बहुचर्चित अमर कॉलोनी दंपति हत्या कांड, तीन साल बाद भी हत्याकांड का खुलासा नही कर पायी मथुरा की तेजतर्रार पुलिस

- नहीं थम रहे मासूमों के आँसू

- न्याय न मिलने से परेशान बड़ी बहन ने कर ली आत्महत्या

- पुलिस कार्यवाई करती तो सलाखों के पीछे होते हत्यारे

- बच्चे समझ कर टाल देते हैं, पैरवी करने वाला नहीं है कोई

- राजनैतिक दबाब में पुलिस नहीं कर पा रही घटना का ख़ुलासा
- घटना के बाद से अब तक बदल चुके है कई एसएसपी
- थाना हाईवे क्षेत्र स्थित अमर कॉलोनी की थी घटना

By: arun rawat

Published: 26 Dec 2020, 12:09 PM IST

निर्मल राजपूत


पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क मथुरा. थाना हाईवे क्षेत्र में हुई दंपत्ति की हत्या और डकैती का 3 साल बाद भी पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है। न्याय की उम्मीद लेकर बैठे दो मासूम भाई बहन आज भी अपने माता-पिता के हत्यारों को सजा दिलवाना चाहते हैं,लेकिन पुलिस प्रशासन अपराधियों के सामने बौना साबित नजर आ रहा है। आज भी यह दोनों भाई बहन न्याय की आस लगाकर बैठे हैं। अब देखना यह होगा इन्हें न्याय कब तक मिल पाता है या फिर इनके माता-पिता के साथ हुई घटना फाइलों में दबकर रह जाती है।


ये था मामला


8 मार्च 2017 थाना हाईवे क्षेत्र के अमर कॉलोनी में हुई दंपत्ति की निर्मम तरीके से हत्या और डकैती का खुलासा मथुरा पुलिस 3 साल बाद भी नहीं कर पाई है। मासूम भाई-बहन अपने माता-पिता के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए और न्याय की आस लगाकर बैठे हैं। 8 मार्च की रात बनवारी लाल उम्र करीब 42 और उसकी पत्नी रविबाला उम्र करीब 38 वर्ष के परिवार के लिए काली रात साबित हुई। रविवाला और पति बनवारीलाल पर घर में सोते वक्त अज्ञात बदमाशों ने हमला कर निर्मम हत्या कर डकैती की घटना को अंजाम दिया और घर से रखे लाखों रूपये की नगदी और कीमती ज्वैलरी लेकर फरार हो गए थे। पुलिस आज तक ना तो इस घटना का खुलासा नहीं कर पाई है और ना ही इस मामले से जुड़े आरोपियों को अभी तक सजा दिला पाई है।

ये समान ले गए बदमाश


मृतक दंपति के छोटे बेटे राहुल ने बताया 8/9 मार्च की रात को हमारा परिवार अलग-अलग सोया हुआ था। मम्मी-पापा घर में बनी दुकान में सो रहे थे। मैं और छोटी बहन दीपा सामने पड़ोसी के घर में सोए हुए थे और मेरी बड़ी बहन राखी दूसरे पड़ोसी के यहां सोई हुई थी। मम्मी-पापा की अज्ञात बदमाशों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। उनकी आंखे निकाल ली गई थी और घर में जो कैश और ज्वैलरी थी उसे लेकर बदमाश फरार हो गए थे। जो पैसे पापा सेही बाजना में पुश्तैनी जमीन को बेचकर लाये थे 5 लाख रुपये को भी बदमाश ले गए। राहुल ने बताया कि दो चैन सोने की, सोने दो अंगूठी, मंगलसूत्र, दो चांदी की कोदनी, एक जोड़ी पाजेब चांदी की ,दो चांदी के हाथों के हार ,दो सोने की लोंग और कई चांदी के सिक्के थे। बदमाशों के द्वारा सामान ले जाया गया।

नहीं थम रहे मासूमों के आँसू


पत्रिका की टीम ने अमर कॉलोनी हत्याकांड से जुड़े परिवार के मासूम भाई-बहन दुःख दर्द बाँटने पहुँची। पत्रिका की टीम ने सुना वह दिल को झकझोर ने वाला था। दोनों मासूमों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। दोनों मासूम भाई-बहन के आंसू चीख़ चीख़कर अपने माता-पिता और बहन के हत्यारों को सजा दिलाने की माँग कर रहे थे।


न्याय न मिलने से परेशान बड़ी बहन ने कर ली आत्महत्या


दास्तां बताते बताते राहुल की आंखें भर आई उसने टीम को अपनी बड़ी बहन राखी के द्वारा की गई आत्महत्या करने की वजह भी बताई। राहुल ने टीम को बताया 8 अक्टूबर 2017 को मेरी बड़ी बहन राखी ने आत्महत्या कर ली और इस आत्महत्या की वजह हमें न्याय न मिलना। हर अधिकारी और नेता के चक्कर मेरी बहन राखी लगा लगाकर थक गई थी और हमें कहीं से भी न्याय की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही। नीचे से लेकर ऊपर तक यहां तक कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत मेरी बड़ी बहन राखी ने की, लेकिन वहां से भी कोई जवाब संतोषजनक नहीं मिला। इन सारी चीजों से तंग आकर मेरी बहन ने मौत को गले लगा लिया ।

