ऑक्सीजन मास्क लगाकर ढाई घंटे तक कोरोना टेस्ट के लिए तड़पता रहा मरीज

— जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में हद दर्जे की लापरवाही देखने को मिली, जहां कोरोना टेस्ट कराने को लोगों की भीड़ देखने को मिली।

By: arun rawat

Published: 03 May 2021, 04:52 PM IST

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

मथुरा। जिला प्रशासन कोरोना काल में लोगों को अच्छी सुविधा देने की बात भले ही कहता हो लेकिन जमीनी हकीकत इन सबसे परे है। स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था कि एक बार फिर पुल जिला अस्पताल प्रांगण स्थित बने ट्रॉमा सेंटर में खोलकर रख दी है। स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों और कर्मचारियों की मनमानी लोगों की जान लेने पर आमादा है। मुंह पर ऑक्सीजन का मास्क लगे हुए एक मरीज को ढाई घंटे कोविड-19 कराने के लिए इंतजार करना पड़ा। डॉक्टर और कर्मचारियों से कई बार गुहार लगाने के बाद भी किसी ने भी इस मरीज की नही सुनी। नाजुक स्थिति में मरीज काजल हौसला दम तोड़ने लगा तब कहीं जाकर कोविड-19 कर रहे कर्मचारियों ने सैंपल कलेक्ट किया।

जिला अस्पताल में स्थित ट्रॉम सेंटर एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछली बार एक महिला कोविड-19 का टेस्ट कराने के लिए ट्रॉमा सेंटर पहुंची थी जहां करीब डेढ़ से 2 घंटे महिला ट्रॉमा सेंटर के मेन गेट के सामने फर्श पर पड़ी रही और वह बेहोश हो गई थी। ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है ट्रॉमा सेंटर का जहां 42 वर्षीय एक मरीज अपनी कोविड-19 के लिए सैंपल देने आया और उस मरीज को करीब ढाई घंटे इंतजार करना पड़ा। मरीज के ऑक्सीजन सिलेंडर लगा हुआ था और बार-बार मरीज का ऑक्सीजन लेवल ऊपर नीचे हो रहा था। ऑक्सीजन लेवल ऊपर नीचे होने की वजह से मरीज काफी घबरा रहा था और मरीज के साथ आए हुए लोग डॉक्टरों और कर्मचारियों से सैंपल कलेक्ट करने की मिन्नतें करते रहे लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं था। मरीज के साथ आए तीमारदार इधर उधर डॉक्टरों और स्टाफ के चक्कर लगाते रहे लेकिन उन्हें मायूसी के अलावा कुछ भी हाथ नहीं लगता और दुत्कार कर उन्हें वहां से भगा देते। मरीज के साथ आए परिजनों का जब हौसला जवाब देने लगा तो परिजनों ने अधिकारियों के नंबरों पर फोन घुमाना शुरू किया लेकिन अधिकारी भी उन्हें संतुष्टि पूर्वक जवाब नहीं देते दिखाई दिए।


सीएमओ साहब जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ अमिताभ पांडेय के ऊपर ठीकरा फोड़ते हुए नजर आए तो वही डॉ अमिताभ पांडेय ने सीएमओ साहब की कार्यप्रणाली पर फोन पर ही सवाल खड़े कर दिए। सीएमएस साहब सीएमओ साहब को लापरवाही रवैया का जिम्मेदार फोन पर बताते और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते। यहां सीएमओ और सीएमएस की कार्यप्रणाली पर उंगली खड़े करते तो रहे लेकिन मरीज की मदद करने के लिए किसी ने भी आगे चलकर हाथ नहीं बढ़ाया। मरीज सतीश कुमार के साथ आए परिजनों ने फोन पर जानकारी देते हुए स्वास्थ्य विभाग के ऊपर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पिछले ढाई घंटे से मरीज ऑक्सीजन पर है और बार-बार मरीज का ऑक्सीजन लेवल ऊपर नीचे हो रहा है। डॉक्टरों से कई बार आरटी पीसीआर और एंटीजन टेस्ट के लिए बोला तो कोई भी संबंधित डॉक्टर या कर्मचारी सुनने को तैयार नहीं। उन्होंने बताया कि सांस लेने में मरीज को दिक्कत हो रही थी और डॉक्टर ने Antign और RTPCR टेस्ट कराने को बोला। लेकिन यहां का तो राम ही रखवाला है राम भरोसे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था चल रही है। कोविड -19 की किसी भी गाइड लाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बतायाा कि ढाई घंटे तक मरीज ऑक्सीजन सिलेंडर केेे साथ इंतजार करता रहा और ढाई घंटे काफी कहासुनी होने केे बाद मरीज की कोरोना जांच के लिए सैंपल कलेक्ट किया गया।

झुंड बनाकर खड़े यह लोग किसी सब्जी या राशन की दुकान पर सामान खरीदने नहीं आए हैं। बल्कि जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में कोविड-19 कराने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। ना तो इनसे कोई कहने वाला है और ना ही इनकी सुनने वाला। जहां आप बार-बार सोशल डिस्टेंस और कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करने के लिए बार-बार अपील की जा रही है लेकिन यहां उस अपील का कोई भी असर दिखाई नहीं दे रहा है। एक नहीं दो नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में लोग झुंड बनाकर खड़े हुए हैं और इन्हें बिल्कुल भी इंफेक्शन फैलने का खतरा नहीं है और ना ही इन्हें कोई चिंता। कोविड सैंपल कलेक्ट करने के रजिस्ट्रेशन के बाद ट्रॉमा सेटर पर कार्यरत कर्मचारी बोइलों को मरीजों को ऐसे देते नजर आए हैं मानो कि कोई क्रिकेट बॉल को फेंक रहे हो। कर्मचारी बोयल को फेंकते और मरीज बॉयल को कैच करते नज़र आये।


महर्षि दयानंद सरस्वती अस्पताल के प्रांगण में बने ट्रॉमा सेंटर के पीछे पीपीई किट आपको देखने को मिल जाएंगी। पीपीई किट का ट्रॉमा सेंटर के पीछे पड़ा होना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। हर दिन कोई ना कोई स्वास्थ्य कर्मी पीपीई किट Antign और RTPCR सैंपल कलेक्ट करने से पहले पहनते हैं और काम खत्म हो जाने के बाद इस किट को डस्टबिन में डालने की वजह ट्रॉमा सेंटर के पीछे खुले में फेंक देते हैं।जिससे यहां आने वाले मरीज और तीमारदारों को कोरोना वायरस संक्रमित करने का भी खतरा बढ़ जाता है। जब इन सभी मामलों को लेकर जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो कोई भी अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया और एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगाते फोन पर सुनाई दिए।

रिपोर्ट - निर्मल राजपूत

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