scriptillegal arms started made in West UP as neared assembly election 2022 | UP Assembly Elections 2022 : पश्चिम में लहलहाने लगी अवैध हथियारों की फसल, तमंचे गुजरे जमाने की बात अब जमाना स्टाइलिश पिस्टल का | Patrika News

UP Assembly Elections 2022 : पश्चिम में लहलहाने लगी अवैध हथियारों की फसल, तमंचे गुजरे जमाने की बात अब जमाना स्टाइलिश पिस्टल का

UP Assembly Elections 2022 : चुनाव का मौसम हो और पश्चिमी उप्र में अवैध हथियारों की फसल न लहलहाए। ऐसा असंभव है। जिस तरह से बिहार का मुंगेर अवैध तमंचों और पिस्टल के लिए कुख्यात है। उसी प्रकार से पश्चिमी उप्र के कुछ जिलों से एनसीआर,पंजाब और हरियाणा तक में अवैध हथियारों के आर्डरों की पूर्ति होती है। यहां पर खेतों में बनी अवैध हथियारों की फैक्ट्री (illegal arms factory) में एक से एक बढ़िया तमंचे और पिस्टलों को बनाया जाता है।

मेरठ

Published: December 01, 2021 03:11:21 pm

मेरठ . UP Assembly Elections 2022 : विधानसभा चुनाव 2022 के नजदीक आते ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध हथियारों की खेती होने लगी है। पिछले कई दिनों में मेरठ,मुजफ्फरनगर,बागपत,बुलंदशहर में पकड़ी गई अवैध हथियारों की फैक्ट्रियां इसकी गवाह बन रही है। इससे पहले भी एनसीआर और पंजाब के पिस्टल सौदागरों के तार मेरठ के कई गांवों से जुड़े पाए गए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर,बुलंदशहर,शामली और सहारनपुर जिलों में दर्जनों ऐसे स्थान हैं जहां पर मौत का सामान बनाने वाली फैक्ट्री चलाई जाती हैं। यहां से ये अवैध हथियारों की खेप दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों में सप्लाई होती है।
आन डिमांड तैयार किए जाते हैं तमंचे और पिस्टल
बताया जाता है कि मेरठ इंचौली, किठौर, हस्तिनापुर,खरखौदा, परतापुर, मवाना, दौराला, सरधना थाना क्षेत्रों के इलाकों में आन डिमांड तमंचे और पिस्टल तैयार किए जाते हैं। तमंचे और पिस्टल बनाने वालों के संबंध दूसरों राज्यों के बड़े गैंग या उनके दलाल,सप्लायरों से रहते हैं। जो ऑन डिमांड तमंचे और पिस्टल बनवाते हैं। चुनाव के नजदीक आते ही इन हथियारों की मांग अचानक से बढ़ जाती है। हाल में ही हुए पंचायत चुनाव के दौरान भी मेरठ मंडल में कई तमंचा फैक्ट्री पकड़ी गई थीं। एडीजी मेरठ (ADG Meerut) ने इसे गंभीर मामला बताते हुए स्पेशल अभियान चलाने की बात कही है।
UP Assembly Elections 2022 : पश्चिम में लहलहाने लगी अवैध हथियारों की फसल, तमंचे गुजरे जमाने की बात अब जमाना स्टाइलिश पिस्टल का
UP Assembly Elections 2022 : पश्चिम में लहलहाने लगी अवैध हथियारों की फसल, तमंचे गुजरे जमाने की बात अब जमाना स्टाइलिश पिस्टल का
अवैध हथियार और पश्चिमी उप्र का 4 दशक पुराना नाता
पश्चिमी उप्र (WEST up)का अवैध हथियारों से करीब 4 दशक पुराना नाता है। सन 80 के दशक में जब गैंगवार (Gangwar) चरम पर था तो यहीं अवैध हथियार मौत उगला करते थे। जंगल में खेतों के बीच बने टयूबवैल में रातों—रात सैकड़ों तमंचे,बंदूक और राइफल बनकर तैयार हो जाती थी। जिनकी खेप एक जिले से दूसरे जिलों में आसानी से पहुंचा दी जाती थी। तमंचों को बनाने वाले हुनरमंद हाथों ने अब स्टाइलिश देशी पिस्टल का निर्माण भी अपने कारखाने में शुरू कर दिया है। मेरठ में थाना इंचौली में हाल में ही पकड़ी गई हथियारों की खेप में हथियार देख पुलिस कर्मी भी दंग रह गए।
