सरकारी स्कूलों का ये हाल आपको सोचने के लिए मजबूर कर देगा, इन हालातों में कैसे पढ़ेगा इण्डिया?

सरकारी स्कूलों का ये हाल आपको सोचने के लिए मजबूर कर देगा, इन हालातों में कैसे पढ़ेगा इण्डिया?

Amit Sharma | Publish: Aug, 03 2018 04:03:46 PM (IST) | Updated: Aug, 03 2018 07:33:23 PM (IST) Mathura, Uttar Pradesh, India

'पढ़ेगा तभी तो बढ़ेगा इण्डिया' मगर योगी सरकार में बेसिक शिक्षा के मंदिरों का नजारा देख आप कहेंगे 'अगर ऐसे पढ़ेगा तो कैसे बढ़ेगा इण्डिया'।

मथुरा। 'पढ़ेगा तभी तो बढ़ेगा इण्डिया' मगर योगी सरकार में बेसिक शिक्षा के मंदिरों का नजारा देख आप कहेंगे 'अगर ऐसे पढ़ेगा तो कैसे बढ़ेगा इण्डिया'। क्योंकि हालात ही कुछ ऐसे हैं। कहीं विद्यालय के भवन की छत गिर जाती है तो कहीं शिक्षक विद्यार्थियों के इन्तजार में बैठे हैं। कहीं विद्यार्थी तो हैं मगर शिक्षक नहीं है और कहीं दोनों हैं तो प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ाते हुये प्रधानाचार्य नौनिहालों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।

जनपद मथुरा के विकास खंड गोवर्धन के बेसिक शिक्षा विभाग के लगभग सभी स्कूलों का यह हाल है। यहां विभाग व प्रशासन की नीरसता के चलते बेसिक शिक्षा पर खर्च किये जा रहे बजट को पलीता लगाया जा रहा है।

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दृश्य-1
धार्मिक नगरी गोवर्धन कस्बा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय प्रथम में नौनिहालों के स्वास्थ्य व भविष्य से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है। विद्यालय प्रांगण के विशाल गड्ढे को भरने के लिये कस्बे की गंदगी ट्रैक्टरों के द्वारा विद्यालय परिसर में भरी जा रही है। सैकड़ों की तादात में ट्रैक्टर ट्रॉली खलने से गंदगी का टीला विद्यालय परिसर में लग गया है। तथा ***** अलग विचरण कर रहे हैं। आलम यह है कि गंदगी से उठने वाली दुर्गंध ने विद्यार्थियों को तो छोड़ो राहगीरों व कॉलोनी के नागरिकों तक का जीना दूभर कर दिया है। रोजाना स्थानीय नागरिक नगर पंचायत प्रशासन व विद्यालय प्रबंधन को कोसते हैं। वहीं विद्यार्थी व राहगीर तो इस दुर्गंध से मुंह ढ़क कर गुजर रहे हैं। दुर्गंध के कारण अधिकांश विद्यार्थी विद्यालय में खाना भी नहीं खाते हैं। इतना ही नहीं विद्यालय में 34 पंजीकृत विद्यार्थियों में से मात्र 14 या 15 ही विद्यालय पहुचते हैं।

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इस विषय में विद्यालय मै तैनात शिक्षकों से बात की गई तो पता चला कि विद्यालय में एक पुरूष प्रधानाचार्य उमाशंकर शर्मा के साथ तीन सहायक अध्यापिका तैनात हैं। तीन सहायक अध्यापिका तो विद्यालय में थीं मगर प्रधानाचार्य उमाशंकर शर्मा जी लंबे अवकाश पर गये हुए हैं। शिक्षिकाओं की सूचना पर पहुंचे विद्यालय प्रभारी एनपीआरसी व पू• मा• वि• द्वितीय के प्रधानाचार्य नृत्यगोपाल दुबे ने बताया कि विद्यालय प्रधानाचार्य व एनपीआरसी उमाशंकर शर्मा के लिखित अनुरोध व एसएमसी कमिटी के प्रस्ताव पर नगर पंचायत गोवर्धन द्वारा प्रांगण के गड्ढे भरने के लिये कस्बे की गंदगी विद्यालय परिसर में डाली जा रही है।

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यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि इस गंदगी से उड़ने वाली दुर्गंध व हर वक्त सुअरों के लगे रहने से विद्यालय के विद्यार्थियोंं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कुप्रभाव के बारे में सोचने की जहमत तक नहींं उठायी गयी। वहीं मोदी जी के स्वच्छ भारत अभियान को भी पलीता लगाया जा रहा है।

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दृश्य- 2 बेसिक शिक्षा में बरती जा रही संवेदन हीनता का दूसरा उदाहरण विकास खंड गोवर्धन का नगला उम्मेद का प्राथमिक विद्यालय है। कारगिल शहीद सोरन सिंह के गांव नगला उम्मेद के प्राथमिक विद्यालय में एक प्रधानाचार्य, एक सहायक अध्यापक व एक शिक्षामित्र तो तैनात है मगर पढ़ने के लिए एक भी विद्यार्थी नहीं है। गत दो वर्षों से उक्त विद्यालय में एक भी छात्र का पंजीकरण तक नहीं हुआ है।

ऐसा नहीं है कि विद्यालय स्टाफ ने इस ओर प्रयास नहीं किया। युवा, काबिल व योग्य प्रधानाचार्य श्रीनाथ गर्ग ने अपने निजी संसाधनों से विद्यालय को कॉन्वेंट स्वरूप प्रदान किया तथा शिक्षण के लिये लैपटॉप, प्रोजैक्टर व आधुनिक तकनीक जुटाई। गांव के घर-घर पहुंच कर अभिभावकों को समझाकर बच्चों को कॉन्वेंट से बेहतर शिक्षा प्रदान करने का आश्वासन देकर रजिस्ट्रेशन कराने का प्रयास किया मगर संपन्न गांव के अभिभावकों में आपसी प्रतिस्पर्धा व कॉन्वेंट कल्चर के चलते एक भी विद्यार्थी का रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ। हतोत्साहित प्रधानाचार्य ने अपनी पीड़ा व ग्रामीणों की नीरसता के चलते उच्चाधिकारियों को लिखित अवगत कराया मगर हल कुछ नहीं निकला। रोजाना विद्यालय तो खुलता है मगर विद्यार्थी नहीं होने से शिक्षक स्टाफ टाइम पास कर घर लौट आते हैं।

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