23 करोड़ के छात्रवृति घोटाले में समाज कल्याण अधिकारी निलंबित

- आईटीआई संस्थानों में 23 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में मुख्यमंत्री ने की कार्रवाई
- जिला समाज कल्याण अधिकारी पर निलंबन की हुई कार्यवाई
- निजी आईटीआई कॉलेजों और छात्रवृति में लगा घपले का आरोप
- एससीवीटी की भूमिका की भी होगी जांच
- सभी घोटालेबाज अफसरों-कर्मचारियों और संस्थानों के खिलाफ होगी एफआईआर

- फर्जीवाड़े में शामिल संस्थान होंगे ब्लैक लिस्ट

By: arun rawat

Published: 24 Dec 2020, 02:15 PM IST

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क


मथुरा. मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के द्वारा भ्रस्ट अधिकारीयों की गोपनीय जाँच कराने के बाद उन्हें दोषी मानते हुए उनके ख़िलाफ़ कार्यवाई करते हुए जिले के समाज कल्याण अधिकारी को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने संबंधित संस्थाओं पर रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। दोषी आईटीआई संस्थानों को शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के लिए ब्लैक लिस्ट भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस कार्रवाई से जिले में हड़कंप मचा है।

 

जिले में लगातार छात्रवृति घोटले के मामले सामने आते रहे है। निजी आईटीआई संस्थानों में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में घपले के मामले में बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के द्वारा जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया। साथ ही 23 करोड़ रुपये के इस भ्रष्टाचार में दोषी पाए गए सभी अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। बता दें कि जिले के करीब चार दर्जन से अधिक निजी आईटीआई कॉलेजों में आये हुए पैसे का बंदरबाट हो गया। लम्बे आरसे से मिल रही शिकायतों के बाद प्रदेश के मुखिया ने मामले का संज्ञान लेते हुए गोपनीय तरीखे से छात्रवृति घोटाले की जाँच कराई गयी। जांच समिति ने अलग-अलग तरीकों से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के नाम पर करीब 23 करोड़ रुपये गबन होने की रिपोर्ट दी। दर्जन भर अधिकारियों व कर्मचारियों की मिली भगत की पुष्टि भी हुई है।


तीन सदस्यीय जांच समिति ने पाया कि 11 मान्यताविहीन शिक्षण संस्थानों में करीब 2 करोड़ 53 लाख 29 हजार रुपये का गबन हुआ। जबकि, 23 कॉलेजों में पांच हजार से अधिक छात्रों ने कोर्स ही पूरा नहीं किया और उन्हें करीब 9.69 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति मिल गई। कई निजी आईटीआई कॉलेजों में स्वीकृत सीट के सापेक्ष करीब पांच हजार दाखिले अतिरिक्त कर लिए गए। इन्हें भी छात्रवृत्ति दिलाई गई। वहीं, 38 कॉलेजों में 100 से अधिक समान नाम, पिता का नाम और समान जन्म तिथि वाले फर्जी छात्रों को भी शुल्क भरपाई की गई। यही नहीं फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर भी छात्रों का दाखिले करने और उन्हें छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति कराने का काम भी हुआ।


इस पर मुख्यमंत्री ने सभी दोषी अफसरों, कर्मचारियों व संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश दिए हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए। मान्यताविहीन संस्थाओं में दाखिला लेने वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के लिए स्टेट काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग, लखनऊ की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। अब इनके खिलाफ भी जांच होगी।

By- Nirmal Rajpoot

arun rawat
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