जर्मन से भारत आकर लड़ा चुनाव और बन गए पंचायत अध्यक्ष, फिल्मी लगती है ये कहानी

jila panchayat chunav जर्मन में था रियल एस्टेट का कारोबार, जीतने पर बोले वतन की मिट्टी खींच लाई अपने देश

By: shivmani tyagi

Updated: 27 Jun 2021, 07:07 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ (meeru news) जिला पंचायत चुनाव नामांकन के दौरान सपा प्रत्याशी सलोनी गुर्जर के अनुमोदक ने अनुमोदन से ही इंकार कर दिया। इस पर निर्वाचन अधिकारी ने सलोनी का पर्चा निरस्त कर दिया। इस कारण भाजपा के गौरव चौधरी निर्विरोध निर्वाचित हो गए। नवनिर्वाचित गौरव चौधरी की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। उन्होंने जर्मनी ( German ) से उच्च शिक्षा ली, वहीं पर कारोबार जमाया लेकिन वतन की मिट्टी अपने देश खींच लाई। यहां आकर पहली बार चुनाव लड़ा और बगैर चुनाव लड़े ही जिला पंचायत अध्यक्ष बन गए।

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गौरव पहली बार सक्रिय राजनीति ( jila panchayat chunav ) में आए हैं। इंटरमीडिएट तक की शिक्षा गौरव ने मेरठ से ही पूरी की। इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए जर्मनी चले गए। वहीं पर उन्होंने होटल के साथ रियल एस्टेट और आयात-निर्यात का कारोबार शुरू कर दिया। कारोबार पूरी तरह स्थापित होने पर गौरव भारत लौटे और पंचायत की राजनीति में सक्रिय हो गए। शनिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन के दौरान विपक्ष का प्रत्याशी पर्चा नहीं भर पाए, भाजपा ने सुबह से ही इसकी रणनीति पर काम शुरू कर दिया था। उधर पर्चा दाखिल कराने के लिए सपा और रालोद नेता बाउंड्री रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में एकत्र हुए। जहां सलोनी के प्रस्तावक के रूप में वार्ड दो की सदस्य मुनेश और अनुमोदक के रूप में वार्ड 10 से सदस्य अश्वनी शर्मा का नाम तय किया गया। सलोनी का पर्चा दाखिल होने की बात पता चलते ही भाजपा में हड़कंप मच गया, क्योंकि भाजपा निर्विरोध निर्वाचन चाहती थी

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सलोनी के बाद भाजपा नेता पूरे दलबल के साथ गौरव चौधरी का पर्चा दाखिल कराने पहुंचे। उनके साथ मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल, बागपत सांसद डॉ. सतपाल सिंह, विधायक ठा. संगीत सोम, जितेंद्र सतवाई, सत्यवीर त्यागी, सत्यप्रकाश अग्रवाल, सोमेंद्र तोमर, एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल, जिलाध्यक्ष अनुज राठी और महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल मुख्य रूप से रहे। भाजपा ने गौरव चौधरी के नामांकन में सुनील प्रधान को प्रस्तावक और ऋषि त्यागी को अनुमोदक बनाया। जिलाधिकारी और निर्वाचन अधिकारी के. बालाजी ने दोनों प्रत्याशियों के पर्चे लिए। सलोनी ने भी अपना पर्चा दाखिल किया लेकिन सलोनी का पर्चा निरस्त हो गया। इस तरह जर्मन से आए गौरव बगैर चुनाव लड़े ही जीत गए।

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