नवरात्र : मनचाहा पति चाहिए तो मां कत्यायनी शक्ति पीठ का दर्शन करें कुंवारी कन्याएं

मथुरा में कृष्ण को पति रूप में पाने का राधा ने मांगा था सती से वरदान

By: Mahendra Pratap

Published: 17 Oct 2020, 01:21 PM IST

मथुरा. देवी के 51 शक्ति पीठों से एक है मां कत्यायनी शक्ति पीठ। इस स्थान पर मां सती के केश गिरे थे। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से 12 किलोमीटर दूर भगवान कृष्ण की क्रीड़ा भूमि वृन्दावन में स्थित इस स्थान पर राधा ने गोपियों सहित कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए पूजा की थी।

मां कत्यायनी शक्ति पीठ के बारे में कहा जाता है कि जब सती के पिता ने यज्ञ का आयोजन किया था। समस्त देवताओं को आमंत्रित किया। जब इस की जानकारी सती को हुई कि मेरे पति भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया जा रहा तो वह बिना बुलाए अपने पिता के घर चली गयी और अपने पिता से अपने पति को न बुलाने का कारण पूछा तो सती के पिता ने भगवान शिव के लिए बहुत भला बुरा कहा। जिसे सुनकर सती सहन नहीं कर पाई और हवन कुण्ड में कूद गयी। जब इस घटना की जानकारी भगवान के गणों ने भगवान शिव को दी तो वह बहुत व्याकुल हो गए और उन्होने सती की जली हुई देह को कंधे पर लेकर यहां-वहां घुमने लगे और तांडव शुरू कर दिया। शिव के तांडव से प्रलय मच गई। सभी देवता घबरा कर भगवन विष्णु की शरण में गये और विष्णु भगवान ने मां सती से क्षमा मांगकर सती के शरीर के 51 हिस्से कर दिए और जो-जो हिस्सा जहां गिरा वह स्थान शक्ति पीठ बन गया।

कुंवारी कन्या को मिलता है मनचाह पति :- और इस स्थान पर सती के बाल गिरे थे। इस शक्ति पीठ की बहुत मान्यता है, कहा जाता है कि कृष्ण को गोपियों ने पति रूप में पाने के लिए राधा सहित मां कत्यायनी की पूजा की थी और राधाजी ने मां कत्यायनी को ये वचन भी दिया की जो कुंवारी कन्या यहां आकार आपकी पूजा करेगी उसे उसका मन चाहा वर अवश्य मिलेगा। तब से लेकर आज तक यहां भक्त मां से अपने मनचाहे वर को पति रूप में पाने के लिए यहां आकार मां से मन्नतें मांगती हैं। यहां भक्त हजारों की संख्या में आकार मां का आशीर्वाद प्राप्त करते है।

मंदिर का इतिहास :- कृष्ण चन्द्र की पावन पुण्यमय क्रीड़ा भूमि श्रीधाम वृन्दावन में कालिंदी श्री यमुना के निकट राधा बाग में स्थित है अति प्राचीन सिद्ध पीठ जहां विराजमान है श्रीश्री मां कात्यायनी। श्रीधाम वृन्दावन में भगवती के केश (बाल) गिरे थे इसका प्रमाण आर्य शास्त्र, ब्रह्म वैवर्त पुराण एवं आद्या स्त्रोत आदि कई पुराणों में मिलता है। देवऋषि श्री वेद व्यास जी ने श्रीमद भगवत के दशम स्कन्ध के बाइसवें अध्याय में उल्लेख किया है।

"कात्यायनी महामाये महयोगिन्यधीस्वरि।
नन्दगोपसुतम् देवी पति मे कुरु ते नमः।

बालू से मां की प्रतिमा बनाई :- इस मंदिर की स्थापना स्वामी केस्वानन्द महाराज ने 1 फरवरी 1923 को माघ पूर्णिमा के दिन बनारस, बंगाल के सुविख्यात वैदिक याज्ञिक ब्राह्मणों द्वारा वैष्णव परम्परा से की गयी। कहा ये भी जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस के साथ युद्ध करने से पहले यमुना किनारे मां कात्यायनी को कुल देवी मानकर बालू से मां की प्रतिमा बनायीं और उसकी पूजा कर कंस पर विजय पाने का आशीर्वाद प्राप्त किया। मान्यता है की इस स्थान पर शुद्ध मन से मांगी गयी कोई भी मनोकामना मां पूरी करती है यही कारण है की यहाँ भक्त मां के दर्शन कर मनौती मांगते है।

आरती के समय प्रवेश नहीं :- हर नवरात्रों के समय देश दुनिया के लाखों श्रद्धालु यह आकर मां कात्यायनी के दर्शन करते हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते मां कात्यायनी के दर्शनोंं के इंतजाम किए गए हैं। इस बार भक्तों को मंदिर में प्रवेश से पहले पूरी तरह से सैनिटाइज करना आवश्ययक होगा बिना मास्क के मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था और मंदिर प्रशासन की तरफ से चल रही तैयारियों की जानकारी देते हुए कात्यायनी मंदिर के प्रबंधक विजय मिश्रा ने बताया सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए मंदिर में एक समय में सिर्फ पांच भक्तों को ही अनुमति दी जाएगी। इस प्रकार करीब 200 भक्त ही मां कात्यायनी के दर्शन कर सकेंगे। इस बार मंदिर के मुख्य द्वार को सिर्फ चार घंटे के लिए खोला जाएगा। जिसमें 2 घंटे सुबह और 2 घंटे शाम को ही भक्तों को प्रवेश दिया जाएगा। मंदिर प्रबंधन से जब हमारी बात हुुुई तो सुबह 2 घंटेें के लिए भक्तों को दर्शन कराने की व्यवस्था की गई है। जिसमें करीब 200 भक्तों को ही मां कात्यायनी के दर्शन लाभ मिल सकेंगे वही इस खबर को सुनकर मांं कात्यायनी के भक्तों मे मायूसी है। विजय कहते है की नवरात्रों में आरती के समय किसी भी भक्त को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जायेगा।

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