यूपी घूमो: एक ऐसा स्थान जहां आज भी हैं भगवान कृष्ण की लीलाओं के साक्ष्य

 यूपी घूमो: एक ऐसा स्थान जहां आज भी हैं भगवान कृष्ण की लीलाओं के साक्ष्य
Mathura Lord Krishna

Amit Sharma | Updated: 13 Jun 2017, 01:37:00 PM (IST) Mathura, Uttar Pradesh, India

ब्रज में गोवर्धन पर्वत एक ऐसा स्थान है जबां आज भी भगवान कृष्ण की लीलाओं के साक्ष्य हैं।

मथुरा। गोवर्धन वृंदावन से करीब 34 किलो मीटर की दूरी पर मौजूद है। गिरिराज गोवर्धन वही पर्वत है जिसे भगवान श्री कृष्ण ने अपनी अंगुली पर धारण किया था और समस्त बृज वासियों की रक्षा की थी। कान्हा ने इंद्र के अभिमान को गिराने के लिए इस पर्वत को अपनी अंगुली पर धारण किया था।

क्या है यहां खास
दानघाटी मंदिर। यहां दर्शन कर अपनी परिक्रमा प्रारंभ कर सकते हैं यह परिक्रमा करीब 21 किलोमीटर की है। जोकि पर्वत के एक किनारे से होकर दी जाती है। गोवर्धन पर्वत पर आज भी ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं जिससे यह पता लगता है कि कभी भगवान कृष्ण ने इस पर्वत पर अपनी लीलाएं की थीं। भगवान कृष्ण के चरणों के निशान और उनकी गायों के निशान आज भी इस पर्वत पर मौजूद हैं। गोवर्धन पर्वत की ऊंचाई आज काफी कम दिखाई देती है, लेकिन हजारों साल पहले यह बहुत ऊंचा और विशाल पर्वत था। इस पर्वत की ऊंचाई लगातार घट रही है, इस संबंध में शास्त्रों में एक कथा बताई गई है इस कथा के अनुसार गोवर्धन पर्वत को तिल-तिल करके घटने के लिए एक ऋषि ने श्राप दिया है।

कैसे पहुंचें
गोवर्धन जाने के लिए एनएच टू या यमुना एक्सप्रेस वे से मथुरा पहुंच कर वहां से जाया जा सकता है। एनएच २ पर गोवर्धन चौराहा है। यहां से करीब १२ किलो मीटर जा कर आप गोवर्धन तक पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही रेल मार्ग से भी आप मथुरा पहुंच सकते हैं यहां से आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए गोवर्धन तक पहुंच सकते हैं।

ठहरने की व्यवस्था
मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन में ठहरने की बहुत अच्छी व्यवस्था है। यहां कई धर्मशालाएं हैं साथ ही आश्रमों में भी ठहरने की व्यवस्था काफी किफायती कीमतों पर हो सकीत है। साथ ही प्राइवेट होटलों और टूरिस्ट विभाग के होटल भी हैं।

ये है गोव्रधन की महिमा

माना जाता है जब ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा को छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की तो इंद्र नाराज हो गए। उन्होंने सात दिनों तक प्रलयकारी मेघों की बरसात की जिससे ब्रज में त्राहि-त्राहि मच गई। तब भगवान कृष्ण ने इंद्र का मान मर्दन करने के लिए इस पर्वत को अपनी करनी उंगली पर उठा कर ब्रजवासियों की रक्षा की। जब सात दिन तक लगातार बरसात करने के बाद भी इंद्र ब्रजवासियों का बाल भी बांका न कर सके तो उन्होंने ब्रह्मा जी का ध्यान लगाया और ब्रह्मा ने उन्हें भगवान कृष्ण की शरण में आने के लिए कहा। यह वही स्थान है जहां अपनी गलती को मानते हुए इंद्र ने भगवान कृष्ण की स्तुति की। भगवान ने भी इंद्र की स्तुति से प्रसन्न होकर क्षमा किया। भगवान कृष्ण ने गिरिराज पर्वत को वचन दिया था कि जो कोई भी यहां आकर पूजा अर्चना करेगा उसे खुद भगवान कृष्ण अपनी शरण में रखेंगे, गोवर्धन पर्वत आज भी यहां मौजूद है।

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