मोबाइल की लत से शुष्क हो रही बच्चों की आंखें, बढ़ रहा है डिप्रेशन

मोबाइल की लत से शुष्क हो रही बच्चों की आंखें, बढ़ रहा है डिप्रेशन
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suchita mishra | Updated: 09 Oct 2019, 11:09:36 AM (IST) Mathura, Mathura, Uttar Pradesh, India

 

जिला अस्पताल में मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए दिया जा रहा है परामर्श।

मथुरा। जिला अस्पताल में मानसिक रूप से बीमार लोगों के इलाज वाले मन कक्ष में अब बच्चों को मोबाइल के नशे से मुक्त कराया जा रहा है। दरअसल हाल ही महानिदेशक चिकित्सा व स्वास्थ्य ने सीएमओ को पत्र लिखकर कहा था कि आत्महत्या की बढती घटनाओं, मोबाइल नशा जैसे नवीन मनोविकारों की रोकथाम के लिए बच्चों को परामर्श व औषधियां उपलब्ध कराई जाएं।

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इस पत्र के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शेर सिंह ने तत्काल रूप से जिला अस्पताल में परामर्श की व्यवस्था कराई। डॉ. शेर सिंह ने बताया कि मोबाइल के अधिक प्रयोग से आजकल बच्चे, युवा और वृद्धजन समेत हर आयुवर्ग के लोगों में नए नए रोग जन्म ले रहे हैं। लोगों द्वारा मोबाइल का प्रयोग इस हद तक किया जा रहा है कि उनकी आंखों की नमी खत्म होती जा रही है, जिसके कारण आखें शुष्क होने लगी हैं। यदि बच्चों से मोबाइल ले लिया जाए या उन्हें इसका प्रयोग करने से रोका जाए तो वे आक्रामक हो जाते हैं।

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शराब और ड्रग्स से ज्यादा खतरनाक है मोबाइल का नशा
मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि मोबाइल का नशा शराब और ड्रग्स के नशे से ज्यादा खतरनाक है। इसकी वजह से बच्चों में नींद न आना, भूख की कमी, दिमाग पर बुरा असर और आंखें खराब होने जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। वहीं इसकी वजह से बच्चों में डिप्रेशन के मामले भी काफी बढ़ रहे हैं। इंटरनेट की दुनिया में मौजूद ब्लू व्हेल जैसे तमाम खतरनाक गेम कई बार बच्चों को अवसाद में ले जाकर आत्महत्या तक की कगार पर छोड़ देते हैं।

जिला चिकित्सालय में दिया जा रहा परामर्श
महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल में बाकायदा मोबाइल की लत को छुड़ाने के लिए एक सेंटर खोला गया है। इसके लिए उन्हें चिकित्सकीय परामर्श दिया जा रहा है। अभिभावक बच्चों में बढती इस लत से आजिज़ हैं लेकिन वह खुद भी इसका मोह नहीं छोड पा रहे हैं।

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