पंचायत चुनाव से वेस्ट यूपी के खादर में बनने लगा मौत का येे सामान

Highlights
- खादर में हुई अचानक कार्रवाई से बौखलाए शराब माफिया
- दर्जनभर भट्ठियों को किया ध्वस्त, हजारों लीटर लहन नष्ट
- पुलिस के हाथ नहीं लगा कोई शराब माफिया

By: lokesh verma

Published: 05 Mar 2021, 10:07 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. पंचायत चुनाव (Panchayat Election) नजदीक आते ही गंगा किनारे खादर में अवैध और जहरीली शराब की भटिटयां दहकने लगी हैं। देसी शराब का अवैध कारोबार जिले में बड़े पैमाने पर फलता-फूलता है। पंचायत चुनाव में बड़े पैमाने पर देसी शराब ही खपाई जाती है। पंचायत चुनाव में खादर देसी शराब की सप्लाई का बहुत बड़ा गढ़ है। खादर पश्चिम उत्तर प्रदेश (West Uttar Pradesh) के कई जिलों में लगता है, जिसके कारण यहां के शराब माफियाओं पर अंकुश लगाना एक बड़ी चुनौती है। आबकारी विभाग की शह पर चलने वाला यह कारोबार खामोशी के साथ अब तेजी पकड़ रहा है। मेरठ का गंगा का खादर देसी शराब के लिए कई दशकों से बदनाम है। इसके अलावा जिले के दूसरे हिस्से में भी अवैध शराब (Illicit Liquor) तैयार कर बेची जा रही है। इतना ही नहीं पड़ोसी जिलों तक तैयार शराब की खेप पहुंचाई जाती है। सबकुछ जानने के बाद भी आबकारी विभाग कतराता रहता है।

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चुनाव के दौरान कच्ची शराब दावत का प्रमुख साधन

देहात क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी तेज होते ही ग्रामीणों को अपने पक्ष में करने के लिए दावत के प्रबंध शुरू हो गए हैं। चुनाव के दौरान कच्ची शराब दावत का प्रमुख साधन मानी जाती है। जिसके चलते गंगा खादर क्षेत्र में बडे पैमाने पर कच्ची शराब तैयार की जा रही है। शराब माफिया दिन के उजाले में धड़ल्ले से शराब तैयार कर रहे हैं। पुराने गले-सड़े उत्पादों में केमिकल डालकर देसी तरीकों से शराब तैयार कर उसकी क्षमता बढ़ाने को जहरीले पदार्थों का मिश्रण किया जा रहा है। लोहे के ड्रम में लहन को पकाया जा रहा है। इस दौरान भारी दुर्गन्ध चारों ओर फैल रही है, जिससे किसानों का खेतों में कार्य करना दूभर हो रहा है।

पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

हस्तिनापुर पुलिस ने अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब पांच हजार लीटर लहन और दस भट्ठियों को ध्वस्त किया है। हस्तिनापुर और मवाना थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से दोनों थानों की सीमाओं पर वीर नगर और प्रताप नगर के खादर क्षेत्र में अभियान चलाया। पुलिस ने इस दौरान लगभग पांच हजार लीटर लहन और दस भट्ठियों ध्वस्त कर दिया। हालांकि पुलिस के हाथ कोई भी शराब माफिया नहीं लग सका।

शराब माफिया होते हैं पुलिस की पकड़ से दूर

सबसे बड़ी समस्या शराब माफियाओं का पुलिस की गिरफ्त से दूर होना है। पुलिस की कार्रवाई में शराब और समान तो बरामद हो जाता है, लेकिन शराब माफिया कभी हाथ नहीं आते हैं। जिसके चलते पुलिस कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर पाती। पुलिस और आबकारी विभाग में सामंजस्य न होना भी शराब माफियाओं को बढ़ावा देता है।

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