Gupt Navratri: 400 साल बाद बन रहा खास योग, इस तरह करेंगे पूजा तो मिला मनवांछित फल

Highlights:

-आगामी 12 फरवरी से शुरू हो रहे गुप्त नवरात्र

- आषाढ और माघ नवरात्रि में आते हैं गुप्त नवरात्र

- सन 1618 में माघ में गुप्त नवरात्र में एक साथ आए थे परिध योग और धनिष्ठा नक्षत्र

By: Rahul Chauhan

Published: 12 Feb 2021, 09:32 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मेरठ। प्रत्येक ऋतु में शक्ति पूजा का नौ दिवसीय विधान रखा गया है। वर्ष में अपने वाले चार नवरात्रों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। प्रकट नवरात्र एवं गुप्त नवरात्र। कलयुग में चैत्र एवं अश्विन नवरात्रि प्रकट नवरात्र हैं। जबकि आषाढ़ एवं माघ नवरात्रि गुप्त नवरात्र हैं। पंडित भारत भूषण के अनुसार इस गुप्त नवरात्र का प्रारंभ परिध योग व धनिष्ठा नक्षत्र तथा किंस्तुघ्न करण में त्रिआयामी शुभ प्रभावी है। यह योग 400 साल बाद बन रहा है। भारत भूषण के अनुसार इससे पहले यह योग 1618 के माघ के महीने में आए गुप्त नवरात्र में बना था। महाकाल संहिता के अनुसार सतयुग में चैत्र नवरात्र, त्रेता युग में आषाढ़ नवरात्र द्वापर युग में माघ नवरात्रि एवं कलयुग में अश्विन नवरात्रि की प्रमुखता रहती है। किंतु इसके साथ ही शाक्त ग्रंथों में उक्त चारों नवरात्रों में शक्ति पूजा का महत्व बताया गया है।

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बता दें कि इस माह 12 फरवरी से 21 फरवरी तक माघ नवरात्रि होंगे यह गुप्त नवरात्र हैं। नवरात्रों में शुंभ निशुंभ का वध करने वाली मां सरस्वती की उपासना प्रमुखता से होती है इन नवरात्रों में शाकंभरी पूजन का भी विशेष महत्त्व व विशेष विधान है। इन नवरात्रों में सभी प्रकार की गुप्त साधना प्रमुख रूप से फलदाई होती हैं। उन्होंने बताया कि इन नवरात्र में देवी की पूजा का अपना विशेष महत्व है। इन नवरात्र में पूजन करने से देवी का आर्शिवाद सदा बना रहता है।

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ये है शुभ मुहूर्त :-

-कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 8:34 से 9:59 बजे तक

-अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:58 बजे तक

-नवरात्र समाप्त 21 फरवरी

गुप्त नवरात्र में होती है मां के इन स्वरूपों की पूजा

पंडित भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि इन गुप्त नवरात्र में मां कालिके, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धुम्रवती,माता बगलामुखी, मातंगी माता और कमला देवी की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्र में सात्विक और तांत्रिक दोनों ही प्रकार की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्र में अपनी मनोकामना को गुप्त रखा जाता है। इस दौरान पूजा उपासना करके लोग दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करते हैं। गुप्त नवरात्र में अखंड ज्योति जलाई जाती है। कलश स्थापना कर उपवास रखा जाता है। गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। उपवास रखा जाता है। मां को फल का भोग लगाकर उन्हें वस्त्र और श्रृंगार सामग्री अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

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