वृंदावन और मथुरा में विधवाओं का दर्द सुन भर आएंगी आंखें

भजन कीर्तन करने वाली इन महिलाओं में 90 फीसद विधवाएं हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों से आकर यहां अपना गुजर बसर कर रही हैं।

By: Mahendra Pratap

Published: 28 Jun 2020, 11:41 AM IST

Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

मथुरा. वृंदावन और मथुरा हर गलियों के भजनाश्रमों में भजन करने वाली महिलाओं में तमाम ऐसी होती हैं जिनकी सफेद लिबास के पीछे दुखों का स्याह पक्ष छिपा होता है। भजन कीर्तन करने वाली इन महिलाओं को बदले में मिलते हैं चंद रुपए और पेट भरने के लिए भोजन। भजन कीर्तन करने वाली इन महिलाओं में 90 फीसद विधवाएं हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों से आकर यहां अपना गुजर बसर कर रही हैं।

सरकार से दी जाती है ये सहायता :- महिला आश्रय सदन के डीपीआरओ अनुराग श्याम रस्तोगी ने बताया सदन में करीब 300 माताएं रह रही हैं। इनके लिए सभी सुविधाएं सरकार देती है। प्रतिमाह हरेक माता को 1850 रूपए की मदद के के अलावा प्रत्येक को 500 रुपए प्रतिमाह विधवा पेंशन भी मिलती है। आउटडोर और इंडोर विधवाओं की स्वास्थ्य संबंधित सभी नि:शुल्क होती है। सभी माताओं के अंत्योदय कार्ड बने हैं। इसलिए 20 किलो गेहूं और 15 किलो चावल मिलता है। माताएं अगरबत्ती और गुलाल बनाती हैं। इसका इन्हें पारिश्रमिक मिलता है। इसके अलावा प्रतिदिन 200 विधवाओं के भोजन की व्यवस्था अक्षय पात्र के जरिए भी करता है।

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