जानिए मोक्षदा एकादशी व्रत कथा और इसका महत्व

मोक्षदा एकादशी 2018 व्रत तिथि व मुहूर्त

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Published: 18 Dec 2018, 11:16 AM IST

मथुरा। एकादशी उपवास का हिंदुओं में बहुत अधिक महत्व माना जाता है। सभी एकादशियां पुण्यदायी मानी जाती है। मनुष्य जन्म में जाने-अंजाने कुछ पापकर्म हो जाते हैं। यदि आप इन पापकर्मों का प्रायश्चित करना चाहते हैं तो एकादशी उपवास आपको जरुर करना चाहिए। इन्हीं खास एकादशियों में एक होती है मोक्षदा। मार्गशीर्ष मास की शुक्ल एकादशी का नाम मोक्षदा है। मोक्षदा एकादशी व्रत की खासियत यह है कि यही वो दिन है जब भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर मानव जीवन को नई दिशा देने वाली गीता का उपदेश दिया था। यानि मोक्षदा एकादशी के दिन ही गीता जयंती का पर्व भी मनाया जाता है। आइये जानते हैं मोक्षदा एकादशी व्रत के महत्व व इसकी पौराणिक कथा को। मोक्षदा एकदशी के दिन ही गीता जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण के मुख से पवित्र भगवत गीता का जन्म हुआ था। मोक्षदा एकादशी का सार भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं अर्जुन से कहा था। इस पवित्र दिन की कहानी भगवान के मुख से ही उद्धृत हुई थी।


मोक्षदा एकादशी महत्व

इस व्रत का उद्देश्य पितरों को मुक्ति दिलाना हैं। इससे मनुष्य के पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। उनके कर्मों एवं बंधनों से उन्हें मुक्ति मिलती है। यह एकादशी व्रत श्री हरी के नाम से रखा जाता है। इनके प्रताप से मनुष्य के पापों का नाश होता हैं और मनुष्य के मृत्यु के बाद उसका उद्धार होता है।
पौराणिक ग्रंथों में मोक्षदा एकादशी को बहुत ही शुभ फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप-दीप नैवेद्य आदि से भगवान दामोदर का पूजन करने, उपवास रखने व रात्रि में जागरण कर श्री हरि का कीर्तन करने से महापाप का भी नाश हो जाता है। यह एकादशी मुक्तिदायिनी तो है ही साथ ही इसे समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली भी माना जाता है। मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी व्रतकथा पढ़ने-सुनने मात्र से ही वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।


मोक्षदा एकादशी व्रत पूजा विधि

इस व्रत के पालन से पुरे कुटुंब को सुख की प्राप्ति होती है। मोक्षदा एकादशी व्रत का महत्व धनुर्मास के कारण अधिक बढ़ जाता है। दक्षिणी भारत में इसका पालन पुरे धार्मिक रीती रिवाज से किया जाता है।

मोक्षदा एकादशी 2018 व्रत तिथि व मुहूर्त

एकादशी तिथि – 18 दिसंबर 2018

पारण का समय – 13:19 से 15:21 बजे तक (19 दिसंबर 2018)

पारण के दिन हरिवासर समाप्ति का समय – 13:17 बजे (19 दिसंबर 2018)

एकादशी तिथि आरंभ – 07:35 बजे (18 दिसंबर 2018)

एकादशी तिथि समाप्त – 7:57बजे (19 दिसंबर 2018)

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