोग विवेकशील होते जा रहे हैं। ऐसे लोगों को एकजुट करके समाज में जागरुकता लाने की कोशिश की जा रही है। 

विवादित टिप्पणी से धर्मगुरुओं में रोष 
दूसरी तरफ स्वामी बालेंदु के विवादित बयान के बाद सभी धर्मों के संतों में आक्रोश है। हिंदूवादी संगठनों ने ऐलान किया है कि नास्तिक सम्मेलन का आयोजन नहीं होने देंगे। जबकि शाही जामा मस्जिद के अध्यक्ष जेड हसन ने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ खिलवाड करनेवाले बालेंदु का मानसिक संतुलन बिगड गया है। वे उन्माद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।   

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