scriptCook father's son Neeraj selected for Archery World Cup and Asian Game | कभी रसोइया पिता के साथ ठेले पर बेचता था सब्जी, आज तीरंदाजी वर्ल्डकप में पक्की की जगह | Patrika News

कभी रसोइया पिता के साथ ठेले पर बेचता था सब्जी, आज तीरंदाजी वर्ल्डकप में पक्की की जगह

अंतराष्ट्रीय क्रिकेट और घरेलू क्रिकेट मैदान में अपना जलवा दिखा रहे मेरठ के क्रिकेटरों के बाद अब मेरठ का एक और होनहार तीरंदाजी में अपना जलवा दिखाने के लिए तैयार है। मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम के मेस में खाने बनाने वाले रसोइया के बेटे ने अपने हुनर के दाम पर वर्ल्ड कप में स्थान बनाया है।

मेरठ

Published: March 28, 2022 02:07:50 pm

मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम के मेस में खाना बनाने वाले रसोइया के बेटे ने तीरंदाजी में एशियन गेम्स, तीरंदाजी वर्ल्डकप और वर्ल्ड गेम्स में अपनी जगह पक्की की है। रसोइया अक्षयलाल चौहान के इस तीरंदाज बेटे का नाम नीरज चौहान है। नीरज ने सोनीपत में 24 से 30 मार्च तक आयोजित होने वाली तीरंदाजी ट्रायल प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया। जिसके बाद उसने यह उपलब्धि हासिल की है। गोरखपुर निवासी अक्षयलाल ने महानगर के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में करीब 30 वर्ष तक खाना बनाते रहे। कोरोना संक्रमण के समय लगे लाकडाउन के बाद उनकी नौकरी चली गई। नीरज और उनके मुक्केबाज भाई सुनील ने पिता के साथ ठेले पर सब्जी बेचने का काम शुरू किया। इनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो निवर्तमान केंद्रीय खेल मंत्री किरन रिजिजू ने इसको संज्ञान लिया।
कभी रसोइया पिता के साथ ठेले पर बेचता था सब्जी, आज तीरंदाजी वर्ल्डकप में पक्की की जगह
कभी रसोइया पिता के साथ ठेले पर बेचता था सब्जी, आज तीरंदाजी वर्ल्डकप में पक्की की जगह

मंत्रालय ने दोनों खिलाड़ियों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक मदद की। कुछ महीने बाद ही नीरज का खेल कोटे से आईटीबीपी में चयन हो गया। रविवार को हरियाणा के सोनीपत में हुए तीरंदाजी ट्रॉयल में नीरज ने ऐसा कारनामा कर दिखाया कि पूरे मेरठ को उन पर गर्व है। उन्होंने एशियन गेम्स, वर्ल्डकप व वर्ल्डगेम्स में अपना टिकट पक्का कर लिया है। एशियन गेम्स जकार्ता में नवंबर में होगा। जबकि अप्रैल में तुर्की में वर्ल्डकप होगा और वर्ल्ड गेम्स अमेरिका में होंगे।
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बता दें कि मेरठ की इस क्रांतिधरा से कई ऐसे होनहार खिलाड़ी निकले हैं। जिन्होंने अपना और जिले का नाम देश और विदेश में भी खूब रोशन किया है। मेरठ और आसपास के जिलों में प्रतिभाओं की भरमार है। इसी लिए ही यहां पर खेल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए काफी जोर दिया गया। खेल विवि के बन जाने के बाद इस क्षेत्र के होनहार खिलाड़ियों को सुविधाएं मिली तो पदक के मामले में चीन और अमेरिका को भी पीछे छोड़ देंगे।

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