नवरात्र 2019: इस शक्तिपीठ में पूजा करने से कुंवारी लड़कियों को मिलता है मनचाहा पति

नवरात्र 2019: इस शक्तिपीठ में पूजा करने से कुंवारी लड़कियों को मिलता है मनचाहा पति
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suchita mishra | Publish: Apr, 08 2019 04:46:17 PM (IST) Mathura, Mathura, Uttar Pradesh, India

मथुरा के वृंदावन में स्थित है माता कात्यायनी का मंदिर। राधारानी ने गोपियों संग की थी पूजा। 51 शक्तिपीठों में से एक है।

मथुरा। देशभर में देवी के 51 शक्ति पीठों में से एक है मां कत्यायिनी शक्ति पीठ। ये वृंदावन में है। मान्यता है कि इस स्थान पर मातारानी के केश गिरे थे। कहा जाता है कि जिन लड़कियों का विवाह न हो पा रहा हो, वे यहां आकर माता की पूजा करें तो उन्हें मनचाहा वर प्राप्त होता है। हर साल नवरात्र के मौके पर यहां भक्तों का तांता लगता है।

राधारानी ने की थी पूजा
कात्यायनी माता के इस मंदिर को लेकर माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए राधारानी ने गोपियों के साथ माता की पूजा की थी। तब से लेकर आज तक यहां पर कुंवारी लड़कियां यहां आकर अपने इच्छित पति की कामनापूर्ति के लिए माता का आशीर्वाद पाने आती हैं।

ये मान्यता भी प्रचलित
यह भी कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने कंस के साथ युद्ध करने से पहले यमुना किनारे माता कात्यायनी को कुल देवी मानकर बालू से मां की प्रतिमा बनाई थी। उस प्रतिमा की पूजा करके उन्होंने माता से कंस पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद मांगा था और उसके बाद कंस का वध किया था। बाद में इस स्थान पर भव्य मंदिर की स्थापना स्वामी केशवानंद महाराज ने एक फरवरी 1923 को माघ पूर्णिमा के दिन बनारस और बंगाल के विख्यात वैदिक याज्ञिक ब्राह्मणों द्वारा वैष्णव परम्परा से कराई। इस स्थान पर शुद्ध मन से मांगी गयी हर मनोकामना पूरी होती है।

ये है शक्तिपीठ की कहानी
मां के 51 शक्तिपीठ को लेकर कहानी प्रचलित है। कथा के अनुसार एक बार माता सती के पिता राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था। उसमें समस्त देवताओं को आमत्रित किया, मगर शिवजी को नही बुलाया। जब इसकी जानकारी सती को हुई तो वे बिना बुलाए अपने पिता के घर चली गयीं। उन्होंने अपने पिता से अपने पति को न बुलाने का कारण पूछा तो सती के पिता ने भगवान शिव के लिए बहुत भला बुरा कहा। जिसे सुनकर माता सती को बहुत गुस्सा आया और वे हवन कुंड में कूद गईं। जब इस घटना की जानकारी भगवान शिव को हुई तो उन्हें गुस्सा आ गया। उन्होंने माता सती की जली हुई देह को कंधे पर उठाया और तांडव शुरू कर दिया। शिव के तांडव से सभी जगह हाहाकार मच गया। तब भगवान विष्णु ने माता सती से क्षमा मांगी और उनके शरीर के 51 हिस्से कर दिए। जो हिस्सा जहां गिरा, वह स्थान शक्तिपीठ बन गया। वृन्दावन में यमुना किनारे माता सती के केश गिरे थे।

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