यूपी के इस जिले में विकलांगता के कारण स्कूल से काटा लड़की का नाम...

विकलांगता बनी अभिशाप, दाखिले के लिए भटक रहा पिता, प्रबंधक ने दी आवासीय विकलांग विद्यालय में दाखिला कराने की सलाह

By: Abhishek Srivastava

Published: 25 Apr 2018, 09:26 PM IST

विजय मिश्र की रिपोर्ट...
मऊ. प्रधान मंत्री बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दे रहे हैं। विकलांगो को सम्मान दिलाने के लिए उन्हें विकलांग की बजाय दिव्वांग शब्द से संबोधित करने की बात कर रहे हैं। शिक्षा से लेकर नौकरियों तक में विकलांगों को तरजीह देने का दावा सरकारें करती हैं। वहीं दूसरी तरफ एक मासूम बेटी को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। उसे महज इसलिए स्कूल से निकाल दिया गया, क्योंकि वह विकलांग है। पढ़ने की ललक लिए मासूम अपने पिता के साथ स्कूल दर स्कूल भटक रही है, लेकिन कोई भी विद्यालय उसे दाखिला देने को तैयार नहीं। हर जगह विकलांगों के लिए इंतजामात ना होने की बात कहकर उसे लौटा दिया जा रहा है। मामला जनपद के मोहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र अंतर्गत कैराबाद कस्बे का है।

जनपद के मोहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के कैराबाद कस्बे निवासी जियाऊद्दीन की पुत्री असमा जिया विकलांग है। वह कस्बे के ही अमीना नियाज चिल्ड्रेन स्कूल में दो वर्ष से पढ़ रही थी। उसने गत वर्ष की परीक्षा में अच्छे नंबर लाकर अपनी मेधा क्षमता भी प्रदर्शित की थी। इसके बावजूद विद्यालय ने चालू सत्र में उसे प्रवेश देने से इनकार कर दिया। जियाऊद्दीन जब बेटी का दाखिला कराने पहुंचे, तब प्रबंधक अब्दुल लतीफ ने विकलांगता को वजह बताकर उसे दाखिला देने से इनकार कर दिया। प्रबंधक ने किसी विकलांग विद्यालय में दाखिला कराने की सलाह दे दी। बेटी को पढ़ाने का सपना पाले बेबस पिता ने क्षेत्र के लगभग सभी स्कूलों के चक्कर काटे, दाखिले के लिए मिन्नतें कीं, लेकिन किसी भी विद्यालय के संचालक का दिल नहीं पसीजा। उसे कहीं दाखिला नहीं मिला। लाचार पिता ने आला प्रशासनिक अधिकारियों से भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जियाऊद्दीन ने विकलांग बेटी के साथ विकलांगता की वजह से हो रहे भेद-भाव पर निराशा जताई और कहा कि प्रशासनिक अमले ने भी सहयोग नहीं किया। वहीं, प्रबंधक लतीफ ने कहा कि चूंकि बच्ची विकलांग है। हमारे विद्यालय में विकलांग बच्चों के लिए कोई विशेष व्यवस्था नही हैं। जिससे दिव्यांग बच्चों का विशेष खयाल रखा जा सके। लतीफ ने कहा कि इसीलिए मैंने बच्ची के पिता को बुलाकर किसी विकलांग विद्यालय में जहां छात्रावास की सुविधा उपलब्ध हो, वहां दाखिला दिलाने को कहा था।


ऐसे बचेगी, बढ़ेगी बेटी!

सरकार बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है। दूसरी तरफ एक बेटी असमा को दाखिला तक नहीं मिल रहा। इसकी हर कोई निंदा कर रहा है। लोगों ने प्रबंधक के तर्क की आलोचना करते हुए कहा कि जब विकलांग बच्चों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी, तब उसने शुरू में दाखिला कैसे ले लिया था। प्रबुद्ध नागरिकों ने उक्त विद्यालय के खिलाफ कार्रवाई करने और असमा का किसी विद्यालय में दाखिला सुनश्चित कराने की मांग की है।

Abhishek Srivastava
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned