लठ्ठमार होली के लिए दूध-मेवे खाकर सेहत बना रहीं हुरियारिन, लट्ठ से बचने के गुर सीख रहे हुरियार

विश्व प्रसिद्ध लठ्ठमार होली में सिर्फ दो दिन शेष बचे है। लठ्ठमार होली की तैयारियों में बरसाना की हुरियारिन दूध—मेवे खाकर सेहत बना रही हैं। साथ ही नंदगांव से आने वाले हुरियारों पर प्रेम पगी लाठियां भांजने में लाठी कहीं कमजोर ना पड़ जाए इसलिए अपनी-अपनी लाठियों को तेल भी पिला रही हैं।

By: Mahendra Pratap

Updated: 01 Mar 2020, 12:14 PM IST

मथुरा. विश्व प्रसिद्ध लठ्ठमार होली में सिर्फ दो दिन शेष बचे है। लठ्ठमार होली की तैयारियों में बरसाना की हुरियारिन दूध—मेवे खाकर सेहत बना रही हैं। साथ ही नंदगांव से आने वाले हुरियारों पर प्रेम पगी लाठियां भांजने में लाठी कहीं कमजोर ना पड़ जाए इसलिए अपनी-अपनी लाठियों को तेल भी पिला रही हैं। साथ ही अपने पारंपरिक परिधानों को बक्से से निकल ड्राइक्लीन करा रहीं हैं। वहीं हुरियारे सिर पर साफा और फेंट आदि बांधना सिखाने के साथ ही हुरियारिनों के लठ्ठ की मार से खुद को ढाल से बचाने के गुर सिखा रहे हैं।

रीति रिवाज के संग होली खेलते है हुरियारे :- बरसाना में होने वाली लठ्ठमार होली का नंदगांव और बरसाना के लोगों को सालभर इंतजार रहता है। इस आयोजन के करीब महीनेभर पहले से ही हुरियारे और हुरियारिनें अपनी-अपनी तैयारियों में जुट जाते हैं। हुरियारिनें जहां दूध, घी, मेवे और फल आदि खाकर अपनी सेहत बनाना शुरू कर देती हैं तो हुरियारे भी अपनी परंपरागत पोशाक और ढालों को दुरुस्त करने में जुट जाते हैं। रविवार को बरसाना में हुरियारिनें छत पर बैठकर होली के गीत गाते हुए अपनी-अपनी लाठियों को तेल पिला रही थी। इसके साथ ही आपस में यह भी सलाह मशविरा कर रही है कि वे इस बार कौन सी ड्रेस पहनकर होली खेंलेंगी।

सोलह श्रृंगार कर चमचमाती लाठी ले दिलकश दिखतीं है हुरियारिने :- सीमा और संगीता नाम की हुरियारिनों का कहना है ज्यादातर महिलाएं पारंपरिक परिधान लंहगा-ओढ़नी ही पहन कर होली खेलती है और अब सालभर की प्रतीक्षा के बाद पुनः अपने पहनावे को लेकर लहंगा-ओढ़नी की ड्राइक्लीन करा रही हैं। गौरतलब है कि सालभर घरों में सामान्य तरीके से रहने वाली इन बरसाना की गोपियों (हुरियारिनों) पर होली के समय असाधारण और आलौकिक तेज देखने को मिलता है जब ये अपनी हाथों में तेल से चमचमाती लाठी लिए सोलह श्रृंगार कर हुरियारों पर लठ्ठ बरसाती हैं।

लठ्ठ की मार से बचने के सीखे रहे गुर:- हुरियारिनों के साथ ही नंदगांव के हुरियारे भी होली की तैयारियों में पीछे नहीं हैं। लाठियों की मार को सहने के लिए ये अपनी-अपनी ढालों को तैयार करने में लगे हैं। वहीं पुराने हुरियारे नए हुरियारों को सिर पर साफा और फेंट आदि बांधना सिखाने के साथ ही कैसे ढाल से हुरियारिनों के लठ्ठ की मार से खुद को बचाना है इसके गुर सिखा रहे हैं।

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