लॉक डाउन इफेक्ट : कान्हा की नगरी मथुरा में भूख से तड़प रहे बंदर

लॉक डाउन में इन बेजुबान बंदरों को खाना भी ठीक से नसीब नहीं हो पा रहा है। लॉक डाउन से खाने के लाले इन बेजुबानों के लिए पड़े हुए हैं।

By: Mahendra Pratap

Published: 05 Apr 2020, 08:53 PM IST

मथुरा. इंसान तो इंसान अब बेजुबान जानवरों पर भी लॉक डाउन का असर देखने को मिल रहा है । बेजुबान जानवर खाने के लिए इधर उधर भटक रहे हैं तो वही मंदिर और उसके आसपास रहने वाले क्षेत्र में भी बंदर भूख से तड़पते हुए दिखाई देते हैं। लॉक डाउन में इन बेजुबान बंदरों को खाना भी ठीक से नसीब नहीं हो पा रहा है। लॉक डाउन से खाने के लाले इन बेजुबानों के लिए पड़े हुए हैं।

कोरोनावायरस महामारी का असर देश के साथ साथ कान्हा की नगरी में भी देखने को मिल रहा है। पूरे देश को लॉक डाउन किया गया है और इस लॉक डाउन के चलते इंसानों के साथ-साथ बेजुबान बंदरों पर भी भारी पड़ रहा है। कान्हा की नगरी में मंदिर हो या यमुना किनारा हो आपको बंदर देखने को तो मिलेंगे लेकिन यह बंदर इन दिनों भूख से तड़पते हुए दिखाई देंगे। जो लोग इन बेजुबान बंदरों को खाने पीने की चीजें मुहैया कराते थे वह लोग अब अपने घरों में कैद हो गए हैं और यही कारण है के बंदरों पर इसका असर देखने को मिल रहा है। इतना ही नहीं हजारों की संख्या में छावनी स्टेशन पर प्रतिदिन यात्री आते थे और इन यात्रियों के सहारे ही बंदरों को खाने पीने की चीज है आसानी से मिल जाती थी लेकिन लॉक डाउन होने के कारण किसी यात्री को अब ना स्टेशन जाना पड़ रहा है और ना ही कोई तीर्थस्थलों पर जा रहा है। इतना ही नहीं भगवान श्री कृष्ण जन्म स्थान पर श्रद्धालु ना आने के कारण मंदिर से दूर कुछ करने लगे हैं हालांकि कुछ लोगों के द्वारा इन बंदरों को थोड़ा बहुत खाना दे दिया जाता है।

मथुरा छावनी पर तैनात जीआरपी कॉन्स्टेबल रामवीर सिंह से जब बात की तो उन्होंने बताया ढाई सौ के लगभग छावनी पर बंदर है और यह बंदर और भूख से व्याकुल दिखाई देते हैं यहां कोई यात्री नहीं आता लोग डाउन के चलते हम लोग ही जो बनता है उसे इन्हें खिला देते हैं।

स्थानीय नागरिक शुभम से बंदरों को लेकर जब बात की तो शुभम ने बताया कि लॉक डाउन से पहले लॉगइन के लिए केले चने और भी अन्य सामान डालकर इनका पेट भर देते थे। जब से लॉक डाउन हुआ है बंदरों की खाने पीने की समस्या बढ़ गई है। यमुना किनारे और सड़क पर बंदर आपको घूमते हुए मिल जाएंगे खाने पीने की चीज नहीं मिल रही है तो बंदर लोगों से सामान छिना कर ले जा रहे हैं। इन्हें खाना खिलाने वाला कोई नहीं है ना ही कोई सामाजिक संस्था आगे आ रही है यहां के जो लोग हैं वह इन्हें भूखा देखते हैं जो जो बचता है थोड़ा बहुत वह इन्हें खाने के लिए डाल देते हैं।

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