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कुटीर उद्योग की मनिंद फैला है अवैध हथियारों का कारोबार
सूत्रों की माने तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तमाम कुटीर उद्योग फैले हुए हैं। जो कि असंख्य लोगों को रोजगार देने का काम करते हैं। इन्हीं में से एक है अवैध हथियारों का कारोबार। इसे भी जरायम की दुनिया में कुटीर उद्योग ही बोला जाता है। पश्चिमी उप्र में तीन स्तर पर अवैध असलहों (illegal weapons) का धंधा चलता है। पहल है पश्चिमी उप्र के जिलों में तमंचे और पिस्टल बनाने का,दूसरा बाहर से हथियारों की खेप लाककर उन्हें यहां से दूसरे जिलों और राज्यों को सप्लाई करना और तीसरा है मध्यस्था वाला। यानी बेचने और खरीदने वालों को मिलवाया और अपना कमीशन लेकर जेब में रखा। पश्चिमी उप्र से उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब (Punjab), हरियाणा के बदमाश असलाह खरीदते हैं।
मेरठ का राधना और मुजफ्फरनगर का जौला
मेरठ का राधना गांव और मुजफ्फरनगर का जौला गांव पूरे वेस्ट यूपी में अवैध हथियारों के लिए जाने जाते हैं। इन गांवों में आए दिन दूसरे राज्यों की पुलिस (Police) की छापेमारी होती रहती है। कहा तो यहां तक जाता है कि जब पुलिस को अवैध हथियारों की जरूरत होती है तो वो भी यहां के हथियार तस्करों (arms smugglers) से संपर्क करती है। जौला गांव के बारे में तो बताया जाता है कि वहां के हर व्यक्ति के भीतर तमंचा और पिस्टल बनाने का हुनर है। यहीं कारण है स्थानीय खुफिया एजेंसी की नजर इन गांवों में हर दम रहती है।
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राधना से पिस्टल की खेप दिल्ली होती थी सप्ताई
कुछ वर्षों पूर्व दिल्ली क्राइम ब्रांच (Delhi Crime Branch) ने एनसीआर (NCR) के पिस्टल सौदागर सविंदर को 50 पिस्टलों और भारी मात्रा में कारतूसों के साथ तो मेरठ क्राइम ब्रांच ने पंजाब के तीन तस्करों को चार पिस्टलों के साथ परीक्षितगढ़ से दबोचा था। पंजाब के ये तस्कर किठौर के गांव राधना से पिस्टल की खेप (pistol consignment) लेकर जाते थे और उनको सप्लाई करते थे।
चुनाव के दौरान बढ़ती डिमांड
चुनावी सीजन में हथियारों की डिमांड बढ़ जाती है। पुलिस का रिकॉर्ड खंगाला जाए तो चुनावी सीजन(election season) में सबसे ज्यादा हथियारों की खेप पकड़ी गई है। 2012 में 530 पिस्टल, 2013 में 430, 2014 में 415 व 2015 में 498, 2019 में 486,2021 में अब तक 256 पिस्टल पकड़ी गईं हैं। इतने वर्षों में पकड़े गए तमंचों की तो कोई गिनती ही नहीं है।
इस बारे में जब एडीजी मेरठ राजीव सभरवाल से बात की गई तो उनका कहना था कि सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां पर अवैध हथियारों के प्रति अभियान चलाए। ऐसे लोगों को चिहिंत करें जो इसको बनाने और सप्लाई करने का काम करते हैं। इन लोगों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

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