अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला पहुंचा कोर्ट, शाही मस्जिद हटाने की मांग

13.37 एकड़ पर दावा करते हुए मालिकाना हक मांगा

By: Mahendra Pratap

Published: 26 Sep 2020, 05:16 PM IST

मथुरा. भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण विरामजमान के नाम से दीवानी कोर्ट में एक केस दर्ज किया गया है। जिसमें 13.37 एकड़ पर दावा करते हुए मालिकाना हक मांगा गया है और शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। यह वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर' के रूप में सखा रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों ने दाखिल किया है।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को भूमि देने को गलत बताते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन छाया शर्मा की कोर्ट में दावा पेश किया गया है। श्रीकृष्ण विराजमान, अस्थान श्रीकृष्ण जन्मभूमि, उनकी सखा लखनऊ निवासी रंजना अग्निहोत्री व त्रिपुरारी त्रिपाठी, दिल्ली निवासी कृष्ण भक्त प्रवेश कुमार, करुणेश कुमार शुक्ला व शिवाजी सिंह, सिद्धार्थ नगर निवासी कृष्ण भक्त राजमणि त्रिपाठी की ओर से पेश किए दावे में कहा गयाकि वर्ष 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच जमीन को लेकर समझौता हुआ था। इसमें तय हुआ था कि मस्जिद जितनी जमीन में बनी है, बनी रहेगी। वादी के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, वह श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के नाम पर है। ऐसे में सेवा संघ से किया गया समझौता गलत है। उन्होंने मस्जिद को हटाने की मांग की है।

शाही ईदगाह ट्रस्ट ने जन्मभूमि पर कब्जा जमाया :- अदालत में दाखिल मामले में कहा गया कि मुसलमानों की मदद से शाही ईदगाह ट्रस्ट ने श्रीकृष्ण से सम्बन्धित जन्मभूमि पर कब्जा कर लिया और ईश्वर के स्थान पर एक ढांचे का निर्माण कर दिया। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मस्थान उसी ढांचे के नीचे स्थित है। याचिका में यह दावा भी किया गया कि मंदिर परिसर का प्रशासन सम्भालने वाले श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने सम्पत्ति के लिए शाही ईदगाह ट्रस्ट से एक अवैध समझौता किया। आरोप लगाया कि श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान श्रद्धालुओं के हितों के विपरीत काम कर है इसलिए धोखे से मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट की प्रबंध समिति ने 1968 में सम्बन्धित सम्पत्ति के एक बड़े हिस्से को हथियाने का समझौता कर लिया।

जन्मस्थान घोषित करे कोर्ट :- इससे पूर्व में मथुरा के सिविल जज कोर्ट में एक और मामला दाखिल हुआ था। जिसे श्रीकृष्ण जन्म सेवा संस्थान और ट्रस्ट के बीच समझौते के आधार पर बंद कर दिया गया। 20 जुलाई 1973 को इस सम्बन्ध में अदालत ने एक निर्णय दिया था। अभी के विवाद में अदालत के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई है। इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि विवादित स्थल को बाल श्रीकृष्ण का जन्मस्थान घोषित किया जाए।

मुकदमे की बड़ी रुकावट :- केस सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन के साथ भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की सखा रंजना अग्निहोत्री ने दायर किया है। विष्णु शंकर जैन के साथ रंजना अग्निहोत्री अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि वाले केस से भी जुड़े हैं। इस मुकदमे में एक बड़ी रुकावट प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 है। इस एक्ट के मुताबिक आजादी के वक्त 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था, उसी का रहेगा। इस एक्ट के तहत श्रीरामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को छूट दी गई थी।

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