रमजान में रोजे के दौरान भूलकर भी न करें ये काम

रोजा रखने से अाध्यात्मिक रूप से पवित्र हो जाता है व्यक्ति

By: sanjay sharma

Published: 21 May 2018, 03:17 PM IST

मेरठ। रमजान के इस पाक महीने में रोजेदार रोजा रखकर रहमत की दुआ मांगते हैं। ऐसा माना जाता है कि रोजा रखने से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से पवित्र हो जाता है। अल्लाह के कर्म को पाने के लिए रमजान माह को सबसे अहम माना है। रमजान के महीने में अल्लाह जन्नत के सभी दरवाज़े खोल देता है, और अपनी रहमत बरसाता है। अल्लाह की रहमत पाने के लिए रोजा रखने के दौरान रोजेदार को बहुत सी बातें ऐसी है जिनका विशेष ध्यान रखना चाहिए। रोजेदार का मन और तन रोजा रखने के लिए पवित्र नहीं है तो रोजा मकरूह हो जाता है। रोजे के दौरान रोजेदार को पूरी तरह से अल्लाह की इबादत में खुद को लीन करना होगा। जिससे उसके रोजे सफल हों।

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राेजे के दौरान ये काम बिल्कुल न करें

कारी शफीकुर्रहमान कहते हैं कि रोजा रखने के दौरान निम्न कामों का बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। अल्लाह के नाम पर झूठ नहीं बोलना चाहिए। रमजान के दौरान आपको अल्लाह की इबादत करनी चाहिए न कि उनके नाम पर झूठ बोलना चाहिए। यदि आप रोजा रखने के दौरान अल्लाह के नाम पर झूठ बोलते हैं, या किसी से अल्लाह के नाम पर पैसे एेंठते है या किसी को जान से मारने की धमकी देते हैं, तो ऐसे में आपका रोजा टूट जाता है। किसी भी प्रकार का नशा जैसे-धूम्रपान, शराब, तम्बाकू या अन्य कोई भी नशा यदि आप रोजा रखने के दौरान करते है। तो वह रोजा मान्य नहीं होता है और न ही अल्लाह द्वारा कबूला जाता है, इसीलिए रोजा रखने के दौरान आपको हर तरह के नशे से परहेज करना चाहिए। रमजान का पाक महीना अल्लाह की इबादत में लीन होने का है। रोजेदार को अपने मन को शांत रखने के लिए होता है। ऐसे में यदि रोजेदार लड़ाई झगड़ा करते हैं तो ऐसा नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से आपका रोजा मकरूह हो जाता है। कई लोग एक महीने तक रोजा यह सोचकर भी रखते हैं कि इससे उनका वजन कम हो जाएगा, लेकिन अल्लाह की इबादत को छोड़ आप अपने वजन को घटाने के लिए रोजा रखते है तो ऐसा रोजा अल्लाह द्वारा कबूला नहीं जाता है। यदि रोजेदार गीले कपड़े पहन रहे हैं तो इसे रोजा रखने के नियमो में वर्जित कहा गया है। ऐसा करने से भी रोजा मकरूह हो जाता है।

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इसलिए भी रोजा कबूला नहीं जाता

यदि किसी कारण रोजा रखने के दौरान आपके मुंह या दांत से खून आने लगता है या आप अपना दांत निकलवाते हैं तो वह रोजा भी कबूला नहीं जाता है, और आपका रोजा मकरूह हो जाता है। कारी शफीकुर्रहमान कहते है कि रोजा रखने के दौरान अपनी आवाज़ पर भी संयम बरतना चाहिए, और साथ ही न तेज से हंसना चाहिए। रोजा रखने पर दिन में पांच बार नमाज करना जरुरी होता है। यदि आप ऐसा नहीं करते है तो ऐसा करने से रोजा कबूला नहीं जाता है। तो ये हैं कुछ काम जो रोजेदार रखने के दौरान नहीं करने चाहिए। यदि रोजेदार इन्हें करते हैं तो उनका रोजा मकरूह हो जाता है।

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