Eid-Ul-Azha: 'भारत और इस्लाम का बंधन मस्जिद की स्थापना के साथ हुआ, पैगंबर भारत के बारे में जानते थे'

सेक्टर और जोन में जिले को बांट मजिस्ट्रेट तैनात। शाही ईदगाह पर तैनात किया गया था फोर्स। शहर कारी ने दी लोगों को ईद की मुबारकबाद।

By: Rahul Chauhan

Published: 21 Jul 2021, 10:10 AM IST

मेरठ। बुधवार को पूरे मेरठ मेंं ईद—उल—अजहा (eid ul adha) का त्यौहार मनाया जा रहा है। इस साल के तमाम त्यौहारों की तरह बकरीद (bakrid 2021) की भी रौनक कोरोना संकट की भेंट चढ़ गई है। मेरठ की मस्जिदों में सामूहिक नमाज (namaz) पढ़ने पर रोक लगाई गई है, ऐसे में लोग घरों से ही ईद (eid) की नमाज पढ़ रहे हैं। त्यौहार पर शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं। मेरठ में सेक्टर और जोन में जिले को बांटकर मजिस्ट्रेटो की तैनाती की गई है। जो पुलिस के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में दिन भर भ्रमण करेंगे।

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बता दें कि मेरठ की सैकड़ों साल पुरानी शाही ईदगाह के बाहर भी फोर्स तैनात की गई है ताकि किसी भी हाल में नमाज़ियों की भीड़ इक्कट्ठी न हो। लोगों को कोविड 19 के खतरे का हवाला देते हुए घरों पर ही नमाज अदा करने की अपील की गयी है। मस्जिदों में भी कोविड नियमों का पालन करते हुए एक बार में सिर्फ पांच लोगों से ही नमाज अदा करने को कहा गया है। बकरीद के मौके पर मुल्क को बधाई देते हुए शहर काजी शफीकुर्रहमान ने अपील की है कि वो कुर्बानी के असली मकसद को अपनी जिंदगी में जरूर उतारें। कुर्बानी को लेकर जो एडवाइजरी जारी हुई है उसका पालन जरूर करें। उन्होंने लोगों से ईद-उल-अजहा की नमाज घर पर अदा करने की अपील के साथ कहा कि कोरोना संक्रमण के रोकने में मदद करें। उन्होंने कहा कि हम सभी को सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। उन्होंने लोगों से कहा कुर्बानी घरों में ही करें और सोशल मीडिया पर इसकी फोटो न डालें।

पैगंबर ने कहा था भारत में सुखद हवा चल रही है

इस दौरान बताया कि इस्लाम और भारत के बीच पहला बंधन पैगंबर के काल (631 सीई) के दौरान केरल में एक मस्जिद की स्थापना के साथ हुआ। पैगंबर मुहम्मद भारत के बारे में जानते थे क्योंकि उन्होंने कहा था कि 'भारत से एक सुखद हवा चल रही है'। वर्तमान में, भारत में लगभग 172 मिलियन मुस्लिम निवासी है, जिनकी लगभग 14.2 प्रतिशत कुल जनसंख्या हैं (जनगणना 2011 के अनुसार)। इसका मतलब था कि भारत में इंडोनेशिया और पाकिस्तान को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश की तुलना में अधिक मुसलमान हैं।

उन्होंने कहा कि मुसलमान पूरे भारत में फैले हुए हैं। इनमें विप्रो के अजीम प्रेमजी से लेकर दिलीप कुमार तक शामिल हैं। तीन मुसलमान राष्ट्रपति बन गए हैं और अनगिनत अन्य हैं जिन्होंने सर्वोच्च पदों पर कब्जा कर लिया है-इदरीस हसन लतीफ वायु सेना के चीफ ऑफ स्टाफ थे और जफर सैफुल्ला कैबिनेट सचिव आदि थे। इसके अतिरिक्त, मो हिदायतुल्ला, अजीज मुशब्बर अहमदी, मिर्जा हमीदुल्ला बेग और अल्तमस कबीर ने आजादी के बाद से कई मौकों पर भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला और कई अन्य। उन्होंने कहा कि फिर भी समुदाय काफी हद तक अशिक्षित और गरीब है।

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उन्होंने कहा कि सवाल उठता है कि मुसलमान व्यावसायिक और अकादमिक प्रवृत्तियों से क्यों कटे हुए हैं? स्थिति से निपटने का रास्ता भारत के मुसलमानों के पास है। उन्हें कड़वाहट को दूर करना होगा और समुदाय के भीतर धार्मिकता के स्तर को कम करना होगा। यह अच्छी नागरिकता के लिए अनुकूल नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यवसाय, उद्योग और सबसे महत्वपूर्ण, समुदाय के भीतर लैंगिक समानता पर ध्यान केंद्रित करना होगा। यह केवल मुसलमानों पर निर्भर करता है कि वे अपने जीवन स्तर को कैसे ऊपर उठाते हैं और सरकार का समर्थन करते हैं क्योंकि वर्तमान सरकार ने मुसलमानों के लिए कई लाभकारी योजनाएं शुरू की हैं।

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