Kranti 1857: ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ यहां क्रांतिकारियों की होती थी बैठकें, फिर एक दिन भड़की चिंगारी

Highlights

  • मेरठ में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 10 मई 1857 को हुआ था
  • विक्टोरिया पार्क में होती थी क्रांतिकारियों की अहम बैठकें
  • मेरठ जनपद के बाद पूरे देश में हुआ था क्रांति का विस्तार

 

By: sanjay sharma

Published: 05 May 2020, 04:04 PM IST

मेरठ। 1857 में देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी मेरठ से ही भड़की थी। यही वह क्रांतिकारी शहर था जहां पर रात-रात भर अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारी महत्वपूर्ण रणनीति बनाते थे। 1857 की मई के शुरूआती दिनों से ही क्रांतिकारियों ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया था। उस समय का विक्टोरिया पार्क चारों ओर जंगलों से घिरा हुआ था। यहां किसी भी तरफ से पहुंचा जा सकता था। इसी में एक पक्की सराय बनी हुई थी, जो कि खंडहर थी। जो कि आजकल मेरठ कालेज का हॉस्टल बन चुका है। यह आज भी खंडहर हाल में ही है।

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आजादी के बाद क्रांतिकारियों की पहचान चिन्ह के रूप में मौजूद रहने के लिए इसका जीर्णोद्वार करवाया गया, लेकिन ये आज भी उपेक्षित है। 1857 में क्रांतिकारी मौलाना अहमद शाह, अजीमुल्ला खां समेत कई देशभक्त रातों में आकर गुप्त बैठक किया करते थे और दिन का उजाला होते ही यहां से भूमिगत हो जाते थे। इतिहासकार डा. विघ्नेश त्यागी का कहना है कि 1857 की क्रांति का पूरा तानाबाना इसी विक्टोरिया पार्क की सराय में बनाया गया था। एक तरह से यह सराय क्रांतिकारियों के संदेशवाहक के तौर पर प्रयोग की जाती थी। कौन क्रांतिकारी कहां पर है और किस काम को अंजाम दे रहा है। सब यहां से पता चल जाता था। डा. विघ्नेश त्यागी कहते हैं कि क्रांति का विस्तार एवं फै़लाव लगभग समूचे देश में था। अंग्रेजी इतिहासकार ऐसा मानते है कि यह एक स्थानीय गदर था, लेकिन वास्तविकता ऐसी नहीं थी। यह बात जरुर सही है कि इसका केन्द्रीय क्षेत्र दिल्ली एवं पश्चिम उप्र के क्षेत्रों में था, लेकिन व्यापकता का असर लगभग समूचे देश में था।

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उत्तर भारत मे देखें तो इसके मुख्य स्थान बैरकपुर, मेरठ, दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, झांसी, बुंदेलखंड़, बरेली, बनारस व इलाहाबाद रहे, जहां इस क्रांति का पूरा जोर था। बंगाल व असम का पूरा क्षेत्र उस समय कलकत्ता रेजीडेंसी के अधीन पड़ता था। वहां कलकत्ता व असम में आम जनता व राजाओं व रियासतों ने भाग लिया। बिहार में यह संघर्ष पटना, दानापुर, जगदीशपुर आदि अनेक स्थानों पर हुआ था। इसके साथ-साथ लाहौर, फिऱोजपुर, अमृतसर, जांलधर, रावलपिंड़ी, झेलम, स्यालकोट, अंबाला तथा गुरुदासपुर में भारतीय सैनिकों व आम जनता ने इस संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।

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