100 गांवों पर बैंक एक और स्टाफ आधा, कैसे पूरा हो किसानों को रुपये देने का वादा

-लोन के लिए किसान, रिटर्न भरने के लिए भटक रहे व्यापारी, बैंक में 11 की जगह सिर्फ 6 कर्मचारी तैनात

मथुरा। बैंकिंग सेक्टर कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। हालत यह है कि देहात में खुलीं भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं में दबाव के चलते आये दिन बैंककर्मियों और उपभोक्ताओं के बीच झगड़ा हो रहा है, नौबत मारपीट तक पहुंच रही है।

भारतीय स्टेट बैंक की बल्देव शाखा का हाल

भारतीय स्टेट बैंक की बल्देव शाखा में वर्तमान में ब्रांच मैनेजर सहित कुछ छह कर्मचारी तैनात हैं। जिनमें से एक कर्मचारी तकरीबन छुट्टी पर रहता है। किसी वजह से मौजूद कर्मचारियों में से कोई एक भी आकस्मिक छुट्टी पर चला जाए तो काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या तीन चार रह जाती है। 100 गांवों के ग्रामीण, सरकारी अध्यापकों की सैलरी, व्यापारियों के रिटर्न फार्म जैसे तमाम कामों को निपटना इनके बस की बात नहीं रह जाती है। लोग बैंक पासबुक में एंट्री कराने के लिए ही कई दिनों तो कभी एक एक सप्ताह तक भटकते हैं। झल्लाये ग्रामीण कर्मचारियों से भिड़ जाते हैं। हालांकि उपभोक्ता और कर्मचारी एक दूसरे की मजबूरी समझते हैं इस लिए मामला रिपोर्ट तक नहीं पहुंचा है।

सरकारी योजनाओं की धड़ाधड़ घोषणा से हांफी बैंक

सरकारी योजनाओं की धड़ाधड़ घोषणाओं से सरकारी मशीनरी हांप रही है। सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग सैक्टर पर है। वहीं भी वह बैंक ज्यादा दबाव में हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हैं। हालत यह है कि 100 गांवों पर एक बैंक है, और उसमें भी स्टाफ आधा भी नहीं हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचान मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि सरकार की ओर से किसानों को दी जा रही 6 हजार रूपये वार्षिक मदद का लाभ कुछ किसानों को ही मिल पा रहा है। पहली किस्त खातों में पहुंच रही है लेकिन इस का लाभ चुनिंदा किसानों को ही मिला है। अधिकांश किसान इस योजना के लाभ से वंचित रह गये हैं। इसकी वजह पात्र किसानों के आंकडे जुटाने और उनके कागजात पूरे करने के लिए विभागों को समय ही नहीं मिला।

फील्ड आफीसर नहीं होने से लोन को भटक रहे किसान

लोन और केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के लिए भी किसान फटक रहे हैं। बैंक में लम्बे समय से कोई सर्वेयर या फील्ड आफीसर नहीं हैं। जिसकी वजह से किसानों की फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। उन्हें लोन नहीं मिल रहा, यहां तक केसीसी के लिए भी किसान भटक रहे हैं। इससे सरकार की तमाम योजनाओं का लाभी भी जरूरतमंद तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।

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अमित शर्मा
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