125 परिवारों के पलायन के बाद जागे अधिकारी, अब शुरू की ये कार्रवाई

खास बातें

  • मेरठ के प्रहलाद नगर में 400 परिवारों में 125 कर चुके हैं पलायन
  • असामाजिक तत्वों पर अंकुश नहीं लगाने पर परिवार पलायन को मजबूर
  • मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद परिवारों को सुरक्षा देने की कवायद शुरू

By: sanjay sharma

Published: 30 Jun 2019, 01:36 PM IST

मेरठ। प्रहलाद नगर में पलायन का मुद्दा 'नमो ऐप' के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंचने के बाद पुलिस ने सुरक्षा की कवायद शुरू कर दी है। बता दें कि प्रहलाद नगर में अब तक कथित रूप से बहुसंख्यक वर्ग के 400 में से 125 परिवार पलायन कर चुके हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शाम होते ही यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा शुरू हो जाता है और वह बहू-बेटियों से छेडख़ानी करते हैं। इसके अलावा यहां फायरिंग, लूट और हत्याओं के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। लोगों का कहना है कि विशेष संप्रदाय के लोगों के कारण अपना घर छोडऩे को मजबूर हैं। वहीं सीएम कार्यालय तक मामला पहुंचने के बाद प्रशासनिक और पुलिस अफसरों ने क्षेत्र का दौरा किया है। इनके अलावा सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर, पूर्व महापौर हरिकांत अहलूवालिया समेत भाजपा के तमाम दिगगज नेताओं ने यहां पहुंचकर लोगों से बातचीत करते हुए कड़ी सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। इसके बाद से प्रहलाद नगर में गेट और सीसीटीवी कैमरे लगवाने के साथ पुलिस पिकेट की तैनाती की कवायद शुरू कर दी गई है।

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बंटवारे के बाद से यहां रह रहे लोग

बता दें कि देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान के बहुसंख्यक परिवार प्रहलाद नगर में आकर बस गए थे। पिछले दशक में करीब 400 परिवार यहां रह रहे थे। प्रहलाद नगर मेरठ शहर की ऐसी जगह है, जो मुस्लिम बाहुल्य इलाके के बीच में है। पिछले दस साल में यहां के माहौल में बदलाव आया और लोग अपने घर छोड़कर जाने लगे। इसकी शिकायत उन्होंने समय-समय पर जिला प्रशासन से ज्ञापन के जरिए भी की और लिसाड़ी गेट थाना पुलिस से भी शिकायत की, लेकिन क्षेत्र के शरारती तत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि धीरे-धीरे यहां के लोगों ने कहीं और अपना आशियाना तलाशना शुरू कर दिया। कथित रूप से 400 में से मात्र 125 परिवार यहां से औने-पौने दाम में अपना घर बेचकर शहर के अन्य स्थानों पर घर बनाकर रहने लगे। सूत्र बताते हैं कि पिछले तीन साल से यहां का माहौल शरारती तत्वों ने और ज्यादा खराब किया है। थाना पुलिस इन पर अंकुश लगाने में असफल रही है।

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'पलायन' का पता था तीन साल से

'नमो ऐप' पर शिकायत पहुंचने के बाद सीएम कार्यालय ने पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से रिपोर्ट तलब की थी। मौके पर एडीजी प्रशांत कुमार, कमिश्नर अनिता सी. मेश्राम, डीएम अनिल ढींगरा, एसएसपी नितिन तिवारी समेत अनेक अफसर लाव-लश्कर के साथ तीन दिन पहले प्रहलाद नगर पहुंचे थे। सीएम कार्यालय को जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसमें उन्होंने पलायन से साफ इनकार किया है। एडीजी प्रशांत कुमार ने यह माना कि यहां गेट लगवाने की मांग उनके पास जरूर आयी थी। जबकि यहां के लोगों का कहना है कि अफसरों को तीन साल से इस बारे में जानकारी है, लेकिन शरारती तत्वों के खिलाफ कुछ नहीं किया गया। प्रहलाद नगर से घर छोड़कर इस समय सरस्वती लोक में रह रहे आरएसएस कार्यकर्ता अशोक कथूरिया का कहना है कि तीन साल पहले शरारती तत्वों ने उनके परिवार को प्रताडि़त कर रखा था, लेकिन पुलिस कुछ सुनने को तैयार नहीं थी। इस संबंध में उन्होंने तत्कालीन डीएम को ज्ञापन भी दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं यहां इस समय रह रहे व्यापारी अजय सेठी का कहना है कि असामाजिक तत्वों ने यहां का माहौल खराब कर रखा है। पहले बहू-बेटियां अपने घर के सामने बैठ जाया करती थीं, लेकिन अब इनका उठना-बैठना बंद हो गया है। क्षेत्र में आपराधिक घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

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पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- वापस लाएंगे परिवारों को

भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने प्रहलाद नगर से पलायन के मुद्दे पर एक पत्र प्रमुख सचिव गृह को लिखा है और इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गेट लगवाने, सीसीटीवी कैमरे, पुलिस पिकेट व अन्य सुरक्षा देने की मांग की है। डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कहना है कि एक सांप्रदाय विशेष की नीति विस्तारवादी रही है। ये लोग किसी भी बस्ती में पहुंचकर बहुसंख्यक वर्ग के लोगों को परेशान करना शुरू कर देते हैं। जिसके कारण परेशान लोग अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पलायन करते हैं। अल्पख्यंक शुरू में हिन्दुओं से मकान महंगे खरीदते हैं और इसके बाद सस्ती दरों पर लोगों को मकान बेचकर पलायन करने को मजबूर करते हैं। उनका कहना है कि शहर विधानसभा में लगभग 30 प्रतिशत मकानों में ताले लटक चुके हैं। जबकि मतदाता सूची में लोगों के नाम दर्ज हैं। मौके पर वह लोग नहीं रह रहे हैं। जबकि 17 प्रतिशत लोग मौके पर हैं, लेकिन उनके नाम वोटर लिस्ट मे दर्ज नहीं है। वह चुनाव आयोग से मेरठ शहर विधानसभा की घर-घर जाकर जांच करने के लिए मांग कर चुके हैं। डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि प्रह्लाद नगर से पलायन के मुद्दे पर यदि ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं तो इसके खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे। लोगों की टीम बनाकर मकान बेचने वालों को रोकेंगे और बेचकर जा चुके लोगों को वापस लाने का प्रयास किया जाएगा।

'पलायन' पर शुरू हुई सरकारी कवायद

भले ही प्रशानिक और पुलिस अफसरों ने पलायन के मुद्दे पर अपनी क्लीनचिट दे दी हो, लेकिन कुछ नहीं होने के बावजूद यहां सुरक्षा की कवायद शुरू कर दी गई है। पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के साथ-साथ सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने प्रहलाद नगर के लोगों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सुरक्षा उनकी प्राथमिकता में है और यहां सुरक्षा के प्रबंध किए जाएंगे। उनके इस भरोसे के बाद यहां के लोगों को राहत मिली है। इन्हें भरोसा दिलाया गया है कि यहां दो स्थानों पर पुलिस पिकेट, प्रहलाद नगर के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे और गेट लगाने की कवायद शुरू की जा रही है।

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