vaikuntha ekadashi 2018 पर खोला गया बैकुंठ द्वार, मोक्ष पाने निकले श्रद्धालु

बैकुण्ठ एकादशी पर खोला जाने वाले बैकुण्ठ द्वार साल में एक ही बार खोला जाता है। यह बैकुण्ठ द्वार पोष माह कि शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन खुलता है।

मथुरा। साल में एक बार खुलने वाले भगवान रंगनाथ जी का बैकुण्ठ द्वार बड़े ही धूम धाम और श्रद्धा भाव के साथ आज खोला गया। इस बैकुण्ठ द्वार से निकलने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु देश के कौने कौने से यहां पहुंचे।

ये है मान्यता
बैकुण्ठ एकादशी पर खोला जाने वाले बैकुण्ठ द्वार साल में एक ही बार खोला जाता है। यह बैकुण्ठ द्वार पोष माह कि शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन खुलता है। बैकुण्ठ एकादशी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पाप का विमोचन कर मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज वृंदावन के रंगनाथ मंदिर का बैकुण्ठ द्वार बड़े ही धूम धाम से खोला गया। पहले भगवान रंगनाथ जी की सवारी बड़ी ही धूम धाम से इस बैकुण्ठ द्वार से निकली गई। फिर उसके पश्चात देश के कौने कौने से आये हज़ारों श्रद्धालु बैकुण्ठ की चाह में इस दिव्य द्वार से निकले। इस बैकुण्ठ द्वार के खुलने का इंतज़ार श्रद्धालु काफी दिनों से करते हैं। रंगजी मंदिर पुरोहित रघुराज ने बताया कि हिन्दू परम्परा के अनुसार यह दक्षिण भारत का एक लोकप्रिय त्यौहार है, जो कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है लेकिन उत्तर भारत में इस बैकुण्ठ एकादशी को लोग पुत्रदा एकादशी के नाम से जानते हैं और बैकुण्ठ भगवान विष्णु का पवित्र निज निवास है। मान्यता के अनुसार बैकुण्ठ एकादशी पर उपवास हिन्दू वर्ष की शेष 23 एकादशी के बराबर माना जाता है।

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अमित शर्मा
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