पुलिस कार्यवाई करती तो सलाखों के पीछे होते हत्यारे


मृतक दंपत्ति के बेटे राहुल की लगातार उम्मीद अब जवाब देने लगी है। राहुल का कहना है कि अगर पुलिस कार्यवाही करती तो हत्यारे अब तक सलाखों के पीछे होते और हमारे परिवार को न्याय मिल गया होता।


न जाने कब मिलेगा मासूमों को न्याय


राहुल और उसकी छोटी बहन दीपा माता पिता के साथ-साथ अपनी बड़ी बहन को हर दिन याद करते हुए रो पड़ती है। दोनों भाई-बहनों की आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। वह दिन कब आएगा जब इन मासूमों को न्याय मिलेगा क्या यह मासूम इसी तरह से तिल तिल जीते रहेंगे।


सरकारी नौकरी का वादा भी नहीं हुआ पूरा


अमर कॉलोनी हत्याकांड दंपत्ति के बेटे का यह भी कहना है कि जब यह घटना हमारे परिवार के साथ घटी थी तब जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया था की सरकारी नौकरी दिला दी जाएगी। 18 साल की आयु पूरी होने के बाद नौकरी अभी तक नहीं मिली। अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली है। कई बार मंत्री लक्ष्मी नारायण से भी जाकर मिल चुके है उन्होंने भी आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया।


बच्चे समझ कर टाल देते हैं, पैरवी करने वाला नहीं है कोई


राहुल के ताऊ की लड़की रानू से जब बात की तो रानू ने बताया कि जब से चाचा-चाची की हत्या हुई है तब से आज तक में यही रह रही हूं। दोनों भाई बहनों के पास रहकर इन दोनों का दुःख दर्द बाँट लेती हूँ। रानू का कहना है कि दोनों बच्चे हैं और बच्चे समझ कर अधिकारी टाल देते हैं क्योंकि पैरवी करने वाला भी कोई नहीं है। उन्होंने कहा गरीब की कोई सुनवाई नहीं होती क्योंकि हमारे पास पैसा नहीं है और पुलिस पैसे लेकर काम करती है।

इनका हुआ लाई डिटेक्टर टेस्ट


रानू का कहना है की कुछ लोगों के पुलिस के द्वारा लाई डिटेक्टर टेस्ट किए गए जिनमें विनोद पुत्र स्वर्गीय गिरधारी लाल ,शिमला पत्नी विनोद और बुआ के लड़के रमन पुत्र सोरन इन सभी का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया गया था। पुलिस के द्वारा उस टेस्ट के बारे में भी हमें कुछ नहीं बताया गया।

जिसपर शक उसी का नही हुआ लाई डिटेक्टर टेस्ट


रानू ने बताया कि नीरज पुत्र करुआ ने पुश्तैनी जमीन लीज पर ले रखी है। नीरज बाजना का रहने वाला हैं। नीरज पुत्र करुआ पर शक था ,लेकिन पुलिस ने उसका लाई डिटेक्टर टेस्ट नहीं कराया। हत्या के बाद गांव के सभी लोग यहां आए। उसके मन में खोट नहीं था तो पुलिस से छुपकर क्यों रह रहा था।

राशन बेचकर चलता है घर का ख़र्च


राहुल से जब टीम ने पूछा की घर का खर्च कैसे चलता है तो राहुल की आंखें आंसुओं में डूब गई। रोते हुए राहुल ने बताया कि कुछ सामान वात्सल्य ग्राम से आता था। उस राशन से घर का ख़र्च चलता है। पीड़ित परिवार के बेटे ने कहा की राशन डीलर से जो राशन आता था उसे बेचकर घर का खर्च चलाते है। वात्सल्य ग्राम से राशन आना भी पिछले कई महीनों से बंद हो गया है।

दीपा की पढाई का खर्च स्कूल उठाता है


पत्रिका की टीम ने जब सबसे छोटी बेटी दीपा से जब उसके पढाई के खर्च के बारे में पूंछा तो दीपा ने कहा की पढाई का ख़र्चा स्कूल ही वहन करता है। दीपा ने ये भी बताया की जिस स्कूल में पढ़ती हूँ उसी स्कूल ने पढाई पूरी होने तक का ख़र्चा उठाने की बात कही है।

पुलिस अधिकारी बनना चाहती है दीपा


मृतक बनवारी लाल की सबसे छोटी बेटी दीपा ने बताया कि पुलिस अभी तक हमारे माता-पिता के हत्यारों को नहीं पकड़ पाई है। हमें पुलिस से कोई उम्मीद भी नहीं है। मैं पढ़ लिख कर एक पुलिस अधिकारी बनना चाहती हूं और मैं अपने माता-पिता के हत्यारों को पुलिस अधिकारी बनकर ही सजा दिलाऊंगी।

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